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हरियाणा जुड़ेगा अपने ऐतिहासिक जड़ों से, कुरुक्षेत्र में महाभारत से संबंधित जगहें बनेंगी पर्यटन स्थल

हरियाणा अपने ऐतिहासिक जड़ों से जुड़ने वाला है। हरियाणा के ऐतिहासिक जगहों को बतौर पर्यटन स्थल विकसित किया जाएगा, ताकि पूरी दुनिया से लोग आकर उन जगहों को देख सकें, जो हमें जीवन का सार समझाती हैं। जी हां, हरियाणा...जहां हुआ था कुरुक्षेत्र का ऐतिहासिक युद्ध।

पांडवों और कौरवों के बीच हुआ एक ऐसा युद्ध जहां अपनो ने ही अपनो के लिए रचा था चक्रव्यूह, जहां अपनो ने ही अपनो को उतारा था मौत के घाट। अब हरियाणा सरकार के पर्यटन विभाग ने कुरुक्षेत्र में महाभारत से जुड़ी सभी जगहों का विकास पर्यटन स्थल के रूप में करने की घोषणा की है।

बनेगा 'महाभारत सर्किट'

हरियाणा के पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा ने हाल ही में कुरुक्षेत्र और आसपास के जिलों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा की है। अपने धार्मिक महत्व और महाभारत से संबंधित होने की वजह से कुरुक्षेत्र का नाम पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। डॉ. शर्मा ने बताया कि कुरुक्षेत्र और आसपास के जिले 'महाभारत सर्किट' का हिस्सा होंगे। उन्होंने इस बात की घोषणा हाल ही में करनाल में आयोजित हुए दूसरे महाभारत सर्किट कॉन्फ्रेंस के दौरान की। यहां केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय और हरियाणा पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने यहां पर्यटन के विकास की संभावनाओं को लेकर चर्चा की।

₹200 करोड़ की लागत से होगा विकसित

Times Now की एक रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार लगभग महाभारत सर्किट का विकास लगभग ₹200 करोड़ की लागत से किया जाएगा। अलग-अलग राज्यों में रामायण सर्किट, श्रीकृष्ण सर्टिक आदि के विकास के बाद अब महाभारत सर्किट का विकास हरियाणा को देश के मानचित्र पर बतौर धार्मिक पर्यटन स्थल लोकप्रिय बनाने के बनाने के उद्देश्य से ही करने की योजना बनायी गयी है। इस परियोजना में सिर्फ ऐतिहासिक जगहों का विकास ही नहीं बल्कि देसी श्रद्धालुओं और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए योजनाएं बनायी जाएंगी।

कुरुक्षेत्र के आसपास महाभारत से जुड़े कौन से हैं पर्यटन स्थल?

ब्रह्म सरोवर - मान्यताओं के अनुसार इस सरोवर का निर्माण भगवान ब्रह्मा ने किया था, जिसके जल को काफी पवित्र माना जाता है। सर्दियों के मौसम में यह सरोवर दूर-दराज के इलाकों से आने वाले मेहमान प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट से गूंज उठता है।

श्रीकृष्ण संग्रहालय - यह एक ऐसा संग्रहालय है, जहां भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण वस्तुओं को सुरक्षित रखा गया है। पर्यटक इस म्यूजियम में जाकर इन वस्तुओं का दर्शन भी करते हैं जो इस बात की गवाही देते हैं कि हमारा इतिहास कितना समृद्ध था।

ज्योतिसर - यह वह स्थान है जिसके बारे में कहा जाता है कि यहां भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था। वर्तमान में यहां हर दिन हिंदी और अंग्रेजी भाषा में लाइट एंड साउंड शो का आयोजन किया जाता है।

भीष्म कुंड - इस कुंड का संबंध महाभारत के युद्ध से है। दरअसल, अर्जुन के बाणों से घायल होकर जब भीष्म पितामह बाणों की शैय्या पर लेटे हुए थे, तब उन्हें तेज प्यास लगी। श्रीकृष्ण के आदेश पर अर्जुन ने अपने तीर धरती पर मारे थे, जिससे एक तालाब का निर्माण हुआ था। इस स्थान के ठीक बगल में एक मंदिर भी मौजूद है जहां लोग दर्शन और पूजा के लिए आते रहते हैं।

समल्खा - इस स्थान को पांडवों का जन्म स्थान माना जाता है, जो अपनी धार्मिक मान्यताओं की वजह से काफी पवित्र भी माना जाता है।

इन स्थलों के अलावा हरियाणा में कई और जगहें भी हैं, जहां पर्यटन को विकसित करने की योजना बनायी जा रही हैं। उनमें शेखचिल्ली का मकबरा, गुरुद्वारा नवी पत्शाही साहिब, स्थानेश्वर महादेव का मंदिर, भद्रकाली का मंदिर आदि शामिल हैं। बताया जाता है कि महाभारत सर्किट सिर्फ हरियाणा ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हस्तीनापुर, मथुरा और बद्रीनाथ आदि में भी विस्तृत होगा।

हरियाणा पर्यटन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार महाभारत सर्किट में अकेला कुरुक्षेत्र ही लगभग 147 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें कई मंदिर, पवित्र स्थान और ऐतिहासिक हथियार भी शामिल हैं। मान्यताओं के अनुसार जिनका इस्तेमाल महाभारत के युद्ध में किया गया था।

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