मध्य प्रदेश का शहर इंदौर देश का सबसे साफ-सुथरा शहर है। अब इंदौर समेत पूरे मध्य प्रदेश को भिखारी मुक्त बनाने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं। हाल ही में इंदौर के जिलाधिकारी आशिष सिंह ने एक आदेश जारी किया है, जिसमें भिखारियों को भीख देने वालों को सचेत किया गया है। साथ ही यह भी चेतावनी दी गयी है कि अगर कोई व्यक्ति भिखारी को भीख देता हुआ पकड़ा जाता है, तो...
उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। ऐसा करने वाला इंदौर देश का पहला शहर बन गया है। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो यह नियम सिर्फ इंदौर ही नहीं बल्कि जल्द ही देश के 10 शहरों में लागू होने वाली है। इंदौर में कब से लागू होगा यह नियम और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कौन सी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है?

कब से लागू होगा नया नियम?
इंदौर व पूरे मध्य प्रदेश को भिक्षावृत्ति मुक्त शहर बनाने की दिशा में उठाया गया यह एक महत्वपूर्ण कदम है। माना जा रहा है कि इससे भारतीय शहरों की छवि सुधरेगी। सोमवार को मीडिया को संबोधित करते हुए इंदौर के जिलाधिकारी आशिष सिंह ने बताया कि 1 जनवरी 2025 से इस नए नियम को लागू कर दिया जाएगा।
अगर कोई व्यक्ति किसी भिखारी को भीख देता हुआ पकड़ा जाता है, तो उसके खिलाफ FIR दर्ज होगी। सिंह ने कहा कि पूरे दिसंबर के महीने के दौरान शहर भर में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा जाएगा। उन्होंने इंदौरवासियों से अनुरोध किया कि भिखारियों को भीख देकर पाप का भागीदार न बनें।
क्यों लिया गया यह फैसला?
बताया जाता है कि प्रशासन ने पिछले महीने ही विभिन्न आपराधिक समूहों को पकड़ा था, जो लोगों से जबरदस्ती भीख मंगवाने का काम करते हैं। उन लोगों के पुनर्वास का काम भी किया जा रहा है और भिक्षा मांगने वालों को बेहतर जिंदगी देने की । बता दें, भिक्षावृत्ति मुक्त शहर बनाने की यह योजना केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की एक परियोजना है जिसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है। इस परियोजना में 10 शहरों को शामिल किया गया है जिन्हें भिक्षावृत्ति मुक्त बनाया जाएगा।

इन 10 शहरों के नाम निम्न हैं -
- दिल्ली
- बेंगलुरु
- चेन्नई
- हैदराबाद
- इंदौर
- लखनऊ
- मुंबई
- नागपुर
- पटना
- अहमदाबाद
मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार इंदौर को भिक्षावृत्ति मुक्त शहर बनाने के लिए 7 विभागों को मिलाकर दल बनाया गया है। इन सभी दलों को शहर भर के अलग-अलग इलाकों में भेजकर निगरानी करने और जरूरी होने पर कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिये गये हैं। मिली जानकारी के अनुसार अब तक 300 से अधिक बुजुर्ग, वयस्क भिक्षुओं को रेस्क्यू कर उज्जैन के सेवाधाम आश्रम भेजा जा चुका है। इसके अलावा 34 बाल भिक्षुओं को भी रेस्क्यू किया जा चुका है।



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