बेंगलुरु में केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (KIA) से 150 किमी की दूरी पर दूसरा एयरपोर्ट बनाने का शोर अभी थमा भी नहीं था। अब हैदराबाद के राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से लगभग 170 किमी की दूरी पर दूसरे एयरपोर्ट को खोलने का शोर सुनाई देने लगा है। लेकिन जरा रुक जाइए...
हैदराबाद में खुलने वाला दूसरा एयरपोर्ट कोई नया नहीं बल्कि एक ऐसा एयरपोर्ट है जो आजादी से पहले भारत का सबसे बड़ा एयरपोर्ट हुआ करता था लेकिन पिछले कई दशकों से यह पूरी तरह से बंद पड़ा था। अब तेलंगाना सरकार ने एक बार फिर से इस एयरपोर्ट को खोलने का फैसला लिया है।

अगर आप हैदराबाद और उसके आसपास के इलाकों के बारे में थोड़ी-बहुत भी जानकारी रखते हैं, तो आपको पता होगा कि हैदराबाद के इंटरनेशनल एयरपोर्ट से करीब 170 किमी की दूरी पर वारांगल में मौजूद है ममनूर एयरपोर्ट (Mamnoor Airport)। मीडिया रिपोर्ट्स में तेलंगाना सरकार सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि इस साल के अंत तक इस एयरपोर्ट को फिर से शुरू किया जाएगा। Times of India की एक रिपोर्ट के अनुसार यह एयरपोर्ट उन 6 एयरपोर्ट में से पहला होगा, जिन्हें राज्य में शुरू करने की योजना बनायी गयी है।
4 दशकों से बंद पड़ा है एयरपोर्ट
मिली जानकारी के अनुसार 1980 के दशक से ममनूर एयरपोर्ट को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। इसे क्षेत्रीय संपर्क परियोजना (RCS-Udan) के तहत फिर से शुरू किया जा रहा है। बताया जाता है कि यह एयरपोर्ट करीब 94 साल पुराना है, जिसका इस्तेमाल सिर्फ NCC कैडेट के प्रशिक्षण के लिए ही किया जाता है। स्थानीय लोग अक्सर इस एयरपोर्ट की बदहाल स्थिति के लिए सरकार को ही जिम्मेदार ठहराते हैं और इसे जल्द से जल्द फिर से शुरू करने की मांग भी की जाती है।
स्थानीय लोग आज भी यह यकिन नहीं कर पाते हैं कि एक एयरपोर्ट जिससे होकर देश के प्रधानमंत्री-राष्ट्रपति कभी आवाजाही करते थे, इससे होकर देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु ने भी आवाजाही की है, भारत-चीन युद्ध के दौरान जिस एयरपोर्ट का इस्तेमाल बतौर हैंगर किया था, वह आज परित्यक्त पड़ा हुआ है। दावा किया जाता है कि जिस समय इस एयरपोर्ट का निर्माण हुआ था, तब यह दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट था।

सरकार कर रही है भूमि अधिग्रहण
Economic Times की एक रिपोर्ट के मुताबिक एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के पास पहले से ही लगभग 700 एकड़ की भूमि मौजूद है। तेलंगाना सरकार अतिरिक्त 200 एकड़ की भूमि अधिग्रहित करने की तैयारी कर रही है। बताया जाता है कि भूमि अधिग्रहण की वजह से करीब 40 से 50 परिवारों को दूसरी जगहों पर स्थानांतरित करना पड़ेगा, जो काम जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।
बताया जाता है कि इस एयरपोर्ट का निर्माण 7वें निज़ाम मीर उस्मान अली खान ने करवाया था। इस क्षेत्र की आर्थिक उन्नति के लिए और वारांगल में अज़म जाही मिल्स व कागजनगर के अपने कागज उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए इस एयरपोर्ट का निर्माण किया गया था।
दो में से एक रनवे की हालत है काफी खराब
सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस एयरपोर्ट पर एक-एक किमी लंबे दो रनवे हैं, जो 15 सीट वाले किसी विमान के लैंड करने के लिए बिल्कुल आदर्श हैं। लेकिन देखभाल अच्छी तरह से न होने की वजह से इनमें से एक रनवे की स्थिति बुरी तरह से खराब हो गयी है। पूर्व से पश्चिम की ओर जाने वाला रनवे बेहद खराब स्थिति में है। हालांकि एक रनवे, जो उत्तर से दक्षिण की ओर गया है, का इस्तेमाल NCC कैडेट के प्रशिक्षण के लिए किया जाता है, इसलिए उसकी स्थिति बेहतर है।



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