अगर आप बेंगलुरु से मैंगलोर के बीच काम के सिलसिले में अक्सर आते-जाते रहते हैं तो आपके लिए एक अच्छी खबर है। मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार केंद्रीय सड़क परिवहन और हाईवे मंत्रालय (MoRTH)ने इन दोनों शहरों को जोड़ते हुए हाई स्पीड एक्सप्रेसवे बनाने का फैसला लिया है। दावा किया जा रहा है कि अगर यह एक्सप्रेसवे बनता है तो इन दोनों शहरों के बीच आवाजाही में लगने वाला कुल समय पहले के मुकाबले काफी कम हो जाएगी।
बता दें, कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से मैंगलोर के बीच की लगभग 350 किमी की दूरी को सड़क मार्ग से तय करने में करीब 7 से 8 घंटे का समय लग जाता है।

Hindustan Times की एक रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार इस साल जुलाई में ही MoRTH ने इस एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए परियोजना रिपोर्ट करने हेतु कंसल्टिंग फर्म का चुनाव करने के लिए बोलियां आमंत्रित की थी। बताया जाता है कि नवंबर में 9 फर्म ने तकनीकी बोलियां जमा की थी।
मंत्रालय की तरफ से संभावना जतायी जा रही है कि साल 2025 के शुरुआत में ही एक्सप्रेसवे के निर्माण की जिम्मेदारी चयनित कंपनी को सौंप दी जाएंगी। इसके बाद कंपनी के पास विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) बनाने के लिए 540 दिनों का समय होगा। संभावना जतायी जा रही है कि 2080 में एक्सप्रेसवे का निर्माण शुरू हो सकता है। बताया जा रहा है कि आमतौर पर सड़क मार्ग से बेंगलुरु से मैंगलोर तक आने-जाने में 7 से 8 घंटे तक का समय लगता है लेकिन इस एक्सप्रेसवे के बन जाने से इस दूरी को तय करने में मात्र 4 घंटे तक का समय ही लगेगा।
एक्सप्रेसवे की खासियतें

मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार यह एक्सप्रेसवे 335 किमी लंबा होने वाला है जिसका निर्माण कर्नाटक पब्लिक वर्क डिपार्टमेंट और नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के सहयोग से किया जाएगा। संभावना जतायी जा रही है कि यह एक्सप्रेसवे 4 से 6 लेन चौड़ा हो सकता है, जो हसन से होकर गुजरेगा और मैंगलुरु को कर्नाटक की राजधानी बेंगलोर से जोड़ेगा। इस एक्सप्रेसवे का निर्माण कई लेन में किया जाएगा, ताकि गाड़ियों की आवाजाही सरलता और तेज रफ्तार के साथ हो सकें और जाम जैसी परेशानियां पैदा न हो।
इस एक्सप्रेसवे के पूरी तरह से बन जाने के बाद दोनों शहरों के बीच आवाजाही करने में लगने वाला समय काफी ज्यादा घट जाएगा, जिससे काम के सिलसिले में आना और वापस अपने घर लौटने वाले लोगों को परेशानी नहीं होगी। मीडिया रिपोर्ट में किये गये दावे के अनुसार कर्नाटक की आर्थिक उन्नति को समर्थन करने के लिए ही इस एक्सप्रेसवे के निर्माण का फैसला लिया गया है ताकि इन दोनों शहरों में रहने वाले लोगों और व्यापार के सिलसिले में आने-जाने वाले लोगों को परेशानी न हो और आवाजाही में बेवजह समय बर्बाद न हो।



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