महाराष्ट्र में घूमने, देखने, एडवेंचर के शौकीन और इतिहास में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए काफी जगहें हैं, जहां हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक घूमने के लिए आते भी हैं। अब इन सभी जगहों पर आप रोपवे (Ropeways) का लुत्फ उठा सकेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार नेशनल हाईवेज लॉजीस्टिक मैनेजमेंट लिमिटेड (NHLML) ने महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों में फैले लगभग 45 ऐसी जगहों का चुनाव किया है, जहां रोपवे की सुविधा को शुरू किया जाएगा।
बताया जाता है कि इस परियोजना की शुरुआत न सिर्फ इन जगहों पर पर्यटन को बढ़ावा देने बल्कि बच्चों, बुजूर्गों व दिव्यांगों को ऊंचाई वाली जगहों तक पहुंचने और यहां की प्राकृतिक सुन्दरता का आनंद उठाने का मौका प्रदान करने के लिए ही किया है।

इस बारे में Times of India की मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार राज्य सरकार ने NHLML के साथ मिलकर इस रोपवे परियोजना को पूरा करने की घोषणा की है, जो नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) का ही एक भाग है। बताया जाता है कि प्रमुख पर्यटन स्थलों पर रोपवे परियोजना को बनाने के लिए विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) बनाने से लेकर टेंडर आमंत्रित करना और फिर निर्माण कार्य शुरू करना आदि प्रक्रियाओं से होकर गुजरने के बाद ही यह परियोजना को पूरा किया जाएगा।
जिन पर्यटन स्थलों को रोपवे बनाने के लिए चुना गया है, उनमें ऐतिहासिक महत्व वाली जगहों के साथ-साथ किले, हिल स्टेशन आदि शामिल हैं।
Ropeways बनाने के लिए जिन पर्यटन स्थलों का चुनाव किया है -
- एलीफेंटा की गुफाएं
- माथेरान हिल स्टेशन
- रायगढ़ किला
- अलीबाग फोर्ट
- कुनकेश्वर
- सिंहगढ़ किला
- महाबलेश्वर
- प्रतापगढ़ किला
- खेड का खंडोबा निमगांव
- जेजुरी
- सज्जनगढ़
- कांस घाटी
- अजिंक्यात्रा किला
- थोसेघर झरना
- उत्तरेश्वर मंदिर (महाबलेश्वर)
- रेणुका मंदिर (नांदेड)

दावा किया जा रहा है कि इन जगहों पर रोपवे की सुविधा शुरू होने से स्थानीय लोगों के साथ पर्यटक भी बड़ी संख्या में आकर्षित होंगे। खासतौर पर वैसे पर्यटक जो इन जगहों की प्राकृतिक सुन्दरता का आनंद तो उठाना चाहते हैं लेकिन चढ़ाई अधिक होने की वजह से किसी कारणवश यहां तक नहीं आ पाते हैं। इस परियोजना की वजह से महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों तक पर्यटकों की पहुंच बढ़ेगी और साथ में मिलेगा शानदार एरियल व्यू।
बताया जाता है कि जिस ठेकेदार को इन रोपवे परियोजनाओं को तैयार करने का काम काम सौंपा जाएगा, उन्हें 30 सालों के लिए लीज पर जमीन उपलब्ध करवाएगी। इस परियोजना पर होने वाला खर्च राज्य सरकार और PWD समान रूप से बांट कर करेगी।



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