हाल ही में मुंबई की बृहन्मुंबई म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) ने एक स्वयंसेवी संस्थान नगर (NAGAR) और रानीबाग बचाओ फाउंडेशन के साथ मिलकर एक मोबाइल ऐप लॉन्च किया है। अब आप सोच रहे होंगे कि आम नागरिकों की सुविधा के लिए BMC तो आए दिन कोई न कोई मोबाइल ऐप लॉन्च करती ही रहती है। फिर इस ऐप में ऐसा क्या खास है...अरे खास है जनाब।
दरअसल, यह मोबाइल ऐप BMC की किसी सेवा के लिए नहीं बल्कि मुंबई के बायकुला चिड़ियाघर का ऐप है। इसे कोई मोबाइल ऐप न कहकर अगर डिजिटल डायरेक्ट्री (Digital Directory) कहा जाए, तो गलत नहीं होगा।

किस काम आएगा मोबाइल ऐप?
BMC ने जिस मोबाइल ऐप को लॉन्च किया है, उसे बायकुला चिड़ियाघर में आने वाले लोगों को ध्यान में रखते हुए ही डिजाइन किया गया है। इस मोबाइल ऐप पर बायकुला चिड़ियाघर और रानीबाग इलाके के बारे में विस्तृत जानकारियां मुहैया करवायी गयी है।
इस मोबाइल ऐप पर अलग-अलग श्रेणियां बांटी गयी हैं, जिसमें जानवरों के पिंजड़े, हेरिटेज स्मारक, सुविधाएं, जैव विविधता और थीम गार्डन आदि के बारे में जानकारी दी जाएगी। एंड्रॉएड और iOS दोनों प्लेटफार्म पर ही यह मोबाइल ऐप उपलब्ध है। इस ऐप का नाम 'मुंबई बोटानिकल गार्डन एंड जू' रखा गया है।
गौरतलब है कि मुंबई का रानीबाग एकलौता हेरिटेज गार्डन है, जहां कई तरह की संचरनाएं जैसे प्यास (पेयजल फव्वारा), बैंडस्टैंड, सूर्य घड़ी और फ्रेरे मंदिर आदि मौजूद है।
जब भी किसी व्यक्ति को इन सारी धरोहरों के बारे में जानना होगा, तब वे मोबाइल ऐप के हेरिटेज वाले हिस्से में जा सकेंगे। यहां उन्हें सभी धरोहरों की लिस्ट दिखाई जाएगी। जिस भी धरोहर के बारे में उन्हें जानना होगा, उसपर क्लीक करते ही धरोहरों के निर्माण, उनके आकार, महत्व और इतिहास आदि से जुड़ी सारी जानकारियां मोबाइल स्क्रीन पर आ जाएंगी।

हजारों पेड़-पौधों और सुक्ष्मजीवों की जानकारियों की भरमार
इस मोबाइल ऐप का सबसे अच्छी विशेषता है कि यहां सिर्फ धरोहरों व स्मारकों के बारे में ही नहीं बल्कि सैंकड़ों पेड़-पौधों और सुक्ष्मजीवों के बारे में जानकारियां मौजूद हैं, जो इस गार्डन में पाए जाते हैं। स्मारक की तरह ही अगर कोई व्यक्ति किसी भी एक खास किस्म के पौधे के नाम पर क्लीक करता है, तो मोबाइल के स्कीन पर उस पौधे के इतिहास से लेकर बनावट आदि के बारे में सारी जानकारियां आ जाएंगी।
पिछले दिनों ही इस ऐप का उद्घाटन बायकुला चिड़ियाघर के निदेशक डॉ. संजय त्रिपाठी ने किया। इस मौके पर रिटायर्ड आईएएस अधिकारी डीएम सुखतंकर भी मौजूद रहे। मीडिया से बात करते हुए डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि इस ऐप में साल 2016 तक पेड़ों से संबंधित सभी डाटा उपलब्ध हैं।
उसके बाद चिड़ियाघर को अपग्रेड करने व मरम्मत का काम किया गया लेकिन इस दौरान एक भी पेड़ नहीं काटा गया था। वहीं दूसरी तरफ गार्डन के अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न प्रजातियों के लगभग 2000 पौधे रोपे गये, जिसने पौधों की संख्या में बढ़ोतरी ही की। उन्होंने बताया कि पौधों की दोबारा गिनती की जाएगी और सभी डाटा को मोबाइल ऐप में अपडेट भी कर दिया जाएगा।

बता दें, Indian Express की एक रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार रानीबाग में करीब 4000 प्रजातियों के पौधे और 256 प्रजातियों के जीवित सुक्ष्मजीव मौजूद हैं। यह पूरा इलाका खुला हुआ है। अगर रानीबाग इलाके में टहलने निकले तो बाग के अलग-अलग हिस्सों से होकर गुजरते हुई पगडंडियों से कोई भी व्यक्ति लगभग 4 किमी लंबा रास्ता तय कर लेगा।



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