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चार धाम यात्रा पर जाने वाले तीर्थ यात्रियों को स्वास्थ्य विभाग ने दी ये सलाह

12 मई को बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही उत्तराखंड में प्रसिद्ध चार धाम यात्रा की शुरुआत हो गयी थी। इससे पहले अक्षय तृतीया के दिन यानी 10 मई को केदारनाथ धाम, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खोल दिये गये थे। इस साल चार धाम यात्रा शुरू होने के साथ ही हजारों की संख्या में लोग दर्शन करने पहुंच रहे हैं। इस बीच एक दुःखद खबर भी सामने आयी है।

मिली जानकारी के अनुसार चार धाम यात्रा शुरू होने के 72 घंटों के अंदर यहां दर्शन करने आने वाले 4 श्रद्धालुओं की मौत हो गयी है।

kedarnath dham

मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार 10 मई को यमुनोत्री धाम में दो श्रद्धालुओं की मौत दिल का दौरा पड़ने से हो गयी थी। जबकि 11 मई को यमुनोत्री धाम में ही एक अन्य महिला तीर्थ यात्री की मृत्यु हार्ट फेल करने की वजह से हो गयी थी। 12 मई को जब बद्रीनाथ धाम के कपाट खुले तो वहां दर्शन करने गुजरात से पहुंची 75 वर्षीया एक महिला की जान सांस संबंधित बीमारियों की वजह से चली गयी।

जानकारों का कहना है कि उत्तराखंड के सभी चारों धाम काफी ऊंचाई पर मौजूद हैं। इस वजह से दिल या सांस से संबंधित कोई भी बीमारी वहां जानलेवा साबित हो सकती है। उत्तराखंड के स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने चारधाम यात्रा की तैयारियों को लेकर मीडिया से हुई बातचीत के दौरान बताया कि यात्रा के लिए स्वास्थ्य विभाग ने SOP जारी कर दी है।

राज्य सरकार यात्रा को सुगम एवं व्यवस्थित बनाने के लिए हरसंभव प्रयासरत कर रही है। पर्यटन विभाग के माध्यम से किए पंजीकरण में स्वास्थ्य पैरामीटर का कॉलम रखा गया है। जिसमें यात्री अपने स्वास्थ्य से सबंधित पूरी जानकारी भरेंगे, तो उन्हें जरूरत के समय इलाज में आसानी रहेगी।

badrinath dham

तीर्थ यात्रियों के दी गयी सलाह

स्वास्थ्य विभाग ने SOP में यात्रियों को सलाह दी है कि कम से कम 7 दिन के लिए चारधाम यात्रा की योजना बनाएं। केदारनाथ और यमुनोत्री धाम में पैदल चढ़ते समय प्रत्येक एक से दो घंटे के बाद 5 से 10 मिनट तक विश्राम जरूर करें। यात्रा के लिए गर्म कपड़े, बारिश से बचाव के लिए रेनकोट, छाता, स्वास्थ्य जांच के लिए पल्स ऑक्सीमीटर, थर्मामीटर आदि को साथ में जरूर रखें। जो यात्री हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, अस्थमा, मधुमेह से ग्रसित हैं, वे अपने पास सभी जरूरी दवाईयां और अपने डॉक्टर का नंबर अवश्य रखें।

यात्रा के दौरान यदि किसी भी तीर्थ यात्री को सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, चक्कर आना, उल्टी आने जैसी समस्याएं नजर आती हैं तो तुरंत नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जाएं और प्राथमिक उपचार करवाएं।

health advisory uttarakhand char dham yatra

बताया जाता है कि केदारनाथ यात्रा मार्ग पर स्वास्थ्य विभाग को विशेष फोकस है। पिछले वर्ष की तरह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गुप्तकाशी, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र फाटा, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गौरीकुंड और माधव चिकित्सालय नारायणकोटी में हेल्थ एटीएम की स्थापना के निर्देश दिए गए हैं। डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ, ऑक्सीजन सिलिंडर और दवाओं की पर्याप्त व्यवस्था है।

क्यों बिगड़ने लगती है तबियत

चार धाम यात्रा गढ़वाल हिमालय में ऊंचाई पर मौजूद हैं। इस वजह से इन्हें उच्च ऊंचाई वाली यात्रा भी कहा जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स के दावे के मुताबिक भारतीय सेवा के हाई ऑल्टीट्यूड वाले पैरामीटर्स के हिसाब से इन जगहों को हाई ऑल्टीट्यूड एरिया कहा जाता है।

जब तीर्थ यात्री इन ऊंचाईयों वाली जगहों पर चढ़ाई करते हैं तो ऊंचाई के कारण हवा पतली होने लगती है। इस वजह से खासतौर पर बुजुर्ग और बीमार यात्रियों के फेंफड़ों में ऑक्सीजन की मात्रा कम पहुंचती है, नतीजन हार्ट और फेंफड़ों पर ज्यादा जोर पड़ने लगता है। इस वजह से ही सिर में चक्कर आना, हार्ट फेल करना या दिल का दौरा पड़ने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

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