पिछले लंबे समय से निर्माणाधीन हैदराबाद का अंबरपेट फ्लाइओवर का काम आखिरकार सम्पन्न होने ही वाला है। मीडिया रिपोर्ट्स में किये गये दावों को अगर सच मानें तो अगले 1 महीने के अंदर इस फ्लाइओवर को आम लोगों की आवाजाही के लिए खोल दिया जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स में तेलंगाना के रोड एंड बिल्डिंग मंत्री कोमाटिरेड्डी वेंकट रेड्डी के हवाले से इस बात की पुष्टि की गयी है।
बताया जाता है कि 19 जून को उन्होंने डॉ. बी आर अंबेडकर तेलंगाना राज्य सचिवालय में एक रिव्यू बैठक की। इस बैठक के बाद ही उन्होंने बताया कि अंबरपेट फ्लाइओवर का निर्माण कार्य लगभग पूरा होने वाला है।

इसी साल फरवरी में ग्रेटर हैदराबाद म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (GHMC) के कमिश्नर रोनाल्ड रोज ने अंबरपेट फ्लाइओवर के निर्माण कार्य का जायजा लिया था और अधिकारियों से काम में तेजी लाने के निर्देश दिये था। राज्य भर में जितने भी सड़क संबंधित निर्माण कार्य हो रहे हैं, उन्हें लेकर संबंधित अधिकारियों को चेतावनी देते हुए राज्य के मंत्री ने स्पष्ट कहा था कि अगर सड़क निर्माण के बाद वह क्षतिग्रस्त होती है, तो इसकी जिम्मेदारी सिर्फ निर्माणकारी संस्था ही नहीं बल्कि संबंधित अधिकारियों की भी होगी।
मंत्री रेड्डी ने कहा कि अगर आम लोगों का जीवन एक या दो अधिकारियों की वजह से प्रभावित होता है, तो उन अधिकारियों के खिलाफ तो कार्रवाई की ही जाएगी।
सड़क व बिल्डिंग निर्माण मंत्री ने राज्य भर में हो रहे विभिन्न हाईवे, रिजनल रिंग रोज, आउटर रिंग रोड आदि के काम में भी तेजी लाने का निर्देश दिया है।

किन इलाकों को जोड़ेगा फ्लाइओवर
मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार हैदराबाद में साल 2010 में ही अंबरपेट फ्लाइओवर का निर्माण करने की मंजूरी मिल गयी थी। इस फ्लाइओवर में रामनाथपुर, अंबरपेट पुलिस लाइन, शिवम रोड और गोलनाका में रैंप बनाए जा रहे हैं। रामनाथुर की तरफ से आने वाले वाहन इस फ्लाइओवर से होकर 'चे नंबर' चौरास्ता पार कर गोलनाका पहुंच जाएंगे।
उसी प्रकार शिवम रोड से मूश्रमबाग या रामनाथपुर की ओर जाने वाले वाहनों को फ्लाइओवर के नीचे से गुजरना पड़ेगा। जो वाहन रामनाथपुर से शिवम रोड की ओर जा रहे हैं, उन्हें 'चे नंबर' चौरास्ता से पहले ही नीचे उतरना होगा और अंडरपास लेना पड़ेगा।
मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार शुरुआती दौर में इस फ्लाइओवर के लिए भूमि अधिग्रहण के साथ 75 करोड़ रुपए आवंटित किये गये थे। लेकिन जैसे-जैसे इस फ्लाइओवर के निर्माण में देरी हुई समय के साथ-साथ लागत भी बढ़ती गयी।



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