उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के केदारखंड पर्वतश्रृंखला पर मौजूद महादेव के द्वादश ज्योतिर्लिंग में से प्रमुख केदारनाथ धाम तक की यात्रा अब पहले के मुकाबले और भी ज्यादा आसान बनाने की कोशिशें लगातार की जा रही हैं। इसी क्रम में केंद्र सरकार ने केदारनाथ धाम तक के लिए रोपवे (Ropeway) बनाने को मंजूरी दे दी है।
सिर्फ केदारनाथ धाम ही नहीं बल्कि केदारखंड पर्वत श्रृंखला पर ही मौजूद सिख धर्म के सबसे ऊंचे गुरुद्वारा हेमकुंड साहेब तक के लिए भी रोपवे परियोजना को मंजूरी दे दी गयी है। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस रोपवे परियोजना को मंजूरी दी गयी है।

चलिए इस रोपवे परियोजना के बारे में आपको विस्तार से सभी जानकारियां देते हैं -
Times of India की मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार केदारनाथ धाम तक रोपवे करीब 12.9 किमी लंबा होगा। मीडिया से बात करते हुए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस रोपवे परियोजना को पूरा करने की लागत करीब ₹4,081 करोड़ होने वाली है। वहीं लगभग ₹2730 करोड़ की लागत से हेमकुंड साहेब रोपवे परियोजना का निर्माण किया जाएगा।
इस परियोजना को PPP (पब्लिक-प्राइवेट-पार्टनरशिप) मॉडल के तहत बनाया जाएगा। इसमें एडवांस्ड ट्राई केबर गंडोला लगाए जाएंगे, जो 3S तकनीक से लैस होंगे। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो यह परियोजना केदारनाथ धाम तक पहुंचने में तीर्थ यात्रियों का समय काफी ज्यादा घटा देगा। इसके साथ ही तीर्थ यात्रियों का सफर भी पहले की तुलना में काफी ज्यादा आसान बनने वाली है।
क्या होगा रूट और कितना लगेगा समय?
केदारनाथ धाम में जिस रोपवे परियोजना को मंजूरी दी गयी है, वह सोनप्रयाग से केदारनाथ धाम तक बनायी जाएगी। वर्तमान समय में गौरीकुंड से केदारनाथ धाम तक के लिए तीर्थ यात्री चढ़ाई शुरू करते हैं, जिसमें लगभग 8 से 9 घंटे का समय लग जाता है।

तीर्थ यात्री पैदल, घोड़े, खच्चर, पालकी-पिट्ठू या हेलीकॉप्टर से केदारनाथ धाम तक पहुंचते हैं। लेकिन दावा किया जा रहा है कि रोपवे परियोजना के पूरा होने के बाद तीर्थ यात्रियों को इस चढ़ाई को पूरा करने में महज 36 मिनट का समय लगेगा। जो पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा तेज, आरामदायक और पर्यावरणमित्र साधन होगा।
बताया जाता है कि इस रोपवे परियोजना को प्रति घंटे 1800 यात्रियों को लेकर गंतव्य तक पहुंचाने के लिए डिजाइन किया जा रहा है। वहीं हर रोज इससे होकर 18000 यात्री आवाजाही कर सकेंगे। यह परियोजना न सिर्फ तीर्थ यात्रियों के लिए सुविधाजनक होने वाली है, बल्कि दावा किया जा रहा है कि इस परियोजना की वजह से रोपवे के निर्माण के दौरान और जब परिचालन शुरू हो जाएगा, तब भी बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। यह रोपवे परियोजना पर्यटन को भी बढ़ावा देगा।
हालांकि इस रोपवे परियोजना की शुरुआत कब होगी या इसे कब तक पूरा करने का लक्ष्य बनाया गया है, इस बाबत अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।



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