हावड़ा में बन रही है देश की दूसरी केबल ब्रिज। केबल स्टे ब्रिज (Cable Stayed Bridge) यानी ऐसा ब्रिज जिसके टावरों से ब्रिज के डेक तक केबल लगे होते हैं। ये केबल सजावटी सामान नहीं बल्कि ब्रिज को आवश्यक समर्थन देते हैं और पुल का वजन समान रूप से बांटते भी हैं। सीधे शब्दों में अगर कहा जाए तो ऐसा ब्रिज जिसका वजन से लेकर ब्रिज के खड़े रहने का समर्थन तक केबल से मिलता है, उसे केबल स्टे ब्रिज कहा जाता है।
भारत का पहला सम्पूर्ण केबल स्टे ब्रिज मुंबई का अटल सेतु या ट्रांस हार्बल लिंक है, जहां ब्रिज के डेक (सतह) से ही केबल लगा हुआ है। पर हावड़ा में ऐसी ब्रिज कहां बन रही है? ब्रिज को बनाने का काम कितना पूरा हुआ है? और इस ब्रिज को बनाने की लागत क्या है?

हावड़ा में कहां बन रहा है केबल ब्रिज?
हावड़ा में केबल ब्रिज या केबल स्टे ब्रिज का निर्माण हावड़ा स्टेशन के पास किया जा रहा है। जी हां, आपने सही समझा है। हावड़ा स्टेशन से महज 200 मीटर की दूरी पर ही 100 साल पुरानी बोस्ट्रिंग ब्रिज को तोड़कर उसकी जगह पर जिस ब्रिज या रोड ओवर ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है वह एक केबल ब्रिज है।
हावड़ा स्टेशन के सबसे आखिरी छोड़ पर रेलवे ट्रैक के ठीक ऊपर इस ब्रिज का निर्माण किया जा रहा है, जो GT रोड को हावड़ा स्टेशन से जोड़ेगा। इस ब्रिज का डिजाइन ताइवान की एक कंपनी ने किया था, जिसका निर्माण एक भारतीय केबल स्टे ब्रिज विशेषज्ञ कंपनी कर रही है।
कितनी है लागत?
Times of India की एक रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार इस ब्रिज को बनाने की लागत करीब ₹174 करोड़ होने वाली है। इससे पहले इस जगह पर जो 100 साल पुरानी ब्रिज थी, उसे चांदमारी ब्रिज या बंगाली बाबु ब्रिज के नाम से जाना जाता था। वर्ष 1933 में इस ब्रिज का निर्माण किया गया था, जिसकी लंबाई करीब 60 मीटर थी।
बताया जाता है कि केबल स्टे ब्रिज का निर्माण दिसंबर 2019 में ही शुरू हो गया था लेकिन इस बीच कोरोना अतिमारी का प्रकोप बढ़ जाने की वजह से ब्रिज निर्माण का काम बंद कर देना पड़ा था। अब एक बार फिर से इस ब्रिज का निर्माण शुरू किया जा रहा है।
क्या होगा फायदा?
हावड़ा स्टेशन के पास केबल स्टे ब्रिज के बन जाने से हावड़ा में ग्रैंड ट्रंक रोड (GT Road) हावड़ा स्टेशन से जुड़ जाएगा। इससे स्थानीय लोगों को हावड़ा स्टेशन आने-जाने में आसानी तो होगी ही, साथ में जीटी रोड पर भी यातायात का दबाव थोड़ा कम हो सकेगा। लेकिन इस ब्रिज के बनने से सबसे ज्यादा फायदा लोकल ट्रेन और दूरगामी ट्रेनों से यातायात करने वाले यात्रियों को होगा। दरअसल, इस ब्रिज के बन जाने से पूर्व रेलवे (Eastern Railways) को कुछ और ट्रैक्स बनाने की जगह मिल जाएगी।
ट्रैक कम होने की वजह से अक्सर ट्रेनों को हावड़ा स्टेशन के आउटर सिग्नल पर रोक देना पड़ता है। ऐसा खासतौर पर लंबी दूरी की ट्रेनों के साथ होता है। अगर लंबी दूरी की ट्रेनें थोड़ा भी विलंब से हावड़ा पहुंचती हैं और उस समय तक ऑफिस यात्रियों की लोकल ट्रेन का समय हो गया होता है, तब लंबी दूरी की ट्रेनों को रोक कर पहले लोकल ट्रेनों को लाइन क्लीयर दिया जाता है। इससे लंबा सफर तय कर हावड़ा आने वाले यात्रियों को काफी परेशानी होती है। बता दें, पुरानी चांदमारी ब्रिज के नीचे अब तक मात्र 10 रेलवे ट्रैक्स ही थी, जिन्हें केबल ब्रिज के बनने के बाद रेलवे बढ़ा सकेगी।
नयी केबल ब्रिज की विशेषताएं
- हावड़ा में बन रही नयी केबल ब्रिज की लंबाई करीब 607 मीटर है।
- पहले वाली ब्रिज मात्र 2 लेन चौड़ी थी, जिसके मुकाबले नयी केबल ब्रिज 4 लेन चौड़ी बनायी जा रही है।
- ब्रिज के नीचे का क्लीयरेंस भी पहले की तुलना में लगभग 4 गुना बढ़कर 220 मीटर हो जाएगा।
- संभावना जतायी जा रही है कि हावड़ा में नई केबल ब्रिज का निर्माण दिसंबर 2025 तक पूरा कर लिया जाएगा।
- ब्रिज की स्टील से बनी मुख्य सतह का निर्माण अभी किया जा रहा है।
- ब्रिज के डेक (सतह) को स्टील के 11 हिस्सों से जोड़कर बनाया जाएगा, जिन्हें अपनी जगह टिकाए रखने का काम 56,000 बोल्ट्स करेंगे।
- इस ब्रिज के बन जाने से एचएम बोस रोड तक जाना काफी आसान हो जाएगा, जो जीटी रोड को हावड़ा से जोड़ता है।
- ब्रिज को मजबूती और समर्थन देने के लिए 81.4 मीटर के हाई पाइलॉन 54 केबल को ब्रिज के डेक से जोड़ा जाएगा।
Fun Fact : हावड़ा स्टेशन से महज 200 मीटर की दूरी पर बन रहे इस ब्रिज को जोड़ने के लिए 56000 बोल्ट का इस्तेमाल किया जाएगा लेकिन 200 मीटर की दूरी पर ही मौजूद दूसरा ब्रिज, हावड़ा ब्रिज को जोड़ने के लिए एक भी बोल्ट का उपयोग नहीं किया गया था।



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