महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार ने मंगलवार (7 जनवरी) को FASTag को लेकर एक बड़ा और अहम फैसला लिया है, जो सीधे-सीधे उन लोगों को प्रभावित करेगा जो महाराष्ट्र में अपनी गाड़ी चलाते हैं। नेशनल हाईवे के बाद अब मंत्रिमंडल ने मंगलवार को निर्णय लिया है कि महाराष्ट्र के सभी राज्य राजमार्गों पर FASTag का उपयोग करना अनिवार्य है।
यह परिवर्तन राज्य के परिवहन विभाग द्वारा राज्य हाईवे पर टोल प्रणाली में बदलाव का प्रस्ताव देने का बाद लिया गया है। मीडिया रिपोर्ट में किये गये दावे के अनुसार इस फैसले से ट्रैफिक जाम से बचने के साथ-साथ ईंधन और समय की भी बचत होगी।

कब से लागू होगा फैसला?
मिली जानकारी के अनुसार मुंबई में प्रवेश करने के 5 बिंदुओं पर कार व एसयूवी के लिए टोल शुल्क माफ करने का राज्य सरकार द्वारा पिछले साल लिया गया फैसला 1 अप्रैल 2025 को समाप्त हो जाएगा। इसके बाद से ही सभी राज्य राजमार्गों पर भी FASTag को अनिवार्य करने का फैसला लागू हो जाएगा।
बता दें, पिछले साल अक्तूबर में महाराष्ट्र सरकार ने दहिसर, एलबीएस रोड-मुलुंद, ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे - मुलुंद, ऐरोली क्रीक ब्रिज और वाशी में प्रवेश द्वारों पर निजी वाहनों को टोल टैक्स में छूट देने का फैसला लिया था।
बता दें, अमर उजाला की मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र में कुल 22 राज्य राजमार्ग हैं, जिन्हें लोक निर्माण विभाग और राज्य सड़क विकास निगम द्वारा विकसित किया गया है। इन सभी 22 राजमार्गों पर टोल प्लाजा राज्य सरकार द्वारा चलाए जाते हैं। इस बारे में महाराष्ट्र परिवहन विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि जिन वाहनों पर FASTag नहीं होगा, उन वाहनों के मालिकों को नकद माध्यम से दोगुना टोल टैक्स का भुगतान करना होगा।
राज्य राजमार्गों पर FASTag टोल प्रणाी को अनिवार्य बनाने का उद्देश्य राज्य के सभी टोल प्लाजा पर ट्रैफिक जाम को कम करने और भुगतान प्रक्रिया को कैशलेस करने के साथ-साथ पारदर्शी बनाना भी है।



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