गुजरात के ढोलेरा के पास स्थित बावलियाली में मौजूद संत श्री नागाल्खा बापा-ठाकरधाम की गोप ज्ञान गाठा और पुनः प्राण प्रतिष्ठा के मौके पर महिलाओं ने कुछ ऐसा किया कि उनका नाम विश्व रिकॉर्ड में दर्ज हो गया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की मौजूदगी में इस महोत्सव के दौरान 75000 से अधिक महिलाओं ने पारंपरिक गोपी हुडो रास किया, जिसकी वजह से उनके नाम पर विश्व रिकॉर्ड ही दर्ज हो गया।
ये सभी महिलाएं भर्वाड समुदाय से थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने आधिकारिक X हैंडल पर इस महोत्सव की तस्वीरों को शेयर किया है।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री पटेल ने कहा कि साल 2025 संयोगवश एक ऐतिहासिक देश बन गया है। इस साल सरदार पटेल की 150वां जन्म दिवस मनाया जा है। इस साल बिरसा मुंडा का भी 150वां और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई का 100वां जन्म दिवस मनाया जाएगा। साथ ही संविधान का अमृत महोत्सव भी मनाया जा रहा है। इस साथ बड़े ही सुखद संयोग के तहत ही ठकरधाम की स्थापना के 375 साल पूरे होने के वर्ष ही इसे फिर से शुरू किया गया। इसके साथ ही इस मौके पर हुडो रास का आयोजन करने वालो को विश्व रिकॉर्ड बनाने की मुख्यमंत्री ने बधाई भी दी।
पटेल ने आगे कहा कि गोपालक समाज, जो श्रीकृष्ण का भक्त है ने पशुपालन में अपनी प्रमुख भूमिका निभाई है। प्रधानमंत्री मोदी के वक्तव्यों को ही दोहराते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि जब सरकार द्वारा किये गये प्रयासों के साथ समाज के प्रयास मिल जाते हैं, तब तरक्की दोगुनी होती है।
मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि शुरुआत में गोपी हुडो रास में 51000 महिलाएं ही हिस्सा लेने वाली थी लेकिन बाद में पारंपरिक पोशाकों में सजी लगभग 75000 से भी ज्यादा महिलाओं ने इस रास में हिस्सा लिया और विश्व रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवा दिया। गोपी हुडो रास करने वाली सभी महिलाओं ने लाल रंग की पोशाक, मुख्य रूप से घाघरा-चोली पहना था।
आयोजकों की ओर से पूज्य रामबापू ने मीडिया को बताया कि हमने पहले योजना बनायी थी कि इसमें 51000 महिलाएं ही हिस्सा लेंगी। लेकिन महिलाओं में इतना ज्यादा उत्साह था कि 75000 से ज्यादा महिलाओं ने इसमें हिस्सा लिया और यह कार्यक्रम एक विश्व रिकॉर्ड बन गया। इस मौके पर वर्ल्ड रिकॉर्ड ऑफ गिनीज फाउंडेशन के अध्यक्ष पवन सोलंकी भी मौजूद रहे, जिन्होंने इस कार्यक्रम को बतौर विश्व रिकॉर्ड दर्ज करवाना सुनिश्चित किया।
इसके साथ ही हुडा रास महोत्सव में 111 फीट की अगबत्ती और 22 फीट की बांसुरी भी आकर्षण का केंद्र बनी रही। कई गुजराती कलाकारों ने इस मौके पर अपनी प्रस्तुति देकर माहौल को भक्तिमय बना दिया था जिसने कार्यक्रम को सफल बनाया।



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