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अहमदाबाद में मुगल सुल्तान का बनवाया किला हिंदू मंदिर के नाम पर हुआ प्रसिद्ध, क्या है 'भद्रा' किले का इतिहास?

अहमदाबाद में घूमने की काफी जगहों के बारे में आपने सुना होगा - साबरमती रिवर फ्रंट, साबरमती आश्रम, जैन मंदिर, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी। आपने गौर किया है कि इन सभी जगहों के नाम ही इनकी पहचान बन गये हैं। इनका नाम सुनते ही हमारे दिमाग में इन जगहों की एक तस्वीर उभर आती है जो काफी हद तक वास्तविकता से मेल भी खाती है। लेकिन...

आज हम आपको अहमदाबाद में ही मौजूद एक ऐसे किले के बारे में बताने वाले हैं जिसका निर्माण तो एक मुगल सुल्तान ने करवाया था लेकिन इस किले को पहचान एक हिंदू मंदिर के नाम से मिली। सिर्फ इतना ही नहीं, इस किले का इतिहास भी उतना ही पुराना बताया जाता है जितना पुराना अहमदाबाद शहर का इतिहास है।

जी हां, हम बात कर रहे हैं अहमदाबाद में स्थित 'भद्रा' किले (Bhadra Fort) की। यह किला लगभग 43 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है।

कब बना और अहमदाबाद से कैसे जुड़ा है इसका इतिहास?

'भद्रा' किले का इतिहास उतना ही पुराना बताया जाता है जितना पुराना अहमदाबाद शहर का इतिहास है। यकीन नहीं हो रहा है न...अहमदाबाद के जीजाबाई मार्ग पर स्थित लाल दरवाजा के पास मौजूद है 'भद्रा' किला। गुजरात टूरिज्म के आधिकारिक वेबसाइट से मिली जानकारी के अनुसार इस किले का निर्माण वर्ष 1411 के आसपास शुरू हुआ था। यहीं वह समय था अहमदाबाद को भी एक शहर के रूप में स्थापित किया गया था। उस समय इस किले का द्वार अहमदाबाद का पूर्वी द्वार हुआ करता था, जो पश्चिम में नदी के तट तक फैला हुआ था।

पूर्व दिशा में इस किले से तीन दरवाजा (किले के द्वार) के बीच का स्थान उस वक्त शाही मैदान हुआ करता था, जहां सुल्तान की शाही जुलूस निकलती थी और पोलो का खेल खेला जाता था। कहा जाता है कि बाबा मानेकनाथ भद्रा किले के निर्माण के खिलाफ थे, लेकिन इसके बावजूद किले की दीवारों का निर्माण हो चुका था। एक रात को अचानक किले की दीवार ढह जाती है।

सुल्तान अहमद शाह को अंदाजा था कि इसके पीछे बाबा मानेकनाथ का हाथ है। सुल्तान ने बाबा मानेकनाथ को चुनौती दी और अपना चमत्कार साबित करने के लिए, उसने संत को एक घड़े में प्रवेश करने के लिए राजी कर लिया। कहा जाता है कि जैसे ही घड़े के अंदर गये उन्हें घड़े के अंदर बंद कर दफना दिया गया। जिसके बाद इस किले का निर्माण पूजा हो सका।

क्या है इस नाम के पीछे का रहस्य?

अहमदाबाद के 'भद्रा' किले की स्थापना वर्ष 1411 के आसपास तत्कालिन मुगल सुल्तान अहमद शाह ने की थी। किले में सुल्तान के रहने के लिए कमरे, दरबार बनवाए गये थे। इसके अलावा मुगल शैली में ही बराम्दों का निर्माण भी किया गया था, जहां के झरोखों के पीछे शाही परिवार की महिलाएं हुआ करती थी। मेहमानों का दिल बहलाने के लिए किले के अंदर बगीचे बनाए गये थे, जिसमें कई तरह के फूल और पौधें भी लगे होते थे। लेकिन क्या आपको पता है मुगल सुल्तान अहमद शाह द्वारा बनवाए गये इस किले का नाम 'भद्रा' किला क्यों रखा गया?

दरअसल, इस किले के पास ही मां भद्रकाली का एक मंदिर है। इस किले को नाम मां भद्रकाली के इस मंदिर से ही पहचान मिली। कहा जाता है कि अहमदाबाद शहर की सुरक्षा की जिम्मेदारी देवी भद्रकाली पर ही है। मिली जानकारी के अनुसार किले के पास इस मंदिर का निर्माण आजम खान के समयकाल में किया गया था। हालांकि इस किले का नाम भद्रकाली मंदिर के नाम पर रखने के बारे में किसने सोचा, इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस किले को आर्क किला के नाम से भी पहले जाना जाता था लेकिन आज यह किला 'भद्रा' किला के नाम से ही मशहूर है।

अंग्रेजों ने बनाया था इसे जेल

वर्ष 1817 में जब भारत में आजादी की आग का सुगलना शुरू हुआ था, उस समय इस किले पर ब्रिटिश हुकूमत ने अपना कब्जा जमा लिया था। भारत को आजादी मिलने तक अंग्रेजों ने इस किले का इस्तेमाल एक जेल के तौर पर किया था, जिसमें खतरनाक अपराधियों के साथ-साथ आजादी की लड़ाई लड़ रहे ढेरों स्वतंत्रता सेनानियों को भी कैद करके रखा जाता था। साल 2014 में इस किले का पुनर्विकास किया गया और उसी समय से इसे आम लोगों के लिए खोल दिया गया ताकि लोग यहां न सिर्फ अहमदाबाद बल्कि आजादी से जुड़े इतिहास को भी करीब से जान और समझ सकें।

वर्तमान में इस किले के पास मां भद्रकाली का वह मंदिर आज भी विद्यमान है। इस किले में आज गुजरात सरकार का ऑफिस, पोस्ट ऑफिस और आर्कियोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया का एक ऑफिस भी मौजूद है। हर साल स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर इस किले पर तिरंगा फहराया जाता है।

कैसे पहुंचे 'भद्रा' किला?

'भद्रा' किला अहमदाबाद के जीजाबाई मार्ग पर लाल दरवाजा के पास मौजूद है। यहां पहुंचने के लिए स्वामी विवेकानंद रोड से दाएं मुड़कर जीजाबाई रोड पर आना होगा। अहमदाबाद रेलवे, फ्लाईट और बस से देश के दूसरे शहरों से बहुत अच्छी तरह ही जुड़ा हुआ है। इसलिए अहमदाबाद पहुंचने में कोई भी परेशानी नहीं होती है। एयरपोर्ट, बस स्टैंड अथवा रेलवे स्टेशन से बाहर निकलकर 'भद्रा' किला जाने के लिए आपको किराए पर गाड़ियां आसानी से मिल जाएंगी।

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