कर्नाटक उन चुनिंदा राज्यों में से है जहां मानसून में बदरा जमकर बरसते हैं। इस वजह से राज्य भर में कई ऐसे जगहें भी बन जाती हैं, जहां से झरने सिर्फ और सिर्फ मानसून के समय निकलते हैं। जो शहरी जीवन से दूर एक तरोताज़ा करने वाली जगह की तरह काम करते हैं। इस साल मानसून की बारिश शुरू हो चुकी है और ऐसे झरनों व वहां घूमने जाने का समय भी आ गया है।
तो मानसून में इन जगहों को मिस न करें और रोज की दौड़धूप से अलग परिवार के साथ कुछ समय प्रकृति की गोद में बिता कर आएं।

हम यहां 4 ऐसे झरनों के बारे में बता रहे हैं, जो आमतौर पर कम लोकप्रिय हैं। इस वजह से यहां लोगों की भीड़ भी ज्यादा नहीं होती है।
मैगोड वाटरफॉल : शांत जगह
उत्तर कन्नड़ में पश्चिमी घाट के जंगलों के बीच स्थित मागोड वाटरफॉल, बेदती नदी द्वारा निर्मित है। पहाड़ी रास्तों से गुजरती हुई लगभग 200 मीटर की ऊंचाई से नीचे गिरते समय इस झरने का निर्माण होता है। झरने के आस-पास कोई कोलहल या शोरशराबा नहीं होता...सिर्फ पानी के बहने की आवाज और पक्षियों का कलरव होता है। साथ में हरियाली इस जगह को और भी निखार देती है। झरने तक की छोटी सी यात्रा के दौरान पर्यटक कई व्यूइंग प्वाएंट्स से गुजरते हैं।
घूमने जाने के सबसे अच्छा समय : जुलाई से अक्तूबर
बैंगलोर से दूरी : लगभग 450 किमी
नजदीकी रेलवे स्टेशन : कुमता और हुबली

गोकक वाटरफॉल : कर्नाटक का छोटा नाएग्रा
कर्नाटक में इस वाटरफॉल को मिनी नाएग्रा फॉल्स के रूप में जाना जाता है। गोकक वाटरफॉल्स तब बनता है जब घाटप्रभा नदी एक खूबसूरत घाटी में गिरती है। झरने के अलावा, पर्यटक आस-पास में मौजूद प्राचीन मंदिरों जैसे महालिंगेश्वरा, भगवान सन्मुख और देवी दुर्गा के मंदिर और उनके खंडहरों पर भी घूमने जा सकते हैं। इन मंदिरों का निर्माण चालुक्य वास्तुकला के आधार पर किया गया है। इसके साथ ही यहां 200 मीटर लंबे लटकते पुल भी देखने लायक है।
घूमने जाने के सबसे अच्छा समय : जुलाई से सितंबर
बैंगलोर से दूरी : लगभग 622 किमी
नजदीकी रेलवे स्टेशन : बेलगावी

कुंचिकल वाटरफॉल : सबसे ऊंचा झरना
शिवमोगा जिले में मस्तीकट्टे के पास स्थित कुंचिकल झरना, लगभग 455 मीटर की ऊंचाई से गिरता है। माना जाता है कि यह भारत का सबसे ऊंचा झरना है। ऊंचाई से चट्टानों पर नीचे जब झरने का पानी गिरता है तो एक धुंध जैसी बनती है, जो काफी विस्मयकारी लगती है। आसपास का प्राकृतिक वातावरण ऐसा है, जिसे हर कोई लंबे समय तक अपनी यादों में संजो का रखना चाहेगा।
घूमने जाने के सबसे अच्छा समय : जुलाई से सितंबर
बैंगलोर से दूरी : लगभग 380 किमी
नजदीकी रेलवे स्टेशन : उडुपी
उंचल्ली वाटरफॉल : प्राकृतिक रत्न
सिद्धपुरा के पास पश्चिमी घाट के सह्याद्री जंगलों में बसा, उंचल्ली झरना पर्यटकों की गतिविधियों से अछूता है। अघनाशिनी नदी इस 116 मीटर ऊंचे झरने का निर्माण करती है, जो यहां आने वाले पर्यटकों को एक शांतिपूर्ण और सुकून भरा अनुभव प्रदान करता है। उंचल्ली झरने की ओर आगे बढ़ने पर पहाड़ों, धान के खेतों और हरे-भरे प्राकृतिक नजारों के सुंदर दृश्य दिखाई देते हैं। झरने के आसपास के क्षेत्र में अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत होगी क्योंकि बारिश के बाद यहां फिसलन बढ़ जाती है।
घूमने जाने के सबसे अच्छा समय : जुलाई से सितंबर
बैंगलोर से दूरी : लगभग 440 किमी
नजदीकी रेलवे स्टेशन : तलगप्पा और कुमता



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