उत्तराखंड के बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगातार दो दिन पहाड़ से भारी भूस्खलन होने की घटना सामने आयी है। राज्य के चमोली जिले में लगातार हो रही बारिश की वजह से पहाड़ टूटने का सिलसिला शुरू हो गया है। मिली जानकारी के अनुसार मंगलावर को जोगी धारा के पास पहाड़ का बड़ा सा हिस्सा टूटकर नीचे आ गया था।
वहीं बुधवार को पातालगंगा के पास पहाड़ से हुए भूस्खलन की वजह से आधी सड़क ही बंद हो गयी। हालांकि दोनों मामलों में चट्टानों के गिरते समय सड़क से होकर कोई भी गाड़ी नहीं जा रही थी, इस वजह से जान-माल का कोई नुकसान नहीं हुआ।

भूस्खलन की वजह से लगभग 40 घंटों तक दोनों ही रास्तों पर गाड़ियों की आवाजाही पूरी तरह से बंद रही, जिस वजह से हजारों की संख्या में तीर्थ यात्री विभिन्न जगहों पर फंस गये। हालांकि बाद में चमोली पातालगंगा के पास बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही को फिर से शुरू कर दिया गया जिससे जगह-जगह फंसे यात्रियों ने राहत की सांस ली। समाचार लिखे जाने तक जोगीधारा के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों का परिचालन अभी भी बाधित है। बताया जाता है कि जोगीधारा के पास से सड़क पर से मलबा हटाने का काम जारी है।
बता दें, पिछले 3 दिनों से बद्रीनाथ हाईवे को बंद रखा गया था। स्थिति इतनी खराब हो गयी थी कि सड़क पर गिरे चट्टान के बड़े-बड़े बोल्डरों को हटाने के लिए विस्फोट का सहारा लेना पड़ा है। लगातार पहाड़ के दरकने की वजह से हाईवे पर यातायात को सुचारु रूप से संचालित करने में भी समस्याएं आ रही हैं।
पहाड़ से गिरे पत्थरों के मलबे की वजह से हाईवे को भी नुकसान पहुंचा है। इस हाईवे के बंद होने से बद्रीनाथ धाम व हेमकुंड, फूलों की घाटी, औली आने-जाने वाले यात्री जगह-जगह फंस गये हैं। लगभग 800 तीर्थ यात्री जो हेमकुंड व बद्रीनाथ धाम से वापस लौट रहे थे वे जोशीमठ गोविंदघाट में फंस गये। वहीं हेलंग, पीपलकोटी, बिरही, चमोली आदि पड़ावों पर लगभग 2200 यात्रियों को रोक देना पड़ा था।

बुधवार को दोपहर में लगभग 12 बजे मौसम साफ होने के बावजूद पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा दरकने लगा। इसके बाद ऊंचाई से अचानक बड़ी-बड़ी चट्टानों समेत मलबा नीचे आ गया जिससे पातालगंगा में धूल का गुबार फैल गया। इस लैंडस्लाइड का वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ है। पहाड़ से नीचे आता मलबा देखते ही मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी फैल गयी।



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