ट्रेवल के लिहाज से आज भारत का शुमार विश्व के उन चुनिंदा देशों में है जहां हर साल लाखों पर्यटक घूमने आते हैं। ज्ञात हो की आज भारत में 28 राज्य और 7 संघ शासित प्रदेश हैं जो एक पर्यटक को वो सब कुछ देते हैं जिसकी तलाश में वो कहीं घूमने जाता है। भारत के राज्यों पर नेटिव प्लानेट के द्वारा अब तक बहुत कुछ लिखा जा चुका है, तो इसी क्रम में आज हम आपको अवगत कराएंगे भारत के 7 संघ शासित प्रदेशों के टूरिस्ट अट्रैक्शनों से। पढ़ें : ट्रेन जिसका डेली का किराया है 1 लाख रुपए
आपको बताते चलें कि इन संघ शासित प्रदेशों में जहां एक तरफ आपको कई खूबसूरत बीच चर्च ऐतिहासिक स्थल मिलेंगे तो वहीं दूसरी तरफ यहां की प्राकृतिक सुंदरता के बाद आपका यहां से जाने का मन भी नहीं होगा।
गौरतलब है कि ये संघ शासित प्रदेश आज उद्योग सेक्टर के अलावा पर्यटन के क्षेत्र के विस्तार में भी अपना सहयोग देते नज़र आ रहे हैं। तो आइये अब देर किस बात की आइये जाने इन 7 केंद्र शासित प्रदेशों के प्रमुख आकर्षणों के बारे में।

कोरल रीफ अंडमान
अंडमान का शुमार हमेशा ही दुनिया के सर्वोत्तम डेस्टिनेशनों में हुआ है साथ ही यहां समुंद के अंदर मिले वाली कोरल रीफ का भी शुमार विश्व के सबसे खूबसूरत आकर्षणों में है, तो अब यदि आप अंडमान आने का प्लान करें तो स्कूबा डाइविंग कर इन कोरल रीफ को अवश्य देखें। साथ ही अगर आप एडवेंचर के शौक़ीन हैं तब भी अंडमान में ऐसा बहुत कुछ है जो आपको अपना दीवाना बना देगा।

रॉक गार्डन, चंडीगढ़
शहर का सबसे चर्चित जगह रॉक गार्डन सेक्टर एक में सुखना झील और केपिटल कॉम्प्लेक्स के बीच में स्थित है। कोई 40 साल पहले नेक चंद द्वारा डिजाइन किए गए इस गार्डन में शहर और उद्योग के कचरों से कई कलाकृतियां बनाई गई हैं। रॉक गार्डन में वाटरफॉल, पूल और घूमावदार रास्ते सहित 14 लुभावने चैंबर हैं, जो नवीनता और कल्पनाशीलता को दर्शाते हैं। 40 एकड़ में फैले इस गार्डन में कई मूर्तियां हैं, जो घर के बेकार समानों जैसे टूटी हुई चूड़ी, चीनी मिट्टी के बर्तन, तार, ऑटो पार्ट्स और ट्यूब लाइट से बनी हैं।

स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर
अक्षरधाम या स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर दिल्ली में स्थित भारतीय संस्कृति, वास्तुकला, और आध्यात्मिकता के लिए एक सच्चा चित्रण है। इस मंदिर परिसर को पूरा बनने में 5 साल का समय लगा जिसे श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था के प्रमुख स्वामी महाराज के कुशल नेतृत्व में पूरा किया गया। इस मंदिर को 11,000 कारीगरों ने मिलकर बनाया है जिसमें 3000 से ज्यादा स्वयंसेवक भी शामिल थे, इस मंदिर परिसर का उदघाटन आधिकारिक तौर पर 6 नवम्बर, 2005 को किया गया। गौरतलब है की मंदिर वास्तु शास्त्र और पंचरात्र शास्त्र की बारीकियों को ध्यान में रख कर बनाया गया है। साथ ही यह मंदिर पांच भागों में विभाजित भी है।

