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चार धाम यात्रा पर आए हुड़दंगबाज तीर्थ यात्रियों को रुद्रप्रयाग पुलिस सीखाएगी 'मर्यादा' का पाठ

उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में चार धाम की यात्रा की शुरुआत हो चुकी है। लेकिन चार धाम यात्रा की शुरुआत के बाद से ही सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर कई ऐसे वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनको लेकर जमकर आलोचनाएं भी हो रही हैं। किसी वीडियो में केदारनाथ धाम के पैदल मार्ग के किनारे नशा करते कुछ युवा नजर आ रहे हैं, कहीं चार धाम यात्रा के नाम पर बुक किये गये होटल के कमरों में शराब की खाली बोतलें दिखायी दे रही हैं।

हाल ही में केदारनाथ धाम का एक वीडियो भी खूब वायरल हुआ जिसमें केदारनाथ धाम परिसर में ड्रम बजाते कुछ युवाओं को केदारनाथ धाम ट्रस्ट के एक अधिकारी फटकार लगाते नजर आ रहे हैं। अब तीर्थ यात्रा के नाम पर हुड़दंग मचाते इन लोगों को सबक सीखाने का जिम्मा उत्तराखंड की रुद्रप्रयाग पुलिस ने अपने कंधे पर उठा ली है।

kedarnath dham char dham yatra

हुड़दंगबाज तीर्थ यात्रियों को धार्मिक तीर्थ स्थलों की मर्यादा और शांति का पाठ पढ़ाने के लिए रुद्रप्रयाग पुलिस ने 'ऑपरेशन मर्यादा' की शुरुआत की है। इस बात की जानकारी अपने आधिकारिक X हैंडल पर रुद्रप्रयाग पुलिस ने दी है। बताया जाता है कि चार धाम की यात्रा के दौरान धार्मिक स्थलों पर तीर्थ यात्रियों के अमर्यादित और गैरजिम्मेदार व्यवहार से जुड़ी शिकायतें सामने आने के बाद ही रुद्रप्रयाग जिले की पुलिस ने 'ऑपरेशन मर्यादा' को शुरू करने का फैसला लिया है।

गुप्तकाशी की DSP हर्षवर्धिनी सुमन ने तीर्थ यात्रियों को यात्रा मार्ग अथवा किसी भी पड़ाव पर शराब और किसी भी प्रकार के मादक पदार्थों का सेवन आदि से परहेज करने की अपील की है। इसके साथ ही 'ऑपरेशन मर्यादा' का उद्देश्य तीर्थ धामों में साफ-सफाई को बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना कि किसी भी प्रकार से इन धामों का असम्मान न हो।

बताया जाता है कि रुद्रप्रयाग पुलिस ने चार धाम यात्रा शुरू होने के शुरुआती 4 दिनों में हुड़दंग मचा रहे 25 लोगों का चालान भी काटा है। 'ऑपरेशन मर्यादा' की सफलता को काफी हद तक तीर्थ यात्रियों के सहयोग पर भी निर्भर माना जा रहा है। श्रद्धालु तीर्थ धामों में शोर न मचाएं और न अमर्यादित व्यवहार या परिधान धारण करें।

क्यों केदारनाथ धाम में ड्रम/नगाड़े पर लगी पाबंदी

सोशल मीडिया तेजी से वायरल हुए एक वीडियो में केदारनाथ धाम ट्रस्ट के एक अधिकारी को कुछ युवाओं को मंदिर परिसर में ड्रम बजाने से रोकते हुए उन्हें फटकार लगाते हुए देखा जा रहा है। पर अचानक क्यों केदारनाथ धाम में ड्रम बजाने पर पाबंदी लगा दी गयी? हमें समझना होगा, अगर मंदिर प्रबंधन की तरफ से श्रद्धालुओं को ऐसा करने से रोका जा रहा है, तो निश्चित रूप से कोई न कोई कारण तो होगा ही। ऐसा करने के दो कारण हैं, पहला सांस्कृतिक और दूसरा वैज्ञानिक।

1. क्या है सांस्कृतिक कारण?

केदारनाथ उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में आता है। उत्तराखंड के हर मंदिर में किसी भी विशेष अवसर पर ढोल-दमोह बजाने की परंपरा है। जैसा वीडियो में केदारनाथ धाम ट्रस्ट के सदस्य को भी कहते हुए सुना जा रहा है, "सिर्फ मंदिर का ढोल ही बजेगा।" श्रद्धालुओं को यह समझना होगा कि वे भले ही अपने आराध्य देव की पूजा करने इतनी चढ़ाई के बाद वहां पहुंचे हो, लेकिन यह मंदिर उत्तराखंड में स्थित है। इसलिए उत्तराखंड की संस्कृति का सम्मान करना भी तीर्थ यात्रियों का ही दायित्व है।

uttarakhand kedarnath dham

2. क्या है वैज्ञानिक कारण?

केदारनाथ धाम परिसर में नगाड़ा या ड्रम बजाने की अनुमति न देने का वैज्ञानिक कारण भी बेहद महत्वपूर्ण है। भौगोलिक दृष्टिकोण से केदारनाथ धाम एक बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। केदारनाथ मंदिर के ठीक ऊपर केदारनाथ पर्वत की चोटी मौजूद है, जिसके ठीक नीचे चौराबाड़ी ग्लेशियर स्थित है।

अगर मंदिर में ड्रम-नगाड़े बजाए जाते हैं, तो उस आवाज की वाइब्रेशन की वजह से ग्लेशियर को नुकसान पहुंचने का खतरा हो सकता है और केदारनाथ घाटी में अगर बाढ़ या भूस्खलन जैसी विपदा आती है तो वह कितनी भयावह हो सकती है यह हम सभी इससे पहले देख और महसूस कर चुके हैं। इसलिए वैज्ञानिक कारण से भी केदारनाथ धाम में नगाड़े या ड्रम की तेज आवाज करना खतरे को बुलावा देने जैसा है।

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