जरा सोचिए...परिवार या दोस्तों के साथ किसी रेस्तरां में खाना खाने जाते हैं। सब साथ मिलकर स्वादिष्ट Unlimited खाना खाते हैं और अपनी मर्जी से कुछ भी बिल चुकाकर घर वापस लौट आने का मौका मिले तो कैसा रहे! या स्वादिष्ट Unlimited खाना आप और आपके दोस्त खाते हैं लेकिन आपको अपना बिल न चुकाकर उस रेस्तरां में आने वाले अगले ग्राहक का चुकाना पड़े...!
क्योंकि आपका बिल तो आपसे पहले वाले गेस्ट या ग्राहक ने चुका दिया था। चकरा गये न। ऐसा ही होता है गुजरात के अहमदाबाद के इस अनोखे रेस्तरां में।

इस रेस्तरां का नाम है 'सेवा कैफे' (Seva Cafe)। किसी भी आम रेस्तरां की तरह ही इस रेस्तरां में भी आप मेन्यू देखकर अपने लिए खाना ऑर्डर कर सकते हैं। खाना अनलिमिटेड मिलेगा। लेकिन इस रेस्तरां को जो चीज सबसे अलग व अनोखा बनाता है, वह है यहां बिल चुकाने का अंदाज।
क्या है सेवा कैफे का फंडा?
आज के समय में जहां पूरी दुनिया के लोग बस मुनाफा कमाने के चक्कर में फंसे रहते हैं। मुनाफा कमाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाते हैं। वहीं सेवा कैफे पूरी तरह से सेवा भाव पर आधारित है। इस रेस्तरां में काम करने वाला हर व्यक्ति सेवा भाव को ही अपना धर्म मानता है। पिछले लगभग 15 सालों से यह रेस्तरां अपने अनोखेपन के साथ अहमदाबाद में चल रहा है। यह रेस्तरां पूरी तरह से Gift Economy पर चल रहा है।

क्या है Gift Economy?
Gift Economy के तहत आपके खाने का बिल आपसे पहले किसी और व्यक्ति ने बतौर उपहार चुका दिया है। जी हां, आपके खाने से पहले ही आपके खाने का बिल इस रेस्तरां में कोई अंजान चुका कर जा चुका होता है। इस पॉलिसी के तहत यहां खाना खाने वाला हर ग्राहक अपने बाद यहां आने वाले दूसरे ग्राहकों (भले ही वह कोई अंजान व्यक्ति ही क्यों न हो) का बिल अपनी मर्जी से चुका कर जाता है। इस तरह से यहां आपके खाने का बिल आपसे पहले वाले किसी ग्राहक ने और आपने खाना खाने के बाद अपने बाद आने वाले किसी ग्राहक का बिल चुकाया।
कैसे चुकाया जाता है बिल?
किसी भी आम रेस्तरां की तरह जब आप इस रेस्तरां में जाते हैं तो आपको मेन्यू दिया जाता है, जिससे देखकर आप अपनी पसंद का खाना ऑर्डर करते हैं। खाना सही समय पर आपकी टेबिल पर सर्व भी किया जाता है। खाना खाने के बाद जब बिल चुकाने की बारी आती है तो आपके सामने एक लिफाफा रख दिया जाता है। अब आपको अपनी मर्जी से उस लिफाफे में रुपए भरकर अपने बाद आने वाले किसी ग्राहक का बिल चुकाना होता है। यहीं प्रक्रिया हर ग्राहक के साथ दोहरायी जाती है, जो सालों से लगातार चली आ रही है।

एनजीओ चलाती है कैफे
सेवा सदन कैफे का संचालन मानव सदन और स्वच्छ सेवा सदन एजीओ द्वारा किया जाता है। पिछले लगभग 15 सालों से यह कैफे पे-फॉर्वर्ड या Gift Economy मॉडल पर चल रही है। इस कैफे में काम करने वाले लोग भी वॉलेंटियर ही होते हैं। छात्र, प्रोफेशनल और यहां तक कि कई बार पर्यटक भी इस कैफे में अपनी मर्जी से सेवाभाव के तहत काम करते हैं।
यहां हर किसी को उनकी मर्जी और हुनर के आधार पर ही काम दिया जाता है। अगर किसी को कुकिंग का शौक है तो वह खाना पका सकता है, अगर किसी को बर्तन धोना है तो वह बर्तन धो सकता है या कोई टेबिल पर खाना सर्व करना चाहता है तो उसे वहीं काम दिया जाता है। सीधे शब्दों में कहा जा सकता है कि सेवा कैफे पूरी तरह से 'अतिथि देवो भवः' के भाव के साथ ही चलता है।
कब खुलता है कैफे?
अहमदाबाद का सेवा कैफे हर गुरुवार से रविवार तक शाम 7 बजे रात को 10 बजे तक खुला रहता है। या शाम 7 बजे से जब तक 50 गेस्ट पूरे न हो जाएं, तब तक यह कैफे खुला रहता है। यानी हर दिन सेवा कैफे 50 ग्राहकों (गेस्ट) के लिए खुलता है। महीने के अंत में आमदनी और खर्च का पूरा हिसाब-किताब किया जाता है। जो मुनाफा होता है, उसे चैरिटी फंड में डाल दिया जाता है।
पता : सेवा कैफे, चौथा फ्लोर, शॉपर्स प्लाजा, चिमनलाल गिरधरलाल रोड, म्यूनिसिपल मार्केट के विपरित।



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