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पोंगल 2018:कहीं खिलाते हैं लोमड़ी को चारा, तो कहीं होती है सूर्य की पूजा

By Goldi

उत्तर भारत में मकर संक्रांति तो तमिल नाडू में पोंगल बेहद हर्षौल्लास के साथ मनाया जाता है। यह दिन लोगो की जिन्दगी में खुशियां लेकर आता है, इस दिन लोग नये कपड़े और गहने पहनते हैं, घरों को फूलों और रंगोली से सजाते हैं।

पोंगल तमिल नाडू का बहु प्रतीक्षित त्योहारों में से एक है। जोकि जनवरी के महीने में मनाया जाता है। इस उत्सव को अच्छी फसल के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, और भगवान सूर्य को इसके लिए धन्यवाद कहा जाता है। चार दिन तक चलने वाला यह पर्व सभी की जिन्दगी में खुशियों की बहार लेकर आता है।

'पोंगल' शब्द का अर्थ प्रचुर मात्रा में बह निकला जाने का अर्थ है, जिसका मतलब बहते दूध में चावल पकाना भी है,जो पोंगल की एक महत्वपूर्ण पकवान भी है। पोंगल का पहला दिन भोगी पोंगल क रूप में मनाया जाता है,इस दिन घर से पुराने सामान को साफ़ करके नया सामान लाया जाता है। इसे पोंगल पंडिगाई कहा जाता है जोकि तमिल महीने थाई के पहले दिन का प्रतीक होता है।

इस पर्व पर लोग नए कपड़े पहनते हैं, मिठाई और मसालेदार पोंगल व्यंजन तैयार करते हैं और दोस्तों और परिवार के साथ दिन का आनंद उठाते हैं।

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इस पर्व का तीसरा दिन मातु पोंगल के रूप में मनाया जाता है, इस दिन किसानों के सबसे अच्छे मित्र पशुयों को अच्छे से नहलाया जाता है,और उनकी पूजा की जाती है।

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