मैंगलोर और लक्षद्वीप के बीच की दूरी हाई स्पीड फेरी सर्विस के शुरू हो जाने के बाद पहले से कहीं ज्यादा घट गयी है। नयी हाई स्पीड बोट 'पराली' (Parali) से मैंगलोर और लक्षद्वीप के बीच शुरू हुई फेरी सेवा ने दोनों जगहों के बीच की दूरी को एक ही झटके में करीब 5 घंटे घटा दिया है।
हाल ही में मैंगलोर के पुराने बंदरगाह और लक्षद्वीप द्वीपसमूह के बीच नयी फेरी सेवा की शुरुआत की गयी है। पहले जहां मैंगलोर से लक्षद्वीप पहुंचने में लगभग 13 घंटों का समय लग जाता था, वहीं हाई स्पीड नयी फेरी सेवा के शुरू होने से इस दूरी को तय करने में केवल 5 घंटे का समय लगेगा।

3 मई से इस फेरी सेवा की शुरुआत कर दी गयी है। हाई स्पीड बोट से एक बार में 160 यात्री मैंगलोर से लक्षद्वीप तक का सफर तय कर सकेंगे। हालांकि शुरुआती दौर में इसे प्रयोगात्मक रूप से शुरू किया गया था लेकिन यात्रियों की तरफ से इस नयी सेवा पर सकरात्मक फिडबैक ही मिला है। केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय द्वारा गठित की गयी लक्षद्वीप आईलैंड टूरिज्म डेवलपमेंट अथॉरिटी (LITDA) ने मैंगलोर-लक्षद्वीप के बीच कई ट्रायल रन के बाद पर्यटकों के लिए हाई स्पीड फेरी सेवा को जारी रखने की जिम्मेदारी उठायी है।
हालांकि मानसून के समय जब समुद्री लहरें अनियंत्रित होती है और काफी ऊंची उठती है, उस समय क्या किया जाएगा इस बारे में अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है। मानसून के समय फेरी सेवा में कोई बाधा न आए, इसे सुनिश्चित करने के लिए LITDA ने मुख्य भूमि के सबसे नजदीकी बंदरगाह, कदमत में सुविधाओं को बेहतर किया है।

कितना होगा किराया
मैंगलोर से लक्षद्वीप हाई स्पीड फेरी सर्विस के माध्यम से पर्यटक अपना सफर 14 घंटे से काफी कम समय में ही पूरा कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें प्रति यात्री करीब ₹5000 का किराया चुकाना पड़ेगा। इसके अलावा यात्रियों के लिए इस सफर को और रोमांचक और शानदार बनाने के लिए स्पेशल वीकेंड पैकेज भी बनाएं जाएंगे।
बता दें, कर्नाटक और लक्षद्वीप के बीच वर्ष 1783 में एक समझौता हुआ था। जिसके बाद साल 2010 में लक्षद्वीप के कदमत आईलैंड तक पहली यात्रीवाही जहाज 'एम.वी. एमीनीदेवी' ने 150 यात्रियों के साथ अपना सफर पूरा किया था। इस जहाज सेवा के शुरू होने के बाद खासतौर पर बैंगलोर, मैसूर, पणजी और मुंबई से लक्षद्वीप तक आना-जाना काफी आसान बन गया था।

गौरतलब है कि इस साल के शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्षद्वीप सफर और यहां पर्यटन को बढ़ावा देने के अनुरोध के बाद लक्षद्वीप प्रशासन ने भी कोची और मैंगलोर से लक्षद्वीप की मुख्य भूमि के संपर्क को और भी मजबूती प्रदान करने की पहल शुरू कर दी थी। लक्षद्वीप भारत का सबसे कम एक्सप्लोर किया हुआ द्वीप समूह है, जिसमें कुल 36 द्वीप शामिल हैं।
एडवेंचर, नेचर या फिर छुट्टियों में जो लोग सिर्फ मस्ती-मजाक और रिलैक्स रहना पसंद करते हैं, उनके लिए यह किसी जन्नत से कम नहीं है। चुंकि यहां पर्यटकों की ज्यादा भीड़ नहीं होती है, इसलिए समुद्र का साफ पानी, समुद्र की तली से झांकते कोरल रिफ और कई तरह के समुद्री जीवों को यहां आसानी से देखा जा सकता है।



Click it and Unblock the Notifications














