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शिवाजी का 'वाघ नख' UK से वापस लाने की तैयारी, जानिए कब आएगा भारत और कैसे पहुंचा यह ब्रिटेन!

मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज ने जिस खंजरनुमा हथियार 'वाघ नख' से अफजल खान को मौत के घाट उतार दिया था, उसे अब United Kingdom यानी ब्रिटेन से वापस लाने की तैयारियां चल रही हैं। बताया जाता है कि महाराष्ट्र सरकार इसी महीने लंदन जाएगी, जहां वह एल्बर्ट और विक्टोरिया म्यूजियम के साथ एक MoU साइन करेगी।

Shivaji maharaj statue

महाराष्ट्र सरकार के संस्कृति मंत्री सुधीर मुगंटीवार ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा, "हमें ब्रिटेन के अधिकारियों से एक पत्र मिला है, जिसमें उन्होंने शिवाजी महाराज के वाघ नख को वापस लौटाने पर अपनी सहमति जतायी है।" इसे कब वापस लाया जाएगा, इस बारे में विचार-विमर्श किया जा रहा है।

कौन था अफजल खान?

shivaji maharaj raigarh

मराठा सम्राठ छत्रपति शिवाजी महाराज ने जिस अफजल खान को मौत के घाट उतारा था, वह बीजापुर सल्तनत का सेनापति और वहां के सुल्तान आदिल शाह का सबसे बेहतरीन लड़ाका था। वह अपनी जीत के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहता था और किसी हद तक जा सकता था। बीजापुर और मराठों के बीच हुए युद्ध में आदिल शाह की मां ने शिवाजी महाराज की हत्या करने की जिम्मेदारी अफजल खान को सौंपी थी। वह छल से छत्रपति शिवाजी महाराज की हत्या करना चाहता था।

कब वापस आएगा 'वाघ नख'?

wagh nakh

महाराष्ट्र सरकार शिवाजी महाराज का 'वाघ नख' उसी दिन भारत वापस लाना चाहती है, जिस दिन उन्होंने अफजल खान की हत्या की थी। ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक 10 नवंबर 1659 को छत्रपति शिवाजी महाराज ने वाघ नख से बीजापुर के लड़ाका अफजल खान का पेट चीरकर उसे मौत के घाट उतारा था। लेकिन हिंदू कैलेंडर के अनुसार अभी उस दिन की सालगिरह का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही वाघ नख को भारत वापस लाने की कुछ अन्य संभावित तिथियों के बारे में भी सोच-विचार किया जा रहा है। सुधीर मुगंटीवार का कहना है कि UK के म्यूजियम में ही शिवाजी महाराज की जगदम्बा तलवार भी रखी हुई है, जिसे वापस लाने के बारे में बात की जाएगी।

3 साल के लिए भारत आएगा 'वाघनख'

छत्रपति शिवाजी महाराज के 'वाघनख' को 3 साल के लिए भारत लाया जाएगा, जिसे महाराष्ट्र के अलग-अलग संग्रहालयों में प्रदर्शित किया जाएगा। इसे वापस लाने के लिए महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री सुधीर मुनगंटीवार रविवार की देर रात ब्रिटेन के लिए रवाना भी हो चुके हैं। संभावना है कि छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक की 350वीं वर्षगांठ समारोह के एक हिस्से के रूप में जनता के सामने प्रदर्शित किया जाएगा। वाघनख के सिर्फ 3 साल के लिए भारत आने को लेकर भी महाराष्ट्र में राजनीति का दौर चल रहा है। शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने वाघनख की प्रमाणिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या यह शिवाजी का वाघनख है? साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि वाघनख क्या स्थायी रूप से भारत में रहेगा या इसे लोन पर लंदन के संग्रहालय से भारत लाया जा रहा है?

क्यों मारा गया था अफजल खान?

अफजल खान, जो मराठा साम्राज्य पर अधिकार करने के लिए छल का सहारा लेना चाहता था। उसने छत्रपति शिवाजी महाराज को प्रतापगढ़ के पास मिलने का संदेश भेजा, जिसे शिवाजी महाराज ने स्वीकार भी कर लिया था। लेकिन वह इस बात से अच्छी तरह से वाकिफ थे कि अफजल खान उनकी हत्या की साजिश भी रच सकता है। दोनों की मुलाकात का स्थान व समय तय हुआ और निर्धारित समय पर दोनों वहां उपस्थित भी हुए। अफजल खान ने शिवाजी महाराज को गले लगाने के बहाने उनकी पीठ पर खंजर से वार करने की कोशिश की।

shivaji maharaj

लेकिन शिवाजी महाराज पहले से ही सतर्क थे और वह 'वाघ नख' पहने हुए थे। उन्होंने उसी वाघ नख से अफजल खान का पेट फाड़ डाला। लेकिन अपने शामियाने से अफजल खान भागने में कामयाब हो गया। शिवाजी महाराज ने अफजल खान का पीछा किया और प्रतापगढ़ की युद्धभूमि में उन्होंने अफजल खान को मौत के घाट उतारा।

किया सम्मान से अंतिम संस्कार

chhatrapati

अफजल खान की हत्या के बाद शिवाजी महाराज उसका सिर लेकर अपनी मां जीजाबाई के पास गये। जीजाबाई ने शिवाजी महाराज से कहा कि भले ही अफजल खान से हमारी दुश्मनी रही हो, लेकिन उसकी मौत के साथ ही यह दुश्मनी भी खत्म हो गयी। इसलिए उसका अंतिम संस्कार सम्मानपूर्वक किया जाए। अपनी मां की बात मानते हुए शिवाजी महाराज ने प्रतापगढ़ में ही उसकी कब्र बनवायी, जो आज भी मौजूद है।

क्या होता है 'वाघ नख' और यह कैसे पहुंचा ब्रिटेन?

वाघ नख लोहे से बना एक हथियार होता है, जिसका सबसे पहले उपयोग शिवाजी महाराज द्वारा ही किया गया था। इसे एक हाथ में पंजे के नीचे पहना जाता है और लड़ाके युद्ध के समय दूसरे हाथ में तलवार लेकर युद्धभूमि में उतरते थे। वाघ नख का इस्तेमाल आम तौर पर निहंग सिख द्वारा किया जाता है जो इसे कटार की जगह अपनी पगड़ी में पहनते हैं। मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 1818 तक यह 'वाघ नख' सतारा कोर्ट में शिवाजी के वंशजों के पास सुरक्षित थी।

wagh nakh india

1818 में जब ईस्ट इंडिया कंपनी ने अंग्रेज अधिकारी जेम्स ग्रांट डफ को सतारा कोर्ट में रेजिडेंट राजनीतिक एजेंट बनाकर भेजा तो उन्हें यह 'वाघ नख' उपहार में दिया गया था। 1824 में जब डफ वापस इंग्लैंड लौटे तो अपने साथ वह इस वाघ नख को भी ब्रिटेन ले गये जहां उनके वंशजों ने इसे विक्टोरिया और एल्बर्ट म्यूजियम को दान कर दिया।

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