सावन का महीना शिवभक्तों को बड़ा प्रिय होता है क्योंकि यह महीने महादेव को अतिप्रिय जो होता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन में बाबा महाकाल के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। सावन के तीसरे सोमवार को उज्जैन में महाकाल के दरबार में ही कुछ ऐसा हुआ जिसने विश्व रिकॉर्ड बना डाला। महाकाल की नगरी उज्जैन में सावन के तीसरे सोमवार को एक साथ डमरू बजाने का विश्व रिकॉर्ड बनाया गया है।
मान्यताओं में कहा जाता है कि डमरू भगवान शिव को बहुत प्रिय होते हैं। सोमवार (5 अगस्त) को इसी डमरू की आवाज से महाकाल की पूरी नगरी ही गूंज उठी।

5 अगस्त को उज्जैन में एक साथ 1500 डमरू बजाए गये। इसके साथ डमरू बजाने का पिछला रिकॉर्ड तोड़ते हुए उज्जैन ने सबसे ज्यादा डमरू बजाने का नया कीर्तिमान गढ़ दिया है। एक साथ 1500 डमरू बजाने के कारण उज्जैन का नाम गिनीज बुक (Guinness Book) ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो चुका है। बता दें इससे पहले सबसे ज्यादा डमरू एक साथ बजाने का विश्व रिकॉर्ड फेडरेशन ऑफ इंडियन एसोसिएशन न्यूयॉर्क के नाम था, जिसने कुल 488 डमरू एक साथ बजाकर यह रिकॉर्ड बनाया था।
लेकिन उज्जैन ने उस रिकॉर्ड को तोड़कर सबसे ज्यादा डमरू बजाने का विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। जानकारी के अनुसार यह विश्व रिकॉर्ड 10 मिनट तक 1500 डमरू वादकों ने डमरू बजाकर बनाया है। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की ओर से इसका सर्टिफिकेट भी प्रदान किया जा चुका है।
बजायी गयी महाकाल की भस्म आरती की धून
विश्व रिकॉर्ड बनाने के लिए 1500 डमरू वादकों ने महाकाल की भस्म आरती के समय जिस धून को बजाया जाता है, उसी धून को चुना था। बताया जाता है कि कुल 25 दलों के 1500 डमरू वादकों ने मिलकर इस विश्व रिकॉर्ड को बनाया है। सावन की तीसरी सोमवारी को जब महाकाल की सवारी निकाली गयी, उसी समय डमरू वादन किया गया।
इसके साथ ही उज्जैन में रहने वाले महाकाल के हर एक भक्त के मन की वह इच्छा भी पूरी हो गयी जिसमें वह चाहते थे कि महाकाल की पूरी नगरी में उनके डमरू का नाद गूंजे। यह विश्व रिकॉर्ड बनने के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी अपनी बधाई और शुभकामनाएं दी।
उज्जैन में महाकाल लोक के सामने स्थित शक्तिपथ पर डमरू वादन का यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें हिस्सा लेने वाले सभी डमरू वादकों ने सफेद और केसरिया रंग के परिधान धारण किये थे। इस कार्यक्रम का आयोजन महाकाल प्रबंधन और जिला प्रशासन की ओर से किया गया था। डमरू वादन के इस भव्य आयोजन की वजह से सोमवार को निकाली गयी महाकाल की सवारी की भव्यता और शोभा भी कई गुना बढ़ गयी।
बता दें, सावन के महीने में हर सोमवार को परंपरागत तौर पर महाकाल की सवारी निकाली जाती है। मान्यता है कि उज्जैन (बाबा महाकाल की नगरी) में महाकाल का ही शासन चलता है। इसलिए सावन के हर सोमवार को महाकाल पूरे शहर के दौरे पर होते हैं। वह सड़कों पर अपने भक्तों को दर्शन और आर्शिवाद देते हैं।



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