वासोना लॉयन सफारी, दादरा और नागर हवेली
वासोना लॉयन सफारी, इस क्षेत्र के प्रमुख पर्यटक आकर्षणों में से एक माना जाता है जो दादर और नागर हवेली की राजधानी सिलवासा से लगभग 10 किमी. की दूरी पर स्थित है। यह सफारी, वन्यजीव अभयारण्य के 92 हेक्टेयर के कुल क्षेत्र में से 25 हेक्टेयर के क्षेत्र को कवर करता है। इस प्रकार, यह दादरा और नागर हवेली की वन्यजीव अभयारण्य का एक भाग है और यह एक दीवार के भीतर बना हुआ है। इस लॉयन सफारी पार्क को एशियाई शेरों या पेन्थरों लियो की रक्षा के लिए बनाया गया था। एक सात मीटर की चैन लिंक खाड़ी को घुसपैठ रखने के लिए निर्धारित किया गया है। इस सफारी में तीन किमी. तक सफारी वाहनों से सैर की जा सकती है।

नागोआ तट, दीव
नागोआ तट का नाम नागोआ से लिया गया है जो भूछारवाड़ा गांव की मछली पकड़ने की जगह है। दीव से 20 मिनट की ड्राइव पर यह समुद्र तट स्थित है। यह एक अर्द्ध - परिपत्र यानि सेमी सर्कुलर समुद्र तट है जो घोड़े की नाल के आकार का है। यह तट एक छोर से दूसरे छोर तक लगभग 2.5 किलोमीटर की दूरी पर फैला हुआ है। यह समुद्र तट एक अलग जगह स्थित है जहां कोई शोर - शराबा नहीं है। यहां का वातावरण बेहद शांत और सौम्य है। लहराते पेड़ एक आनंदमयी माहौल बना देते है, शहर के थके - हारे लोग यहां के शोररहित, तनाव से दूर एक फ्रेश वातावरण में अच्छा समय बिताते है और अपनी छुट्टियों को आदर्श बनाते है।

अरिकामेडु, पांडिचेरी
अरिकामेडु, मोरटाइमर व्हीलर द्वारा 1940 में की गई सबसे महंगी पुरातात्विक खुदाइयों में से एक है। इस खुदाई में यह पता चला कि अरिकामेडु चोला वंश की प्राचीन बंदरगाह था जहाँ चोला और रोम के लोगों के बीच व्यापार होता था। रोमन सभ्यता के सबूत इस जगह की गई खुदाई में मिले मिट्टी के बर्तनों के रूप में देखे जा सकते हैं। रोमन साम्राज्य के मिट्टी के बर्तनों के महान स्कूलों के निशान वाले बर्तन अरिकामेडु में पाए गए थे। अरिकामेडु मोती बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र था। ऐसा माना जाता है कि अरिकामेडु में लोग पहली शताब्दी से पहले से बसे हुए थे।

कल्पेनी द्वीप, लक्षद्वीप
भारत की भूमि पर स्थित और कोचीन के तट से लगभग एक सौ पचास मील की दूरी पर कल्पेनी एक छोटा सा द्वीप है , जो केवल 2.8 वर्ग किलोमीटर का है। यह उत्तर-दक्षिण गठबंधन द्वीप मुख्य रूप से अपने सुंदर 2.8 किलोमीटर चौड़े लैगून के लिए जाना जाता है । कलपेनी सबसे ज्यादा प्रसिद्ध अपने टिप बीचों के लिए है, जिसपर आप सफ़ेद रेतीला समुन्द्र तट साफ़ पानी और रंगीन लैगून देखेंगे । ये जगह पानी में गोता लगाने वालों के लिए सर्वोत्तम स्थान है । यहाँ प्रायः दोपहर में लोगों को श्वास नली लगाये हुए डाइविंग करते हुए देखा जा सकता है। यहाँ ये भी कहा जाता है की यदि आपने यहाँ गोता नहीं लगाया तो आपने कुछ नहीं किया।



Click it and Unblock the Notifications











