
उत्तराखंड को वन्यजीवों के लिए सबसे समृद्ध राज्य माना जाता है। लेकिन अब इन वन्यजीवों को रेस्क्यू कर रखने को लेकर काफी समस्या खड़ी हो गई है। दरअसल, रेस्क्यू सेंटर रानीबाग (Rescue centers Ranibagh) और नैनीताल चिड़ियाघर (Nainital Zoo) में अब इतनी जगह ही नहीं बची है कि अब उसमें किसी नए बाघ या तेंदुए को रखा जाए।

दूसरे राज्यों में भेजे जा रहे नए बाघ और तेंदुए
बीते महीनों में दो तेंदुए को रुद्रप्रयाग और बागेश्वर से रानीबाग पहुंचा दिए गया था। वहीं, दो बाघों को गुजरात के जामनगर स्थित जू में भेज दिया गया था। इसके चलते अब किसी नए तेंदुए और बाघ को रानीबाग या नैनीताल में रखने की जगह नहीं बची है। अब इसको लेकर काफी समस्या भी खड़ी हो गई है।

वन्यजीवों के संघर्ष की आशंका बढ़ी
वन्यजीवों के आबादी बढ़ने से ये सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाथियों और गुलदार के बाद अब बाघ और तेंदुए भी जंगल से बाहर निकल रहे हैं। ऐसे में आसपास के ग्रामीण लोग और वन्यजीवों के बीच संघर्ष की आशंका बढ़ जाती है, जिसके चलते वन विभाग का प्रयास करता रहता है कि जल्द से जल्द गुलदार या बाघ को आबादी क्षेत्र से रेस्क्यू कर उन्हें किसी चिड़ियाघर या रेस्क्यू सेंटर भेजा जाए।

रेस्क्यू सेंटर व चिड़ियाघर में जगह नहीं
रानीबाग रेस्क्यू सेंटर में दो बाड़े है। इसके एक बाड़े में उम्रदराज तेंदुए और दूसरे बाड़े में रुद्रप्रयाग व बागेश्वर से भेजे गए गुलदारों को रखा गया है। वहीं, नैनीताल चिड़ियाघर में इस समय चार बाघ और पांच तेंदुए है। यहां बाघों के लिए दो और तेंदुए के लिए तीन बाड़े हैं। संख्याबल के हिसाब से देखा जाए तो जू में इससे ज्यादा बाघ-तेंदुए के रखने की जगह नहीं है। वहीं, रेस्क्यू सेंटर के विस्तार का जिम्मा लोनिवि को सौंपा गया था लेकिन ये काम पूरा नहीं हुआ है। ऐसे में मुख्य वन संरक्षक पीके पात्रो ने बताया कि जू व रेस्क्यू सेंटर के विस्तार को लेकर केंद्रीय अनुमति लेने के बाद संसाधनों की जरूरत भी है।



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