इस साल की पवित्र अमरनाथ यात्रा आधिकारिक तौर पर 3 जुलाई से शुरू होने जा रही है। अगर आप यात्रा के पहले दिन ही बाबा बर्फानी के दर्शन करना चाहते हैं, तो आज यानी 26 जून रजिस्ट्रेशन कराने का आखिरी मौका है। श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (SASB) आज रात रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया बंद कर देगा। अगर आपने अब आवेदन करने में देरी की, तो आप पहले जत्थे में शामिल होने से चूक सकते हैं। यह डेडलाइन पारंपरिक और छोटे, दोनों ही रास्तों के लिए सख्ती से लागू होगी।
हर श्रद्धालु के लिए 'अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाणपत्र' (CHC) सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है। आपको यह सर्टिफिकेट SASB की लिस्ट में शामिल अधिकृत डॉक्टरों से ही बनवाना होगा। तय तारीखों के बाद जारी किए गए सर्टिफिकेट आज स्वीकार नहीं किए जाएंगे। अपने नजदीकी सरकारी अस्पताल का पता लगाने के लिए आधिकारिक पोर्टल जरूर चेक करें। ध्यान रखें कि बिना वैलिड हेल्थ क्लीयरेंस के आपका परमिट आवेदन तुरंत रिजेक्ट कर दिया जाएगा।

अमरनाथ यात्रा: रूट का चुनाव और परमिट की डेडलाइन
श्रद्धालुओं को अपनी यात्रा के लिए बालटाल और पहलगाम में से किसी एक रूट को चुनना होगा। बालटाल रूट 14 किलोमीटर लंबा है, जो छोटा होने के साथ-साथ उन लोगों के लिए सही है जो शारीरिक रूप से पूरी तरह फिट हैं। वहीं, पहलगाम रूट थोड़ा लंबा है लेकिन इसकी चढ़ाई काफी आसान है। इस पारंपरिक रास्ते से यात्रा पूरी करने में रुक-रुक कर करीब चार दिन का समय लगता है। अपनी सेहत और ट्रेकिंग के अनुभव के आधार पर ही अपना रूट चुनें।
| खासियत | बालटाल रूट | पहलगाम रूट |
|---|---|---|
| दूरी | 14 किलोमीटर | 36 से 48 किलोमीटर |
| समय | 1 से 2 दिन | 3 से 5 दिन |
| कठिनाई का स्तर | खड़ी चढ़ाई और चुनौतीपूर्ण | आसान चढ़ाई और खूबसूरत नजारे |
अगर आप दिल्ली या जम्मू से यात्रा की प्लानिंग कर रहे हैं, तो अपने पास एक्स्ट्रा समय लेकर चलें। मानसून की बारिश की वजह से व्यस्त जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर अक्सर लैंडस्लाइड (भूस्खलन) का खतरा रहता है। इस वजह से बेस कैंप तक पहुंचने के आपके तय समय में देरी हो सकती है। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे हमेशा रिफंडेबल होटल ही बुक करें। पहाड़ों के बदलते मौसम या सुरक्षा कारणों से होने वाली देरी को देखते हुए अपने प्लान में थोड़ा लचीलापन रखना जरूरी है।
मौसम की तैयारी और जरूरी सामान की चेकलिस्ट
12,000 फीट की ऊंचाई पर मानसून के दौरान मौसम बहुत तेजी से बदलता है। श्रद्धालुओं को अपने साथ अच्छी क्वालिटी के रेन गियर और मजबूत वाटरप्रूफ ट्रेकिंग जूते रखने चाहिए। अचानक होने वाली पहाड़ी बारिश से बचने के लिए प्लास्टिक पोंचो (Ponchos) काफी हल्के और असरदार होते हैं। रात में तापमान जमा देने वाली ठंड तक गिर सकता है, इसलिए थर्मल कपड़े साथ रखना बेहद जरूरी है। अपने आईडी प्रूफ और परमिट को हमेशा वाटरप्रूफ पाउच में ही रखें।
आज अपना रजिस्ट्रेशन पूरा करने पर ही आपको रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) टैग मिल सकेगा। पूरी यात्रा के दौरान सुरक्षा और ट्रैकिंग के लिए यह टैग अनिवार्य है। अपने बैज और पास लेने के लिए तय किए गए बेस कैंप पर जल्दी पहुंचें। अगर आपकी तैयारी पूरी होगी, तो आप अपना पूरा ध्यान सिर्फ अपनी आध्यात्मिक यात्रा पर लगा पाएंगे। पवित्र गुफा की ओर आपके सफर की शुरुआत आज के इन आखिरी और जरूरी कदमों से होती है।



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