साबरमती आश्रम, गुजरात के अहमदाबाद में साबरमती नदी के तट पर बसा यह आश्रम महात्मा गांधी का घर कहलाता है। यह आश्रम आजादी की न जाने कितनी लड़ाईयों और बलिदानों का साक्षी रहा है। इस आश्रम का हर एक कोना महात्मा गांधी और स्वतंत्रता संग्राम की याद दिलाता है। इस आश्रम से किसी दिन महात्मा गांधी ने यह कसम खाते हुए अपने कदम बाहर रखें थे कि अब देश को आजादी दिलाने के बाद ही यहां वह फिर से कदम रखेंगे। लेकिन ऐसा न हो सका।
महात्मा गांधी के प्रयासों ने देश को आजादी तो दिला दी लेकिन इसके बावजूद महात्मा गांधी यहां वापस लौट कर कभी नहीं आ सकें। क्यों हुआ ऐसा?

कब और क्यों रखी गयी थी साबरमती आश्रम की नींव?
साल 1915 में जब साउथ अफ्रीका से महात्मा गांधी भारत वापस लौटे तो अहमदाबाद के कोचरब क्षेत्र में उन्होंने अपना आश्रम बनाया। साबरमती नदी के किनारे बनाया गया यह आश्रम बंजर जमीन पर बनाया गया था। महात्मा गांधी लंबे समय तक इसी घर में रहे और इस आश्रम के आसपास ही वह खेतीबाड़ी और पशुपालन आदि किया करते थे। वर्ष 1930 में इसी आश्रम से आजादी की लड़ाई शुरू हुई। कालांतर में साबरमती नदी के किनारे बना यह आश्रम ही साबरमती आश्रम कहलाया।
शुरू हुई थी सत्याग्रह की लड़ाई
साबरमती आश्रम से ही महात्मा गांधी ने सत्याग्रह आंदोलन की शुरुआत की थी। दरअसल, साबरमती आश्रम को एक ऐसे संस्थान के रूप में विकसित किया गया था जो अहिंसक कार्यकर्ताओं को एकत्र करें और भारत की आजादी की लड़ाई में अपना योगदान दें। गांधी जी ने साबरमती आश्रम में ही एक पाठशाला की शुरुआत की थी, जहां वह लोगों को खेतीबाड़ी और आत्मनिर्भर बनने का प्रशिक्षण दिया करते थे।

12 मार्च 1930 को गांधी जी ने साबरमती आश्रम से ही 241 मील लंबी दांडी मार्च यात्रा शुरू की थी। गांधी जी ने अपने 78 सहयोगियों के साथ अंग्रेजों के नमक कानून को तोड़ने के लिए दांडी मार्च की शुरुआत की थी।
गांधी जी फिर कभी वापस नहीं लौटे साबरमती आश्रम
सत्याग्रह आंदोलन को रोकने के लिए जब अंग्रेजों ने सभी सत्याग्रहियों को जेल में डालकर उनकी संपत्ति जब्त कर ली तो गांधी जी ने भी अंग्रेजों से साबरमती आश्रम को जब्त कर लेने के लिए कहा। लेकिन अंग्रेज अधिकारियों ने ऐसा नहीं किया। इसके बाद ही गांधी जी ने कसम खायी की भारत को आजादी दिलाने के बाद ही वह साबरमती आश्रम वापस लौटेंगे। लेकिन भारत के आजाद होने के बावजूद ऐसा नहीं हो सका।
दरअसल, 15 अगस्त 1947 को भारत को आजादी मिली, लेकिन भारत उस समय बंटवारे की आग में जल रहा था। इसके कुछ महीनों बाद ही 30 अगस्त 1948 को नाथुराम गोडसे ने महात्मा गांधी की गोली मार कर हत्या कर दी। इसलिए वह फिर कभी साबरमती आश्रम वापस नहीं लौट सकें।

साबरमती आश्रम में क्या-क्या देखें
साबरमती आश्रम में मगन निवास, हृदय कुंज, गांधी स्मारक संग्रहालय, विनोभा मीरा कुटी, उद्योग मंदिर, सोमनाथ छात्रालय, उपासना मंदिर आदि कुछ प्रमुख खंड हैं, जहां आप घूमने और इतिहास को देखने जा सकते हैं। इसके अलावा 'मेरा जीवन मेरा संदेश' गैलरी में महात्मा गांधी से जुड़े 250 से अधिक तस्वीरें देख सकते हैं।
यहां के पुस्तकालय और अभिलेखागार में गांधी जी की डायरी को बड़े ही जतन से रखा गया है, जिसे आप देख सकते हैं। अगर यादगार के तौर पर कुछ खरीदना चाहे तो आप यहां से किताबें, पोस्टकार्ड, चरखा मॉडल, चाभी रिंग, स्टेशनरी, मूर्तियां आदि भी खरीद सकते हैं।

कैसे पहुंचे साबरमती आश्रम
साबरमती आश्रम अहमदाबाद से मात्र 8 किमी की दूरी पर है। भारत के किसी भी कोने से ट्रेन, बस या विमान द्वारा आप अहमदाबाद पहुंच सकते हैं। अहमदाबाद से साबरमती आश्रम जाने के लिए किराए पर आपको गाड़ियां या टैक्सी आसानी से मिल जाएंगी। अगर आप किराए पर गाड़ियां ले रहे हैं तो मोल-भाव अच्छी तरह से जरूर कर लें।



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