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ओडिशा में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध, शुरू होने वाला है ओलिव रिडले कछुओं का प्रजननकाल, Details

ओडिशा में अगले 7 महीनों तक मछली पकड़ने पर लागू किया जा चुका है प्रतिबंध। सिर्फ इतना ही नहीं, ओडिशा में समुद्रतट से लगभग 20 किमी के दायरे में मोटर बोट और ट्रॉलर भी नहीं चलेंगे। लेकिन क्यों? क्या प्रतिबंध पूरी ओडिशा में लागू हुआ है? जी नहीं, यह प्रतिबंध सभी जगहों के लिए लागू नहीं किया गया है। दरअसल, यह समय होता है जब समुद्र में रहने वाले ओलिव रिडले कछुओं (Olive Ridley Turtle) का प्रजननकाल शुरू हो जाता है।

ओडिशा के समुद्रतटों पर बड़ी संख्या में ये कछुए अपना घोसला बनाने और अंडे देने के लिए आते हैं। फिर उन अंडों से बच्चे निकलते हैं, जो धीरे-धीरे सरकते हुए वापस समुद्र में कहीं खो जाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में कोई बाधा न आए, इसे सुनिश्चित करने के लिए ही ओडिशा सरकार हर साल नवंबर से लेकर अगले लगभग 7 महीनों तक चुनिंदा समुद्रतटों के आसपास के क्षेत्रों में मछली पकड़ने, मोटर बोट चलने जैसी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा देती है।

odisha olive ridley turtle nesting season

कब से कब तक लागू रहेगा प्रतिबंध

etv bharat की एक रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार ओडिशा की मरीन फिशरीज विभाग और वन विभाग इस मामले में साथ में मिलकर काम करती है। हर साल की तरह इस साल भी 1 नवंबर से ओडिशा के चुनिंदा समुद्रतटों पर मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, जो 31 मई तक लागू रहेगी। बताया जाता है कि शुरुआत में ओलिव रिडले कछुए देवी नदी के मुहाने, रुशीकुल्या मुहाना और गहिरमाथा समुद्री अभ्यारण्य में अपना घोसला बनाने और अंडे देने के लिए आते हैं।

पुरी में देवी नदी का मुहाना ओलिव रिडले कछुओं के घोसला बनाने का प्रमुख स्थान है। इसलिए फिशरिज विभाग की तरह से इस समुद्रतट के 20 किमी के दायरे में ट्रॉलर भी नहीं चलाने का आदेश दिया है। अगर इस आदेश की अवहेलना होती है, तो ट्रॉलर के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने का भी फैसला विभाग की तरफ से लिया गया है।

क्यों लगाया जाता है प्रतिबंध

मछली पकड़ने के दौरान जाल में फंसकर या फिर मछुआरों की नावों, ट्रेलर आदि से टकराकर या उससे कटकर बड़ी संख्या में कछुए मारे जाते हैं। इस वजह से ही हर साल यह प्रतिबंध लगाया जाता है। मीडिया से बात करते समय एक अधिकारी ने बताया कि आमतौर पर ओलिव रिडले मादा कछुआ रात के समय ही समुद्र से बाहर निकलकर तट की तरफ आती है और रेत में गहरा गड्ढ़ा बनाकर अपना घोसला तैयार करती है।

फिर उसमें अपने अंडे देकर सुबह होने तक वापस समुद्र में लौट जाती है। करीब 45 से 60 दिनों बाद इन अंडों के नन्हें-नन्हें ओलिव रिडले कछुए बाहर निकलते हैं। जो अंडों से बाहर निकलते ही समुद्र की ओर दौड़ लगाना शुरू कर देते हैं। ये बच्चे अपनी मां के बिना ही समुद्र में बड़े होते हैं।

olive ridley turtle odisha

केंद्रपाड़ा में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध

ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले में हर साल कुछ महीनों के लिए मछली पकड़ने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया जाता है, जो इस साल भी लगाया गया है। इस साल फिशरिज विभाग ने यह प्रतिबंध देवी नदी के मुहाने से धर्मा मुहाने तक 20 किमी के दायरे में भी लागू किया है, ताकि कछुओं को आने, अपना घोंसला बनाने, उनमें अंडे देने, वापस समुद्र में लौटने, अंडों की सुरक्षा, अंडों से बच्चों के निकलने की प्रक्रिया और कछुओं के बच्चों के वापस समुद्र में लौटने की इस पूरी प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।

मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार राजनगर वाइल्डलाइफ डिवीजन ने 14 कछुआ सुरक्षा शिविर का आयोजन किया है, जिसमें रणनीति के तहत विभिन्न जगहों पर कर्मियों को तैनात भी किया गया है जो ओलिव रिडले कछुओं के घोसला बनाने की इस पूरी प्रक्रिया में कोई बाधा न आए इसे सुनिश्चित करेंगे। प्रतिबंधित क्षेत्र में कोई भी ट्रॉलर प्रवेश न कर सकें, इसे सुनिश्चित करने के लिए कोस्ट गार्ड, वन विभाग, मरीन पुलिस और फिशरिज विभाग संयुक्त रूप से गश्ती भी लगा रही है।

मछुआरों को मिलेगा मुआवजा

मिली जानकारी के अनुसार लगभग 7 महीनों तक ओडिशा के चुनिंदा समुद्रतटों के आसपास मछली पकड़ने पर प्रतिबंध रहने की वजह से बड़ी संख्या में मछुआरों को नुकसान होने वाला है। क्योंकि मछली पकड़ना ही उनकी आजीविका है, इसलिए परिवार का लालन-पालन करने में भी परेशानी आएगी। इस बात को ध्यान में रखते हुए ही राज्य सरकार की ओर से इस समयकाल के दौरान लगभग 3400 प्रभावित मछुआरा परिवारों को ₹15,000 की सहायता राशि प्रदान की जाएगी।

nest of olive ridley turtle

कब कितने ओलिव रिडले कछुओं ने बनाया अपना घोसला

  • 2016-17 : गहिरमाथा और रुशिकुल्या में करीब 9.75 लाख कछुओं ने घोसला बनाया।
  • 2017-18 : लगभग 11.10 लाख कछुए समुद्र के तटों पर अपना घोसला बनाने आए।
  • 2018-19 : कछुओं के आने की संख्या में आश्चर्यजनक रूप से गिरावट आयी और मात्र 4.51 लाख कछुओं ने ही घोसला बनाया। रुशिकुल्या में इस साल एक भी घोसला नहीं बना।
  • 2019-20 : 7.30 लाख कछुए आए और गहिरमाथा और रुशिकुल्या दोनों जगहों पर ही घोसला बनाया।
  • 2021-22 : लगभग 10.51 लाख कछुए रुशिकुल्या और गहिरमाथा में अपना घोसला बनाने आए।

बता दें, ओडिशा के इन चुनिंदा स्थानों और समुद्रतटों पर फरवरी से लेकर अप्रैल के अंत तक दुर्लभ प्रजाति के ये ओलिव रिडले कछुए अपना घोसला बनाने और अंडे देने के लिए आते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो अंडों से बाहर निकलकर जब समुद्र की ओर इन कछुओं के बच्चे रेस लगाते हैं और समुद्र में पहुंचने के बाद बिना माता-पिता के कछुए के बच्चे अपना जीवन शुरू करते हैं तो 100 में से मात्र 1 कछुआ ही वयस्क होने तक जीवित रह पाता है। बाकी प्रकृति की भेंट चढ़ जाते हैं।

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