110 साल पहले समुद्र में जल समाधी ले चुका जहाज टाइटैनिक पिछले कुछ दिनों से दुनिया भर में एक बार फिर से चर्चाओं में छाया हुआ है। टाइटैनिक के मलबे को दिखाने ले गया पनडुब्बी 5 यात्रियों समेत पिछले रविवार (18 जून) से गायब हो चुका है। हर बीतता हुआ पल पनडुब्बी में सवार पांचों यात्रियों को मौत के करीब पहुंचा रहा है।
क्योंकि अब इस पनडुब्बी में महज कुछ घंटों के लिए ही ऑक्सीजन बची हुई है। अगर इतने समय में इस पनडुब्बी को नहीं ढूंढ निकाला गया तो यात्रियों के बचने की उम्मीद बेहद कम है। लापता पनडुब्बी को ढूंढने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
गुरुवार की शाम तक के लिए है ऑक्सीजन
समुद्र की गहराईयों में डूबे टाइटैनिक के मलबे को दिखाने ले गये सबमर्सिबल 'टाइटैन' के पास भारतीय समयानुसार गुरुवार की शाम को 3 बजे तक का ही ऑक्सीजन बचा हुआ है। यानी अब से सिर्फ 4 घंटों का। इस वजह से हर बीतते हुए समय के साथ बचाव दल के कर्मचारियों की चुनौतियां भी बढ़ती जा रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पनडुब्बी में सवार लोगों के लिए ऑक्सीजन की घटती मात्रा एकमात्र संकट नहीं है। पनडुब्बी में किसी भी समय बिजली जा सकती है।
बताया जाता है कि बिजली के माध्यम से ही पनडुब्बी में ऑक्सीजन और कार्बन-डाई-ऑक्साइड की मात्रा को नियंत्रित किया जाता है। ऑक्सीजन के कम या खत्म हो आने की परिस्थिति में यात्रियों द्वारा छोड़ा गया हर सांस पनडुब्बी में कार्बन-डाई-ऑक्साइड की मात्रा को बढ़ाती रहेगी। यह एक एनेस्थेटिक गैस का काम करेगी और खून में कार्बन-डाई-ऑक्साइड की अतिरिक्त मात्रा होने पर यात्रियों की जान पर भी बन आ सकती है।
समुद्र की गहराई में हाईपोथर्मिया का खतरा
बताया जाता है कि पिछले रविवार से समुद्र की गहराई में सबमर्सिबल करीब 12,500 फीट (3,800 मीटर) की गहराई में है। इतनी गहराई में अंधेरा और ठंड की वजह से पनडुब्बी में सवार लोगों पर हाईपोथर्मिया का शिकार होने का खतरा भी मंडरा रहा है। अगर पनडुब्बी की बिजली खत्म हो जाती है तो तापमान को सामान्य बनाए रखने वाले मशीन भी काम करना बंद कर देंगे। इसलिए बचाव दल के कर्मचारी इस पनडुब्बी को किसी भी हालत में समय रहते ढूंढ निकालने की कोशिश कर रहे हैं।
सुनाई दी आवाज
इस पनडुब्बी को ढूंढ निकालने के लिए कनाडाई कोस्ट गार्ड वाहन लगातार सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। बताया जाता है कि पनडुब्बी टाइटैन के गायब होने के 2 दिनों बाद कनाडाई कोस्ट गार्ड वाहन को समुद्र के अंदर से कुछ आवाजें सुनाई दी थी, जो इस पनडुब्बी से आती हुई ही लग रही है। इन आवाजों को सुनने के तुरंत बाद मंगलवार को पनडुब्बी को ढूंढने के लिए पानी के नीचे रोबोटिक सर्च ऑपरेशन भी चलाया लेकिन कुछ भी उनके हाथ नहीं लगा। बताया जाता है कि कनाडाई कोस्ट गार्ड को समुद्र के नीचे से धमाके जैसी आवाजें हर आधे घंटे के अंतराल में सुनाई दे रही थी। इन आवाजों के आने के बाद से उम्मीद जतायी गयी थी कि गायब पनडुब्बी को जल्द ही ढूंढ निकाला जाएगा लेकिन हर बीतते हुए पल के साथ यात्रियों के जिंदा बचने की उम्मीदें भी खत्म होती नजर आ रही हैं।
टाइटैनिक का मलबा दिखाने का अभियान
10 अप्रैल 1912 को टाइटैनिक जहाज अपने पहले सफर पर निकला था लेकिन महज 4 दिनों के बाद ही एक विशाल आईसबर्ग से टकराने के बाद टाइटैनिक ने 14 अप्रैल को जल समाधी ले ली थी। टाइटैनिक का मलबा आज भी समुद्र के नीचे ही पड़ा हुआ है, जिसे लेकर लोगों में काफी उत्सुकताएं भी हैं। टाइटैनिक के मलबे को दिखाने के लिए ओशनगेट एक्सपेंडिशंस पर कंपनी की तरफ से ले जाया जाता है, जिसमें एक छोटे सबमर्सिबल में बैठाकर यात्रियों को टाइटैनिक का मलबा दिखाया जाता है।
टाइटन सबमर्सिबल के अंदर सिर्फ 5 लोगों के बैठने की ही जगह है।
इस बार एक्सपेंडिशंस के लिए सबमर्सिबल 'टाइटैन' को भेजा गया था, जिसमें कंपनी के सीईओ स्टॉक्टन रश, पाकिस्तानी अरबपति पिता-पुत्र शहजादा और सुलेमान दाउद और टाइटैनिक एक्सपर्ट पॉल-हेनरी नार्ग्योलेट समेत चालक दल के सदस्य भी हैं। बताया जाता है कि समुद्र में उतरने के करीब 1 घंटा 45 मिनट बाद ही सबमर्सिबल से जहाज का संपर्क टूट गया था लेकिन कंपनी ने इस बारे में कोस्ट गार्ड को सूचना लगभग 8 घंटे बाद दी। इसके बाद से ही कनाडाई कोस्ट गार्ड की तरफ से सबमर्सिबल को ढूंढने के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।



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