पूरी स्पीड से दौड़ रही है मेट्रो लेकिन इंजन में ड्राइवर (Moterman) के केबिन में कोई नहीं। जी नहीं, हम यहां किसी भूतिया फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं बता रहे हैं। बल्कि कोलकाता मेट्रो के बारे में बता रहे हैं जिसमें हाल में ऑटोमेटिक ट्रेन ऑपरेशन (ATO) का सफलतापूर्वक ट्रायल रन पूरा किया गया है।

कोलकाता मेट्रो के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर में सियालदह स्टेशन से सॉल्टलेक सेक्टर 5 के बीच में यह ट्रायल रन पूरा किया गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ट्रायल रन का 2 राउंड संपन्न किया गया है।
कोलकाता मेट्रो के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर में है कम्यूनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल सिस्टम (CBCT)। जिसमें ऑटोमेटिर ट्रेन प्रोटेक्शन, ऑटोमेटिक ट्रेन ऑपरेशन और ऑटोमेटिक ट्रेन सुपरवीजन की सुविधा। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पिछली रविवार को सर्वाधिक 78 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से यह ट्रायल रन किया गया था। मेट्रो प्रबंधन की तरफ से बताया गया कि ट्रायल रन के दौरान ऑटोमेटिक ब्रेक, मोटरिंग व निर्धारित रफ्तार से पटरियों पर दौड़ रही ट्रेन को रोकना जैसी चीजों का निरीक्षण किया गया।
इसके अलावा स्टेशन पर प्लेटफार्म वाला दरवाजा खुल रहा है या नहीं, प्लेटफार्म का स्क्रीन डोर ठीक से काम कर रहा है या नहीं जैसी विषयों की भी जांच की गयी। मेट्रो रेल के उच्चाधिकारियों ने इस ट्रायल रन को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए सभी अधिकारियों को बधाई दी है।
हालांकि मेट्रो रेलवे ने स्पष्ट किया है कि ट्रायल रन के दौरान भले ही मेट्रो ट्रेन पटरियों पर ऑटोमेटिक पद्धति से दौड़ रही थी लेकिन किसी भी प्रकार की आपातकालिन परिस्थिति से निपटने के लिए पूरे समय मेट्रो के केबिन में मोटरमैन उपस्थित थे। इसके साथ ही कोलकाता मेट्रो की तरफ से बताया गया है कि ऑटोमेटिक सिस्टम के तहत मेट्रो सेवाओं को अगर शुरू किया जाता है कि तो आर्थिक रूप से इसका फायदा मेट्रो रेलवे को जरूर पहुंचेगी।
लेकिन मेट्रो के केबिन में पूरे समय मोटरमैन जरूर उपस्थित रहेंगे। हालांकि ट्रेन के संचालन में उनका कोई हाथ नहीं होगा लेकिन यात्रियों को मानसिक रूप से ऑटोमेटिक सिस्टम वाली मेट्रो के लिए तैयार करने के लिए ही मेट्रो में ड्राइवर को रखने का फैसला लिया गया है।



Click it and Unblock the Notifications














