मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना का काम बड़ी तेजी से चल रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी समय-समय पर बुलेट ट्रेन से संबंधित अपडेट देते रहते हैं। हाल ही में लोकसभा में पूछे गये एक सवाल का जवाब देते हुए रेलमंत्री ने एक बार फिर से मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना से संबंधिक कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं।
मीडिया रिपोर्ट में रेलमंत्री के हवाले से दिये गये बयान में बताया गया है कि बुलेट ट्रेन परियोजना का निर्माण तेज गति से हो रहा है। उन्होंने कहा कि बुलेट ट्रेन के लिए 300 किमी का एलिवेटेड कॉरिडोर बन पाना एक अच्छी उपलब्धि के तौर पर ही गिनी जाएगी। बता दें, बुलेट ट्रेन गुजरात से केंद्र शासित प्रदेश दादर व नागर हवेली होते हुए महाराष्ट्र तक जाएगी।

रेल मंत्री ने बताया कि बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 508 किमी की है। इस परियोजना के लिए पूरी जमीन यानी 1389.5 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित हो चुकी है। पूरी परियोजना के लिए स्वीकृत लागत लगभग 1 लाख 8 हजार करोड़ रुपए हैं। 508 किमी की दूरी में कुल 12 स्टेशन बनाएं जाएंगे। वहीं बुलेट ट्रेन समुद्र के अंदर लगभग 21 किमी का रास्ता तय करेगी। इसके लिए समुद्र के अंदर सुरंग बनाने का काम भी शुरू हो चुका है।
दो श्रेणी के होंगे कोच

एक अहम जानकारी के तहत रेल मंत्री ने बताया कि बुलेट ट्रेन में दो श्रेणी के कोच होंगे। उन्होंने बताया कि पहली श्रेणी में जनरल चेयरकार होंगे और दूसरी श्रेणी में एग्जीक्यूटिव कोच होंगे। हालांकि रेल मंत्री ने अभी तक बुलेट ट्रेन के किराए के संबंध कोई भी खुलासा नहीं किया है। उन्होंने कहा कि साल 1995 से 2012 तक दिल्ली मेट्रो के निदेशक रहे ई. श्रीधरन की बात को ध्यान में रखते हुए ही बुलेट ट्रेन में दो श्रेणी बनाए गये हैं। पहला सामान्य और दूसरा विशिष्ट वर्ग के लिए।
उन्होंने बताया कि समुद्र के अंदर 50 मीटर की गहराई में सुरंग और स्टेशन बनाने का काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि बुलेट ट्रेन भले ही जापान के सहयोग से बनाया जा रहा है लेकिन इसका डिजाइन भारत के भौगोलिक स्थिति के आधार पर तैयार किया जाएगा। कई देशों को तो बुलेट ट्रेन का सिर्फ डिजाइन बनाने में ही 20 सालों का समय लग गया था। लेकिन कोविड काल के बाद हमारे देश में 320 पिलर का बन जाना एक बड़ी उपलब्धि है।



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