अमरनाथ यात्रा 2026 की आध्यात्मिक शुरुआत आज पारंपरिक 'प्रथम पूजा' के साथ हो गई है। इस रस्म के साथ ही पवित्र गुफा के दर्शन का इंतजार कर रहे हजारों श्रद्धालुओं के लिए काउंटडाउन शुरू हो गया है। 19 जून को पवित्र गुफा में यह विशेष पूजा संपन्न हुई। बता दें कि मुख्य तीर्थयात्रा 3 जुलाई से शुरू होगी और इस साल 28 अगस्त को समाप्त होगी।
आज की रस्म 57 दिनों तक चलने वाले इस वार्षिक तीर्थयात्रा सीजन की तैयारियों का संकेत है। सुरक्षा बल पहाड़ी रास्तों पर अपनी अंतिम रिहर्सल (मॉक ड्रिल) कर रहे हैं, वहीं अधिकारी सुरक्षा के लिहाज से बेस कैंपों की निगरानी में जुटे हैं। श्रद्धालुओं के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) टैग साथ रखना अनिवार्य है। इन टैग्स की मदद से प्रशासन रियल-टाइम में यात्रियों की लोकेशन ट्रैक कर सकेगा।

अमरनाथ यात्रा 2026: रजिस्ट्रेशन और रूट के विकल्प
श्रद्धालुओं को अपनी यात्रा से कम से कम सात दिन पहले रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (SASB) ऑनलाइन आवेदन के लिए आधिकारिक पोर्टल का संचालन करता है। यात्रा के लिए अधिकृत डॉक्टर से अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाणपत्र (CHC) लेना जरूरी है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आप अधिक ऊंचाई पर यात्रा करने के लिए फिट हैं। सुरक्षा कारणों से इसमें उम्र की सीमा भी तय की गई है, जिसके तहत 13 साल से कम उम्र के बच्चों का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जा सकता।
यात्री अपनी सुविधा के अनुसार बालटाल या पहलगाम मार्ग चुन सकते हैं। बालटाल का रास्ता छोटा है, लेकिन यहां चढ़ाई काफी खड़ी है। वहीं, पहलगाम पारंपरिक मार्ग है जिसमें पहुंचने में कई दिन लगते हैं, लेकिन यहां चढ़ाई धीरे-धीरे और आसान होती है। दोनों ही रास्तों पर सुबह जल्दी निकलना जरूरी है। बेस कैंप से निकलने से पहले मौसम का पूर्वानुमान जरूर चेक कर लें।
| खासियत | पहलगाम मार्ग | बालटाल मार्ग |
|---|---|---|
| दूरी | 36 से 48 किलोमीटर | 14 किलोमीटर |
| समय | 3 से 5 दिन | 1 से 2 दिन |
| कठिनाई | मध्यम चढ़ाई | बेहद खड़ी चढ़ाई |
जो लोग पैदल यात्रा करने में असमर्थ हैं, उनके लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं भी उपलब्ध हैं। इनकी बुकिंग आमतौर पर आधिकारिक वेबसाइट पर काफी पहले शुरू हो जाती है। आप बालटाल या पहलगाम से पवित्र गुफा तक के लिए उड़ान भर सकते हैं। श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे रात में रुकने के लिए निर्धारित कैंपों में ही बुकिंग करें, जहां खाने-पीने और चिकित्सा की बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध रहती हैं।
अमरनाथ यात्रा 2026: मौसम और सुरक्षा अपडेट
जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे (NH44) सभी यात्रियों के आने-जाने के लिए मुख्य मार्ग बना हुआ है। हर श्रद्धालु की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारी सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। पहाड़ी रास्तों पर अचानक बारिश की वजह से अक्सर यात्रा को कुछ समय के लिए रोकना पड़ता है। इसलिए अपने साथ हमेशा गर्म कपड़े और वाटरप्रूफ गियर (रेनकोट आदि) रखें। सुरक्षा के लिहाज से काफिले की आवाजाही के दौरान आधिकारिक निर्देशों का पालन करें।
एक सफल आध्यात्मिक यात्रा के लिए पहले से प्लानिंग करना सबसे जरूरी है। मौसम के लाइव अपडेट के लिए श्राइन बोर्ड के आधिकारिक ऐप का उपयोग करें। यात्रा के दौरान किसी भी आपात स्थिति के लिए हेल्पलाइन नंबर अपने पास रखें। यह पवित्र यात्रा आत्मिक शांति और आध्यात्मिक अनुभव का एक अनूठा अवसर है। आखिरी समय की भीड़ और परेशानी से बचने के लिए अपनी बुकिंग जल्द से जल्द पूरी कर लें।



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