गुजरात सरकार 4 से 5 नये जिले बनाने वाली है! क्या अहमदाबाद शहर को एक नया जिला घोषित करना चाहती है गुजरात सरकार? क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पैतृक गांव वडनगर भी बनेगा एक नया जिला? मीडिया रिपोर्ट्स में किये गये दावों से मिल रहा है कुछ ऐसा ही संकेत। बताया जाता है कि गुजरात सरकार 4-5 पुराने जिलों को मिलाकर नये जिले बनाने की योजना बना रही है।
सिर्फ इतना ही नहीं रिपोर्ट्स में किये गये दावों को अगर सच माना जाए तो अहमदाबाद के साथ-साथ पीएम मोदी का पैतृक गांव भी अलग जिला घोषित होगा।

Times Of India की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से किये गये दावे के अनुसार गुजरात सरकार अहमदाबाद, गांधीनगर, कच्छ, मेहसाणा और बनासकांठा जिलों को विभाजित कर कम से कम 4 से 5 नये जिले बनाने की योजना पर विचार-विमर्श कर रही है। बताया जाता है कि राज्य सरकार वर्तमान अहमदाबाद और गांधीनगर जिलों को मिलाकर अहमदाबाद शहर को एक अलग जिला बनाने के साथ-साथ विरमगाम को भी एक नया जिला बना सकती है।
वहीं कच्छ और बनासकांठा से कुछ-कुछ हिस्से लेकर एक नया जिला बनाया जा सकता है। हालांकि इनमें से किसी भी जिले की अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि राज्य सरकार कच्छ को भौगोलिक रूप से पूर्व और पश्चिम कच्छ में विभाजित कर सकती है।
मीडिया रिपोर्ट में किये गये दावे के अनुसार राज्य सरकार प्रधानमंत्री के पैतृक गांव वडनगर को भी एक नया जिला बनाने पर विचार-विमर्श कर रही है। बता दें, वडनगर फिलहाल मेहसाणा का हिस्सा है। इससे पहले साल 2013 में जब पीएम नरेंद्र मोदी गुजरात के तत्कालिन मुख्यमंत्री थे, के कार्यकाल के दौरान 7 नये जिले और 22 तालुका बनाए गये थे। उस समय जिन 7 नये जिलों का गठन किया था वो हैं - अरवाली, गिर सोमनाथ, बोतड, छोटा उदयपुर, महीसागर, मोरबी और देवभूमि-द्वारका।
अब राज्य सरकार एक बार फिर से गुजरात की भौगोलिक स्थिति के आधार पर जिलों का बंटवारा और कुछ जिलों में उलट-फेर करने की योजना बना रही है ताकि प्रशासनिक कार्यों को करने में राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन को अधिक से अधिक सुविधा हो।
संभावना है कि जिलों का बंटवारा और इससे संबंधित सभी घोषणाएं दीवाली के बाद ही की जा सकती है। इसके बाद उन्हें लागू करना और आगे की कार्रवाई की जाएगी। बता दें, इस साल फरवरी में लोकसभा चुनावों से ठीक पहले गुजरात सरकार ने 5 नये नगर पालिकाओं के गठन की घोषणा की थी।
अभी तक आधिकारिक रूप से न तो नये जिलों को बनाने की घोषणा की गयी है और न ही सरकारी तौर पर इनकी पुष्टि की गयी है। जिलों का गठन करने के साथ-साथ वहां नये प्रशासन का गठन करना भी बड़ी चुनौती होती है। इसलिए संभावना जतायी जा रही है कि दीवाली के बाद जब त्योहारों का सीजन खत्म होगो, उस समय ही जिलों के विभाजन के बारे में राज्य सरकार आधिकारिक तौर पर घोषणा कर सकती है।



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