हैदराबाद एयरपोर्ट मेट्रो लिमिटेड (HAML) और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने संयुक्त रूप से हैदराबाद में डबल डेकर फ्लाइओवर बनाने का फैसला लिया है। अगर ऐसा होता है तो यह हैदराबाद का पहला डबल डेकर फ्लाइओवर हो सकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार यह फ्लाइओवर 1.2 किमी लंबा होने वाला है। बता दें, हाल ही में बैंगलोर का डबल डेकर फ्लाइओवर भी बनकर तैयार हो चुका है जो अब उद्घाटन का इंतजार कर रहा है।

कहां बनेगा डबल डेकर फ्लाइओवर?
The Hindu की एक रिपोर्ट के अनुसार NHAI और HAML मिलकर हैदराबाद के मदीनागुड़ा (गंगाराम) इलाके में डबल डेकर फ्लाइओवर बनाने की योजना बनायी है। यह क्षेत्र काफी पतला है यहां सड़क के किनारे कई धार्मिक स्थान भी मौजूद है। इसवजह से ओवरहेड स्थानों का इस्तेमाल करने का फैसला लिया गया है। इस इलाके में सबसे पहले NHAI ने फ्लाइओवर बनाने का फैसला लिया था लेकिन बाद में HAML ने भी यहां मेट्रो रेल के लिए डबल डेकर फ्लाइओवर बनाने का प्रस्ताव रखा है।
कैसा होगा फ्लाइओवर?
मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार डबल डेकर फ्लाइओवर के ऊपरी हिस्से में मेट्रो रेल और नीचले हिस्से में हाईवे का निर्माण किया जाएगा। इस बात का निर्णय हाल ही में HAML के एमडी एन.वी.एस. रेड्डी की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया। बता दें, मैलारदेवपल्ली और न्यू हाईकोर्ट स्पर लाइन की पांच किलोमीटर से अधिक लंबी लाइन में मेट्रो का अलाइनमेंट शुरू में आरामघर में पीवीएनआर एक्सप्रेसवे के बाईं ओर होगा।
यह लाइन नागोले-एलबी नगर-शमशाबाद एयरपोर्ट मेट्रो कॉरिडोर से मैलारदेवपल्ली जंक्शन पर शुरू होती है। फिर इसे पीवीएनआर एक्सप्रेसवे और कृषि विश्वविद्यालय फ्लाईओवर के बीच से दाईं ओर (कृषि विश्वविद्यालय की ओर) ले जाया जाएगा।
बदल सकता है मेट्रो स्टेशनों का स्थान
एलबी नगर-हयातनगर मेट्रो फेज-2 कॉरिडोर का निर्माण GHMC के दो मौजूदा फ्लाईओवरों के बीच एलबी नगर जंक्शन पर मौजूदा मेट्रो वायडक्ट के विस्तार के रूप में किया जाएगा। कॉरिडोर का अलाइनमेंट एलबी नगर जंक्शन से प्रस्तावित चिंतलकुंटा मेट्रो स्टेशन तक सेंट्रल मीडियन में होगा। चिंतलकुंटा से हयातनगर तक, NHAI द्वारा बनाए जा रहे चार नए फ्लाईओवरों के मद्देनजर मेट्रो का अलाइनमेंट बाईं ओर सर्विस रोड में होगा।
किसी भी संभावित टकराव से बचने के लिए निर्माणाधीन फ्लाईओवर और मेट्रो रेल के खंभों, वायडक्ट और स्टेशनों की इंजीनियरिंग ड्राइंग का दोनों प्राधिकरणों द्वारा मिलान किया जाएगा। बताया जाता है कि इस कॉरिडोर में प्रस्तावित छह मेट्रो स्टेशनों में से कुछ के स्थान को थोड़ा सा बदला जा सकता है ताकि एनएच के दोनों ओर से उन तक आसानी से पहुंचा जा सके।



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