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हैदराबाद के गोलकुंडा फोर्ट का नया आकर्षण बना 3D लाइट एंड साउंड शो

हैदराबाद का सैंकड़ों साल पुराने गोलकुंडा फोर्ट (किला) जो एक ऐतिहासिक धरोहर भी है, पर घूमने के लिए हर साल लाखों की संख्या में पर्यटक आते रहते हैं। लेकिन अब यहां आने वाले पर्यटकों को एक नयी चीज देखने को मिलेगी। सैंकड़ों साल पुराने गोलकुंडा किले में अब 3D लाइट एंड साउंड शो की शुरुआत की गयी है। 14वीं शताब्दी में बनाए गये इस किले राज्य की कला और तकनीक का इस्तेमाल कर 3D मैपिंग प्रोजेक्शन की शुरू की गयी है।

3d light and sound show

मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने हैदराबाद के गोलकुंडा किले पर नये लाइट एंड साउंड शो की शुरुआत की है। नये 3D लाइट एंड साउंड शो की शुरुआत 24 जनवरी से की गयी है। केंद्रीय मंत्री ने किले के बाहर लाइट्स का भी उद्घाटन किया। मिली जानकारी के अनुसार 30 मिनट 20 सेकंड लंबा यह 3D लाइट एंड साउंड शो तेलुगु, हिंदी और अंग्रेजी भाषा में होगी।

इस दौरान फोर्ट का बाहरी हिस्सा चटख सफेद रंग की लाइट से जगमगाएगा और एंट्री व बरादरी हॉल में तीरंगा पैटर्न होगा। बताया जाता है कि फोर्ट के बाहरी हिस्से की दीवार का इस्तेमाल इस किले के 800 सालों के इतिहास को बयां करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
बता दें, साल 1993 से अब तक गोलकुंडा फोर्ट में जो साउंड एंड लाइट शो होता आया है, जिसमें फिक्सड लाइट और प्रि-रिकॉर्डेड साउंडट्रैक का ही सिर्फ इस्तेमाल किया जाता था, के स्थान पर अब नया 3D लाइट एंड साउंड शो होगा।

समय : शाम 5 बजे से

hyderabad golconda fort

गोलकुंडा किले का इतिहास

समुद्रतल से लगभग 480 फीट की ऊंचाई डेक्कन पठारी क्षेत्र में गोलकुंडा किले का निर्माण 14वीं शताब्दी में किया गया था। इस किले में कुल 8 दरवाजे हैं। इसमें से मुख्य दरवाजा फतेह दरवाजा है। यह किला सुबह 9 बजे से लेकर शाम को 5.30 बजे तक खुला रहता है। कहा जाता है कि किसी जमाने में इस किले में एक रहस्यमयी सुरंग भी हुआ करती थी, जिसका इस्तेमाल शाही परिवार खतरे के समय महल से बाहर निकलने के लिए करता था। हालांकि वर्तमान समय में खंडहर बन चुके इस किले में अब कोई सुरंग नजर नहीं आती है।

lesar show hyderabad golcodna fort

बताया जाता है कि इस किले का निर्माण सबसे पहले महाराजा वारंगल ने करवाया था। उसके बाद रानी रुद्रमा देवी और उनके पिता प्रतापरुद्र ने किले को मजबूत करवाकर इसका पुनर्निर्माण करवाया था। कहा जाता है कि एक चरवाहे लड़के को पहाड़ी पर एक मूर्ति मिली थी। जब तत्कालिन शासक काकतिया को इसकी सूचना मिली तो उन्होंने इस स्थान को पवित्र मानकर यहां चारों ओर मिट्टी का एक किला बनवा दिया।

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