केरल से आने वाले 30 से अधिक प्रकार के खाद्य पदार्थों को कर्नाटक में 'असुरक्षित' घोषित कर दिया है। जिन खाद्य पदार्थों को 'असुरक्षित' घोषित किया गया है, वो मुख्य रूप से स्नैक्स आइटम हैं। इन खाद्य पदार्थों का उत्पादन केरल में किया जाता है और कोडागु जिला समेत कर्नाटक की सीमा से सटे इलाकों में इनकी बिक्री की जाती है।
इन सभी खाद्य पदार्थों को कर्नाटक फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) की तरफ से 'असुरक्षित' घोषित किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार FSSAI ने केरल में बनने वाले लोकप्रिय स्नैक्स आइटम जैसे मसालेदार मिक्सचर, चिप्स, हलवा, मुरुक्कु, सुखे फल आदि के करीब 90 से अधिक नमूना इकट्ठा किया था। इन सभी नमूनों की जांच की गयी और इन्हें स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाया गया। बताया जाता है कि कुछ नमूनों में कृत्रिम रंग जैसे सनसेट यलो, अलुरा रेड, अज़ोरुबाइन और टरट्राजाइन पाए गये हैं। विभाग ने इस बारे में अपनी चिंता जाहिर करते हुए संभावना जतायी है कि इन खाद्य पदार्थों को कर्नाटक और केरल के दूसरे सीमावर्ती जिलों जैसे कासरगोड, दक्षिण कन्नड, बेंगलुरु आदि में भी जरूर भेजा गया होगा।
इसलिए FSSAI की तरफ से होटल और दुकानदारों को इन 'असुरक्षित' स्नैक्स व खाद्य पदार्थों को न बेचने की सलाह दी गयी है। इसके साथ ही कर्नाटक की तरफ से केरल सरकार को पत्र लिखकर भी इस मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध जताया गया है। बताया जाता है कि इन 'असुरक्षित' खाद्य पदार्थों को मुख्य रूप से कर्नाटक के जिन जिलों में भेजा गया था उनमें मैसूर, चमराजानगर, कोडागु, मडीकेरी, दक्षिण कन्नड और मैंगलुरु शामिल हैं।

बताया जाता है कि कृत्रिम रंग जैसे सनसेट यलो, अलुरा रेड, अज़ोरुबाइन और टरट्राजाइन आदि का स्वास्थ्य पर काफी बुरा असर पड़ता है, खासतौर पर अगर इसे लंबे समय तक खाया जाएगा। कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि रंगों की वजह से बच्चे हाइपरएक्टिव हो सकते हैं। मुख्य तौर पर टरट्राजाइन और सनसेट यलो व्यक्ति के स्वभाव पर काफी असर डालता है।
इसके साथ ही टरट्राजाइन के कारण कई बार सांस से संबंधित बीमारी, एलर्जी आदि भी होने की संभावना होती है। अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक इन रंगों को किसी न किसी प्रकार से ग्रहण करता है, जिसकी संभावना इन दिनों काफी ज्यादा होती है, तो उसमें कैंसर जैसी बीमारियां होने का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है। इन खतरों के बावजूद भोजन में रंगों का इस्तेमाल लगातार जारी है जिनसे सावधान होने की जरूरत है।



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