Search
  • Follow NativePlanet
Share
» »टीटवाल में बन रहा मां शारदा का भव्य मंदिर, श्रृंगेरी मठ ने भेंट की देवी की 200 किलो वजनी मूर्ति

टीटवाल में बन रहा मां शारदा का भव्य मंदिर, श्रृंगेरी मठ ने भेंट की देवी की 200 किलो वजनी मूर्ति

कश्मीर के नियंत्रण रेखा के पास बसे टीटवाल (कुपवाड़ा) गांव में मां शारदा का भव्य मंदिर बनाया जा रहा है। इस मंदिर के लिए चिकमंगलूर के श्रृंगेरी मठ ने मां शारदा की 200 किलो वजनी पंचलोहे (पंचधातु) की मूर्ति भेंट की है।

इन दिनों देश के सभी मंदिरों का कायाकल्प बदलने का दौर चल रहा है। ऐसे में कश्मीर के नियंत्रण रेखा के पास बसे टीटवाल (कुपवाड़ा) गांव में मां शारदा का भव्य मंदिर बनाया जा रहा है। इस निर्माणाधीन मंदिर में चिकमंगलूर के श्रृंगेरी मठ ने मां शारदा की 200 किलो वजनी पंचलोहे (पंचधातु) की मूर्ति भेंट की है। यह मूर्ति अगले साल के शुरुआत में टीटवाल ले जाई जाएगी और विधिवत पूजा-अर्चना के बाद इसकी स्थापना की जाएगी।

चैत्र नवरात्रि में होगा मंदिर का उद्घाटन

इस मंदिर का निर्माण 'सेव शारदा समिति कश्मीर' की ओर से की जा रही है, जिसके प्रधान रविंद्र पंडिता है। जब हमारी बात रविद्र से हुई तो उन्होंने बताया कि मंदिर के निर्माण में श्रृंगेरी मठ ने अपना पूरा सहयोग दिया है। मंदिर का निर्माण इसी साल 26 मार्च में शुरू किया गया था, जो अगले साल चैत्र नवरात्रि तक पूरी तरीके से तैयार हो जाएगा और भक्तों के माता का दरबार भी खोल दिया जाएगा। वहीं, मंदिर के लिए भूमि पूजन 02 दिसम्बर 2021 को किया गया था। फिलहाल, मंदिर में करीब दो महीने का काम बचा है, लेकिन नवम्बर-दिसम्बर में यहां बर्फबारी होने लगती है, जिसके चलते उद्घाटन मार्च 2023 के आसपास के तिथि रखी गई है।

मंदिर के साथ-साथ गुरुद्वारा भी

मंदिर के साथ-साथ गुरुद्वारा भी

आजादी के पूर्व किशनगंगा (नीलम) नदी के किनारे पर स्थित टीटवाल से ही शारदा पीठ की यात्रा शुरू होती थी। उन्होंने बताया कि जब माता शारदा पीठ का निर्माण कार्य शुरू हुआ था, तब पीठ से शिलाएं और मिट्टी लाई गई थी जिनकी पूजा श्रृंगेरी पीठ में ही की गई थी। रविंद्र पंडिता ने बताया कि आजादी के पूर्व यहां पर एक धर्मशाला और गुरुद्वारा भी हुआ करता था, जिसे उपद्रवियों के द्वारा जलाकर नष्ट कर दिया गया था। वर्तमान समय में शारदा पीठ पाक अधिकृत कश्मीर में है और काफी क्षतिग्रस्त हो गया है। मंदिर निर्माण के लिए यहां के स्थानीय लोगों ने अपनी जमीन दी और पीठ निर्माण के लिए आग्रह किया। रविंद्र ने बताया कि यहां पर मंदिर के साथ-साथ गुरुद्वारे का भी निर्माण किया जा रहा है। इसका भी काम लगभग पूरा हो चुका है।

हिंदुओं के लिए आस्था का केंद्र है शारदा पीठ

हिंदुओं के लिए आस्था का केंद्र है शारदा पीठ

शारदा पीठ न सिर्फ कश्‍मीरी हिंदुओं के लिए आस्था है बल्कि ये पूरे सनातनियों के लिए भक्ति का एक भव्य स्वरूप भी है। रविंद्र का कहना है कि जिस प्रकार मुस्लिम समुदाय के लिए मक्का है, उसी प्रकार से सनातनियों के लिए शारदा पीठ है, जो ज्ञान की देवी कहलाती हैं। वर्तमान में मौजूद मंदिर का निर्माण सम्राट ललितादित्य के समय में की गई थी। इस स्थान पर 12वीं सदी के दौरान एक बड़ा शिक्षा का केंद्र भी हुआ करता था, जहां लगभग भारतवर्ष के छात्र शिक्षा ग्रहण किया करते थे। आज भी दक्षिण के सारस्वत ब्राह्मणों में शिक्षा आंरभ करने से पूर्व कश्मीर की ओर सात कदम चलने की परंपरा है। इसका मुख्य कारण है कश्मीर में स्थित मां शारदा पीठ।

नदी के किनारे से दर्शन

नदी के किनारे से दर्शन

वर्तमान समय किशनगंगा नदी के किनारे पर खड़े होकर उस पार पाक अधिकृत कश्मीर में मां शारदा के दर्शन किए जाते हैं। कई सालों से भारत सरकार की ओर से पाकिस्तान सरकार से मां शारदा की यात्रा बहाल करने की बात होती है। कश्मीर की जाने मानी नेता महबूबा मुफ्ती सहित कई दिग्गज नेता करतारपुर कारिडोर की तर्ज पर शारदापीठ कारिडोर बनाने की मांग भी सदन में उठाते रहे हैं।

शारदा पीठ का मुख्य आकर्षण

शारदा पीठ का मुख्य आकर्षण

नए वास्तुकला से बन रही भव्य शारदा पीठ में चार द्वार बनाए जा रहे हैं, जो चार मठों में दर्शाता है। परिसर के बीचों-बीच मां शारदा की मूर्ति स्थापित की जाएगी। मंदिर निर्माण में इस्तेमाल किए जाने वाले पत्थर बैंगलोर के मागड़ी क्षेत्र से मंगलवाए गए हैं। इसमें श्रृंगेरी मठ की ओर से सहायता के रूप में पत्थर और माता की मूर्ति दी गई है, बाकी सारा काम संस्था की ओर से की जा रही है।

1.5 करोड़ की लागत से मंदिर का निर्माण

1.5 करोड़ की लागत से मंदिर का निर्माण

रविंद्र ने बताया कि मंदिर निर्माण करीब 1.5 करोड़ रुपये के आसपास का खर्च आ रहा है, जो आम लोगों की मदद और सेव शारदा समिति कश्मीर की सहायता से की जा रही है। लेकिन सरकार की ओर से मंदिर निर्माण में किसी प्रकार की कोई सहायता राशि नहीं मिली है। 500 गज में बन रहे इस मंदिर तक पहुंचने के लिए 4 मार्ग है। सबसे पहले श्रीनगर से कुपवाड़ा (2 घंटे) जाना पड़ेगा, फिर टीटवाल (4 घंटे) जाने आर्मी परमिशन की जरूरत पड़ती है, जिसके लिए आवेदन करना पड़ता है। संस्था की ओर से मंदिर के पास में 'होम स्टेस' भी बनाए जा रहे हैं, अगर किसी को वहां ठहरना हो तो आराम रूक भी सकता है।

More News

    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+