Search
  • Follow NativePlanet
Share
» »ऐतिहासिक अलची मॉनेस्ट्री के पर्यटन स्थल हैं लेह की शान

ऐतिहासिक अलची मॉनेस्ट्री के पर्यटन स्थल हैं लेह की शान

अलची मॉनेस्ट्री, अलची गांव का एक हिस्सा है, जो जम्मू और कश्मीर के लेह जिले से 70 किलोमीटर दूर है। लद्दाख के अन्य स्थानों की तुलना में अलची में तुलनात्मक रूप से अधिक हरियाली है।

कभी जन्नत के नज़ारे लेने का मन करे तो लद्दाख से बेहतर और क्या हो सकता है? लद्दाख की वादियों में कुछ पल सुकून के गुज़ारने का मन तो सभी का होता है। आपको बता दें कि लद्दाख के निचले हिस्से में, अलची नाम का एक खूबसूरत गाँव है, जिसमें सदियों पुराने स्मारक हैं। इन स्मारकों में से, अलची मॉनेस्ट्री सबसे पुरानी है और ये एक अच्छी जगह है अपने परिवार के साथ छुट्टियां बिताने के लिए। यहां देखने कि लिए बहुत कुछ है जो पर्यटकों के दिल में हमेशा के लिए एक अच्छी याद के रूप में घर सर जाएगा।

दुखांग

दुखांग

ये वो जगह है जहां से मंजुश्री मंदिर में प्रवेश किया जाता है और भिक्षु, पूजा और अनुष्ठान करते हैं। मंदिर की क्लासिक वास्तुकला मूल लकड़ी के चौखट से बनी है और इसे अभी भी बरकरार रखा गया है। बाद में 12 वीं और 13 वीं शताब्दी में, कुछ जोड़ भी किया गया। दुखांग का लैंडमार्क व्हील ऑफ लाइफ और महाकाल है।

सुमत्सेग

सुमत्सेग

PC:Ranzen

अलची के सबसे खूबसूरत पर्यटन स्थलों में से एक है सुमत्सेग मॉनेस्ट्री। सुमत्सेग सिर्फ प्राकृतिक मिट्टी और पत्थर से बनी है। और ये कितनी मज़बूत है, इसका अंदाज़ा आप इसी से लगा सकते हैं कि ये आज भी अस्तित्व में है। सदियों पुरानी इस मॉनेस्ट्री में हस्त कलाएं और पेंटिंग भी शामिल हैं, जो कश्मीरी कलाकारों द्वारा बनाई गई हैं। मॉनेस्ट्री का ये भाग 13वी शताब्दी में बना था। इसके अलावा जो चीज़ पर्यटकों को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है वो है कि यहां इसकी सुंदरता को और बढ़ाते हुए बुद्ध के जीवन को दर्शाने वाले टेक्सटाइल प्रिंट।

मंजुश्री मंदिर

मंजुश्री मंदिर

सुमत्सेग और सुमाडा विधानसभा हॉल की तुलना में, मंजुश्री मंदिर जिसे ​​जंपे लखांग के नाम से भी जाना जाता है, लगभग 1225 ए.डी. में अस्तिव में आया। सुमत्से की तरह, यहां भी एक पेंटिंग हैं लेकिन वो प्राकृतिक नहीं हैं। इसके बाईं ओर का मंदिर - इसके पिछले भाग में लोबसाव या लोत्सवा मंदिर है। इस शानदार मंदिर के दर्शन करना श्रृद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी एक बेहतीरन अनुभव होगा।

कैसे पहुंचे अलची?

कैसे पहुंचे अलची?

अलची मॉनेस्ट्री, अलची गांव का ही एक हिस्सा है। अलची लेह से 70 किमी दूर जम्मु-कश्मीर का एक जिला है। यहां तक पंहुचने के लिए आप लेह से टैक्सी या कोई भी पब्लिक यातायात का सहारे अलची तक आसानी से पहुंच सकते हैं।


किस मौसम में जाएं अलची?


अलची को मौसम संबंधित बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। सर्दियों में यहां जमा देने वाली ठंड पड़ती है। तो वहीं गर्मियों में यहां खुशनुमा मौसम रहता है। यहां पूरे साल बारिश भी होती रहती है और गर्मियों में रात में तापमान गिर जाता है। अलची जाने का सबसे सही समय जून से सितंबर के बीच का है।

अलची के आस-पास देखने वाले चीजें

अलची के आस-पास देखने वाले चीजें

अगर कभी आपको अलची मॉनेस्ट्री देखने के बाद समय मिलता है, तो आस-पास के कुछ आकर्षणों का दौरा कर सकते हैं जैसे, लेह से 5 किमी दूर लिकिर मॉनेस्ट्री , स्पितुक मॉनेस्ट्री जो लेह से 18 किमी दूर है और लेआंग से फिएंग मॉनेस्ट्री लेह से 17 किलोमीटर दूर हैं।


अलची मॉनेस्ट्री देखने का समय


अलची मॉनेस्ट्री देखने जाने का समय दो भागों में विभाजित है। पर्यटकों के लिए प्रवेश यहां सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक रहता है। इसके बाद पर्यटकों के लिए प्रवेश 1 घंटे के लिए बंद कर दिया जाता है। दोपहर 2 बजे से दोबारा पर्यटकों के लिए प्रवेश शुरु हो जाता है। मॉनेस्ट्री में पर्यटकों के लिए प्रवेश शाम 6 बजे बंद हो जाते हैं। अलची मॉनेस्ट्री में हफ्ते के सातों दिन प्रेवश किया जा सकता है, ये हफ्ते के किसी भी दिन बंद नहीं होती।


अलची मॉनेस्ट्री में प्रवेश करने की टिकट


अलची मॉनेस्ट्री में प्रवेश करने की टिकट भारतीय पर्यटकों के लिए 25 रुपये और विदेशी पर्यटकों के लिए 50 रुपये है।

More News

    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+