दक्षिणपूर्व बंगाल की खाड़ी पर तैयार हुआ निम्नदबाव का क्षेत्र शक्तिशाली तूफान मोका में परिवर्तित हो चुका है। मोका के तीव्र होने में वायुमंडलीय परिस्थितियां काफी सहायक साबित हो रही हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक 14 मई की दोपहर को बांग्लादेश के दक्षिणपूर्व और म्यांमार के उत्तरी समुद्रतट से टकराकर स्थल भाग में प्रवेश कर सकता है।

IMD के पूर्वानुमान के अनुसार चक्रवाती तूफान मोका 14 मई की दोपहर को बांग्लादेश के कॉक्सबाजार और म्यांमार के Kyaukpyu तट के बीच लैंडफॉल कर सकता है। मई के महीने में ही हिंद महासागर में सबसे ज्यादा चक्रवात तैयार होता है। इन चक्रवाती हवाओं का इतनी जल्दी तूफान का आकार ले लेना चिंता का विषय बनता जा रहा है।
मोका के प्रभाव की वजह से पश्चिम बंगाल, ओड़िशा जैसे तटवर्तीय राज्यों में समुद्र से नमी युक्त हवा प्रवेश नहीं कर पा रही थी। क्योंकि नमी युक्त हवा खींचकर मोका अपनी शक्ति बढ़ा रहा था। इस वजह से इन राज्यों में भीषण और हिट वेव का प्रभाव देखने को मिल रहा था। हालांकि मोका के आगे बढ़ जाने के बाद अब इन जगहों में बारिश की संभावना बनती नजर आ रही है।

वैज्ञानिक और शोधकर्ता इसके लिए वैश्विक औसत तापमान में परिवर्तन को खासतौर पर हिंद महासागर में चक्रवाती वातावरण के लिए जिम्मेदार मानते हैं। एक अध्ययन के मुताबिक अरब सागर में चक्रवाती तूफानों की तीव्रता में कमी आयी है। इसका अर्थ यह हुआ कि अरब सागर में चक्रवाती तूफान पहले की तुलना में धीमी गति से आगे बढ़ते हैं।
अरब सागर में चक्रवाती गतिविधियां समुद्र के तापमान और ग्लोबल वॉर्मिंग की उपस्थिति में नमी की उपलब्धता पर निर्भर करता है। 1982-2019 तक हुए इस अध्ययन के मुताबिक हाल के दिनों में अरब सागर में चक्रवाती तूफानों में 54% की वृद्धि हुई है जबकि बंगाल की खाड़ी में 8% की कमी आयी है।
इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेटेयोरोलॉजी और आईपीसीसी के प्रमुख लेखक पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ. रॉक्सी मैथ्यू कोल ने इस बारे में कहा, "चक्रवाती पद्धति की तीव्रता में अचानक वृद्धि के लिए समुद्र के मौसम की स्थिति काफी ज्यादा सहायक होती है। बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती गतिविधियों में गिरावट नजर आ रही है लेकिन चक्रवातों की तीव्रता में कई गुना वृद्धि हुई है।"

उन्होंने आगे कहा, "इसका एक उदाहरण हमने चक्रवाती तूफान अम्फान को देखा था जिसने स्थल भाग में प्रवेश करने के बाद भी अपनी शक्ति नहीं खोयी। पिछले कुछ दशकों से बंगाल की खाड़ी मानों ग्लोबल वॉर्मिंग पर सवार है। बंगाल की खाड़ी का तापमान लगातार 30°-35° सेल्सियस के बीच रह रहा है। उच्च तापमान ही चक्रवाती तूफानों के बनने में अहम भूमिका निभाता है।"



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