इस साल दिवाली के पहले से लेकर पूरे नवंबर महीने के दौरान देश में सबसे ज्यादा चर्चाएं दिल्ली में वायु की गुणवत्ता के सूचकांक (AQI) की रही। लेकिन वायु की गुणवत्ता सिर्फ दिल्ली में ही खराब नहीं हुई थी। अहमदाबाद में भी वायु प्रदूषण का स्तर काफी ज्यादा रहा है। 40 दिनों से ज्यादा समय से अहमदाबाद का AQI लगातार 100 के ऊपर बना रहा जो अमदावादियों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रहा था।
लेकिन अब अहमदाबादवासी ताजी हवा के लिए एयर प्यूरिफायर खरीदने के लिए नहीं बल्कि ऑक्सीजन पार्क की तरफ दौड़ लगाएंगे। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमीत शाह ने सिंधुभवन रोड पर एक ऑक्सीजन पार्क का उद्घाटन किया था। अब बतौर अर्बन फॉरेस्ट (Urban Forest) अहमदाबाद में बनाया जा रहा है दूसरा ऑक्सीजन पार्क। कहां? क्या होगी इसकी विशेषताएं?

कई शहरों में बनाए जा रहे हैं पार्क
जब भी कोई शहर वायु प्रदूषण की मार से जुझ रहा होता है, तब वहां पेड़ों की जरूरत सबसे ज्यादा महसूस होने लगती है। ताजी हवा के लिए अब लोग घरों में एयर प्यूरिफायर तक लगवाने लगे हैं। लेकिन कृत्रिम एयर प्यूरिफायर के मुकाबले पर्यवरण पर अच्छा प्रभाव प्राकृतिक एयर प्यूरिफायर यानी के पेड़ डालते हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए गुजरात के कई शहरों में अहमदाबाद की तरह ऑक्सीजन पार्क बनाए जा रहे हैं जिनमें शामिल हैं -
- सूरत
- वडोदरा
- राजकोट
- भावनगर
- जामनगर
- जुनागढ़
इस शहरों में पार्क को बनाने का मुख्य उद्देश्य शहर में हवा की गुणवत्ता में सुधार के साथ ही लोगों को मनोरंजन, योग-व्यायाम और जॉगिंग आदि के लिए भी विकल्प उपलब्ध करवाना है। ये पार्क ऐसी जगह होते हैं जहां बुजूर्ग अपने हमउम्र दोस्तों के साथ गप्पे मार सकते हैं, महिला मंडली आपस में बैठकर बाते कर सकती हैं, बच्चे खेल सकते हैं और अगर युवा चाहे तो यहां बैठकर ऑफिस के हल्के-फुल्के काम भी निपटा सकते हैं।

अहमदाबाद में कहां बनेगा ऑक्सीजन पार्क?
अहमदाबाद का पहला ऑक्सीजन पार्क सिंधुभवन रोड पर बनाया गया है जिसका पिछले दिनों ही गृहमंत्री ने उद्घाटन किया। मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार अब अहमदाबाद के त्रैगाड (Tragad) में नए ऑक्सीजन पार्क को बनाने का फैसला लिया गया है। सिंधु भवन रोड में बनाया गया ऑक्सीजन पार्क लगभग 27,000 वर्ग मीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है जिसमें 1.67 लाख पेड़ और पौधों को लगाया गया है।
वहीं नया ऑक्सीजन पार्क 24,000 वर्ग मीटर के क्षेत्र में बनाया जाएगा जिसमें 75000 पेड़-पौधे लगाएं जाएंगे। इसके अलावा अहमदाबाद के हेबतपुर में साइंस सिटी के पास भी 4000 वर्ग मीटर के क्षेत्र में एक पार्क बनाया गया है जिसमें 12,000 पेड़ और पौधे लगाए गये हैं।
राजकोट में जो ऑक्सीजन पार्क बनाया गया है उसमें 150 प्रजातियों के पेड़-पौधों को लगाया गया है। वहीं उपालेटा में 5 छोटे-छोटे पार्क को बनाया जा रहा है, जिसमें स्थानीय लोग भी भरपूर समर्थन दे रहे हैं। कच्छ में लायनंस अस्पताल की तरफ से एक पार्क बनाया गया है जिसमें 3600 से ज्यादा पेड़ों को लगाया गया है।

क्या होंगी ऑक्सीजन पार्क की खासियतें?
जैसा कि हमने पहले ही बताया है, इन सभी शहरों में ऑक्सीजन पार्क या ऐसे पार्क को Urban Forest के तौर पर बनाया जा रहा है, जहां कई प्रजातियों के पेड़-पौधे लगाएं जाएंगे। घनी हरियाली होने की वजह से ये पेड़ काफी मात्रा में ऑक्सीजन का उत्सर्जन करेंगे। इन सभी पार्क में पैदल चलने या जॉगिंग आदि करने वाले लोगों की सुविधा के लिए पैदल मार्ग बनाए जा रहे हैं।
पार्क में योग करने, पक्षियों आदि को खेलते हुए देखने, उन्हें दाना देने के लिए भी जगहें बनायी जा रही हैं जो रोजमर्रा की भागदौड़ के बीच लोगों की मानसिक थकान को कम करने में मददगार साबित होगा। इन सभी पार्क को शहरी क्षेत्रों के आसपास ही बनाया जा रहा है, जिससे प्रदूषण को कम करने के साथ-साथ शहरी इलाकों को ठंडा करने और जैव विविधता को भी अपना समर्थन प्रदान करेंगे।



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