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अब आप भी कर सकेंगे चांद-सितारों की दुनिया की सैर, इस राज्य में बन रहा देश का पहला Night Sky Sanctuary पार्क

सभी ने अपने बचपन में चांद-सितारों की कहानियां सुनी होंगी। घर के बुजुर्ग- दादा-दादी, नाना-नानी से जब हम कहानियां सुनते थें तो लगता था आखिर कब वो दिन आएगा, जब हम भी उन चांद-तारों की सैर करेंगे। कहानियों में अक्सर हमें बताया जाता था कि हमारे पूर्वज पृथ्वी से बैठकर चांद-तारों को काफी देर निहारा करते थें, जो उन्हें काफी साफ-साफ दिखाई देता था। लेकिन वर्तमान भारत के आधुनिकीकरण ने इतना प्रदूषण फैला दिया है कि अब कुछ साफ दिखता ही नहीं है।

ऐसे में अगर आपको कहा जाए कि भारत में ही आप नाइट स्काई सेंचुरी का आनंद ले सकते हैं तो आप क्या कहेंगे? मुझे मालूम है कि आप कहेंगे कि हम आपके मजाक कर रहे हैं लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। अब अपना भारत देश काफी बदल चुका है। अब आप भी चांद-सितारों से बातें कर सकेंगे। दरअसल, लद्दाख में देश का पहला नाइट स्काई सेंचुरी खुलने जा रहा है, जहां जाकर आप चांद-सितारों को करीब से निहार सकते हैं।

अब धरती से होगी चांद-सितारों की सैर

अब धरती से होगी चांद-सितारों की सैर

इस सेंचुरी के साथ भारत खगोलीय पर्यटन के क्षेत्र में नया इतिहास लिखने को तैयार है। इसके बन जाने से अब पर्यटक आसमान की भी सैर कर सकेंगे, जिसकी कल्पना वे बचपन से ही करते आए हैं। दरअसल, लद्दाख में चांगथांग स्थित हनले में नाइट स्काई सेंचुरी तैयार की जा रही है, जहां पर दुनिया भर के खगोलशास्त्री चांद-सितारों की दुनिया का बारीकी से अध्ययन कर सकेंगे।

क्या होगी खासियत

क्या होगी खासियत

15 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित ये क्षेत्र पहले से ही आप्टिकल, इंफ्रारेड और गामा रे टेलीस्कोप के लिए दुनिया का सबसे ऊंचा क्षेत्र है। यानी कि यहां पहले से ही एक खगोल वैधशाला है, यहां दुनिया भर के वैज्ञानिक खगोलीय घटनाओं पर नजर रखने के लिए आते हैं और यहां घनी काली रात में दिखाई देने वाले तारामंडल का अध्ययन करते हैं। यही कारण है कि नाइट स्काई सेंचुरी के लिए हनले को ही चुना गया है। यहां से पूरे सालभर आसमान काफी साफतौर पर दिखाई देता है, जो दुनिया के किसी और कोने से नहीं दिखाई देता। यहां नाइट स्काई सेंचुरी की स्थापना करने के लिए भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान के साथ लद्दाख प्रशासन, लेह स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद और भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान ने आपस में समझौता पत्र पर हस्ताक्षर भी कर लिया है।

400 साल पहले यहां था हनले मठ

400 साल पहले यहां था हनले मठ

17वीं यानी करीब 400 साल पहले यहां पर हनले मठ था। यहां पर भारत ने पहले से ही गामा किरण दूरबीन और हिमालय चंद्र टेलीस्कोप की स्थापना कर रखा है। यही मुख्य कारण है कि नाइट स्काई सेंचुरी के लिए इस स्थान को सबसे उपयुक्त समझा गया। इसके लिए पीएमओ में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने हामी भरते हुए सेंचुरी को स्थापित करने की गति को काफी तेज कर दिया है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस प्रोजेक्ट में काफी रूचि दिखा रहे हैं। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि जल्द से जल्द ही देश को उसका पहला नाइट स्काई सेंचुरी मिलने वाला है।

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