नग्गर कैसल हिमाचल प्रदेश का एक प्रमुख टूरिस्ट डेस्टिनेशन है। 500 साल से भी ज्यादा पुराने इस कैसल (हवेली) का निर्माण सिर्फ मिट्टी, लकड़ी और पत्थरों से किया गया था। खास बात यह है कि करीब 115 साल पहले कांगड़ा घाटी में आये भयावह भूकंप के बाद भी इस हवेली को एक खरोंच तक नहीं आयी थी।

आइए आपको नग्गर कैसल के बारे में विस्तार से बताते हैं :
नग्गर कैसल का निर्माण
हिमाचल प्रदेश की कुल्लु घाटी में मनाली से करीब 20 किमी की दूरी पर ही नग्गर कैसल का निर्माण वर्ष 1460 में राजा सिद्ध सिंह ने करवाया था। उस समय इस हवेली का उपयोग शाही परिवार के रहने के लिए किया जाता था। बाद में जब इस हवेली पर अंग्रेजों का अधिकार हुआ तो उसमें अतिरिक्त सीढ़ियां, फायरप्लेस और चिमनी को जोड़ा गया।

यह हवेली भारतीय और अंग्रेजी वास्तुकला का मिलाजुला स्वरूप है। इस कैसल के निर्माण में किसी तरह के सिमेंट का इस्तेमाल नहीं किया गया है। पूरा कैसल (हवेली) सिर्फ लकड़ी, पत्थर और मिट्टी से बना हुआ है। खास बात यह है कि 500 साल से भी पुराने इस कैसल के निर्माण में एक भी कील का इस्तेमाल नहीं किया गया था। हिमाचल प्रदेश में इस कला को काठ-कुनी कहा जाता है।
एक बंदूक के बदले अंग्रेजों को बेचा गया था कैसल
नग्गर कैसल का उपयोग शाही परिवार के रहने के लिए किया जाता था। लेकिन 1846 में जब अंग्रेजों ने कांगड़ा और कुल्लु घाटी पर सिखों को हटाकर ब्रिटिश कब्जा कायम किया उस समय राजा ज्ञान सिंह ने सिर्फ एक बंदूक के बदले फर्स्ट एसी. कमिश्नर मेजर हैय को यह कैसल बेच दिया।

इसके बाद ही इस हवेली के उत्तरी भाग में उन्होंने कई तरह के बदलाव किये। बाद में उन्होंने इसे ब्रिटिश सरकार को बेच दिया। तब से लेकर 1947 तक, जब देश आजाद हुआ तब तक इस हवेली का उपयोग कोर्टरुम के तौर पर किया जाता था। आजादी के बाद यहां से कोर्ट को हटा दिया गया।
भयावह भूकंप भी नहीं हिला पायी नींव
करीब 118 साल पहले 4 अप्रैल 1905 को कांगड़ा घाटी ने जो तबाही का मंजर देखा था, वह आज भी लोगों के दिलों दिमाग में तरो-ताजा है। रिक्टर स्केल पर 7.8 की तीव्रता से आए भूकंप ने लाखों परिवारों को बेघर कर दिया था। भूकंप की तीव्रता का अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि इस भूंकप की वजह से करीब 28 हजार लोग और 53 हजार जानवरों की जान चली गयी थी।

भूकंप के बाद कांगड़ा से अमृतसर और लाहौर तक बस तबाही ही फैली थी। इस भूंकप में कांगड़ा के कई ऐतिहासिक भवन नष्ट हो गये थे। सभी बाजार पूरी तरह से तबाह हो चुके था। कांगड़ा का किला, कांगड़ा मंदिर, सिद्धनाथ मंदिर पूरी तरह से नष्ट हो गया था। लेकिन नग्गर कैसल का बाल भी बांका नहीं हुआ और आश्चर्यजनक रूप से इतने भयानक भूकंप के बाद भी यह हवेली जस की तस खड़ी रही।
बनाया गया है हेरिटेज होटल

1978 के बाद नग्गर कैसल को पहले किराए पर दिया जाने लगा था और हाल ही में हिमाचल प्रदेश के पर्यावरण विभाग ने यहां हेरिटेज होटल बनाया गया है। इस हवेली में कई सुधारकार्य भी किये गये हैं लेकिन पुरानी संरचना से कोई छेड़-छाड़ नहीं की गयी है। इस रेस्तरां में गढ़वाली भोजन मिलता है, जो यहां आने वाले सैलानियों में काफी लोकप्रिय है। नग्गर कैसल में फिल्मों की शूटिंग भी की जाती है। फिल्म 'जब वी मेट' का गाना 'ये इश्क हाय' की शूटिंग इसी हवेली में पूरी की गयी थी।
कैसे पहुंचे नग्गर कैसल
नग्गर कैसल कुल्लु से 23 किमी दूर और मनाली से 20 किमी की दूरी पर है। हिमाचल प्रदेश के दोनों प्रमुख शहरों से यह हवेली सड़क मार्ग से अच्छी तरह से जुड़ी हुई है। मनाली और कुल्लु से नग्गर कैसल के ऐतिहासिक गेस्ट हाउस तक जाने के लिए किराए पर आराम से टैक्सी मिल जाएगी।



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