अमरनाथ यात्रा का आगाज़ हो चुका है। 2 जुलाई की सुबह ठीक 4 बजे जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप से श्रद्धालुओं का पहला जत्था रवाना हुआ। सुरक्षा बलों की कड़ी निगरानी में यह बड़ा काफिला अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहा है। इसी के साथ भक्तों की 52 दिनों तक चलने वाली यह आस्था की यात्रा शुरू हो गई है। फिलहाल, पहला ग्रुप कश्मीर के बेस कैंप्स की ओर बढ़ रहा है।
सुबह तड़के काफिला निकलने की वजह से नेशनल हाईवे-44 (NH-44) पर ट्रैफिक की रफ्तार पर असर पड़ा है। अगर आप आज जम्मू, उधमपुर या रामबन के रास्ते सफर कर रहे हैं, तो रूट डायवर्जन का सामना करना पड़ सकता है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खास 'कॉन्वॉय विंडो' तय की गई है। आम मुसाफिरों को सलाह दी जाती है कि वे निकलने से पहले ट्रैफिक अपडेट जरूर चेक कर लें, ताकि सुबह की भीड़ और जाम से बचा जा सके।

अमरनाथ यात्रा: काफिले का शेड्यूल और ट्रैफिक को लेकर जरूरी जानकारी
इस साल हर श्रद्धालु के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) टैग पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। आप जम्मू के तय सेंटर्स से ये टैग ले सकते हैं। इसके अलावा, श्रीनगर के सेंटर्स पर भी रजिस्टर्ड यात्रियों को ये टैग दिए जा रहे हैं। वेरिफिकेशन के लिए अपना आधार कार्ड और यात्रा परमिट साथ रखना न भूलें। इन टैग्स की मदद से श्रद्धालुओं की लोकेशन ट्रैक की जाएगी, ताकि किसी भी इमरजेंसी में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।
अमरनाथ यात्रियों के लिए RFID टैग हुआ अनिवार्य, जानें नियम
इस सीजन में पवित्र गुफा तक जाने के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में सभी भक्तों को बालटाल या पहलगाम के रास्ते पैदल ही चढ़ाई करनी होगी। अगर आप 3 जुलाई से अपनी यात्रा शुरू करना चाहते हैं, तो आज रात तक बेस कैंप जरूर पहुंच जाएं। सुरक्षा कारणों से कैंप पहुंचने का समय (कट-ऑफ) काफी सख्त रखा गया है। पैदल चढ़ाई को देखते हुए यात्रियों का शारीरिक रूप से फिट होना अब पहले से कहीं ज्यादा जरूरी है।
| गतिविधि | शेड्यूल की जानकारी |
|---|---|
| जम्मू काफिला | 2 जुलाई, सुबह 4 बजे रवाना |
| RFID टैग कलेक्शन | जम्मू और श्रीनगर के केंद्रों पर उपलब्ध |
| पहुंचने की समय सीमा | 2 जुलाई की शाम तक (बेस कैंप) |
| पैदल यात्रा की शुरुआत | 3 जुलाई की सुबह, बालटाल या पहलगाम से |
ताजा अपडेट्स और अलर्ट के लिए श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (SASB) की आधिकारिक वेबसाइट चेक करते रहें। पहाड़ों पर मौसम तेजी से बदल सकता है, जिसका असर आज रात के ट्रेक शेड्यूल पर पड़ सकता है। ट्रांजिट कैंपों पर तैनात सुरक्षाकर्मियों के निर्देशों का पूरी तरह पालन करें। सही तैयारी के साथ ही आप अपनी इस आध्यात्मिक यात्रा को सुरक्षित और यादगार बना सकते हैं।



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