आईआईटी-दिल्ली में जलवायु परिवर्तन और वायु प्रदूषण पर शोध के लिए अरुण दुग्गल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CERCA) द्वारा हाल में किए गए एक अध्ययन में पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता को दुनिया का दूसरा सबसे स्वच्छ शहर बताया गया है। तो फिर पहला कौन है?
इस अध्ययन में पीएम 2.5 सांद्रता की जांच की गई, जो वायु गुणवत्ता का एक प्रमुख संकेतक है। यह अध्ययन दुनिया भर के 11 महानगरों पर किया गया था।

बता दें, PM 2.5 कण फेफड़ों में गहराई तक प्रवेश कर सकते हैं और स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक चेन्नई पहले स्थान पर है। कोलकाता और चेन्नई की हवा में PM 2.5 का स्तर 20 µg/m³ से कम है, जो स्वच्छ वायु गुणवत्ता का संकेत देता है। इससे पता चलता है कि कम सांद्रता स्वास्थ्य के लिए कम खतरे और बेहतर वायु गुणवत्ता का संकेत देती है।
Times Now की एक रिपोर्ट के मुताबिक दूसरी तरफ, कोलकाता से सिर्फ 406 किलोमीटर दूर ढाका विश्व का सबसे प्रदूषित शहर बना है। मिली जानकारी के अनुसार वहां की हवा में PM 2.5 का स्तर 140 µg/m³ के करीब है। सिर्फ ढाका ही नहीं दिल्ली भी प्रदूषण से जूझ रही है, जहां PM 2.5 का स्तर 80 µg/m³ से ज्यादा दर्ज किया गया है।

पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष कल्याण रुद्र ने कोलकाता की बेहतर वायु गुणवत्ता का श्रेय प्रदूषण नियंत्रण उपायों और अनुकूल मौसम स्थितियों को दिया है। इस अध्ययन में भारत के वायु गुणवत्ता प्रयासों के वैश्विक महत्व को रेखांकित किया गया है।
बताया जाता है कि दुनिया की लगभग आधी आबादी खराब वायु गुणवत्ता वाले क्षेत्रों में रहती है। अध्ययन में वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के बीच संबंधों की ओर भी संकेत दिया गया है , जिसमें औद्योगिक उत्सर्जन, वाहन प्रदूषण और कृषि पद्धतियों जैसे साझा स्रोतों का उल्लेख किया गया है।
अध्ययन में वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए एकजुट प्रयासों का आह्वान किया गया है। बताया जाता है कि इन मुद्दों पर ध्यान देने से भारत को वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।



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