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अद्भुत : केरल के इस मंदिर की रक्षा करता है एक शाकाहारी मगरमच्छ

By Nripendra Balmiki

दक्षिण भारत के मंदिरों की विशेषता सिर्फ देव-देवता और बनाई गईं भव्य संरचनाओं तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि इनसे ढेर सारी रोचक पौराणिक कथाएं और मान्यताएं भी जुड़ी हुई हैं। भले ही वर्तमान पीढ़ी इसमें दिलचस्पी न लें पर ये सभी प्राचीन कथाएं काफी चित्तरंजक हैं। आज एक ऐसे ही मंदिर के विषय में हम आपको बताने जा रहे हैं जो दक्षिण भारत के केरल राज्य में स्थित हैं और इस मंदिर का नाम अनंतपुर लेक टेंपल है।

आपको जानकार आश्चर्य होगा कि इस मंदिर की रखवाली एक ऐसा मगरमच्छ करता है जो कभी मांस का सेवन नहीं करता, जी हां ये मगरमच्छ पूर्ण रूप से शाकाहारी है। जानिए इस खास मंदिर के अद्भुत और अनोखे राज़।  

केरल का अनंतपुर झील मंदिर

केरल का अनंतपुर झील मंदिर

PC- Kateelkshetra

ये अद्भुत और बेहद खूबसूरत मंदिर केरल स्थित कासरगोड जिले के अनंतपुर गांव में मौजूद है। यह मंदिर अनंत पद्मनाभस्वामी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। चित्र के माध्यम से आप देख सकते हैं कि यह मंदिर एक झील के मध्य बना है। पौराणिक मान्यता के अनुसार यह यह केरल का एकमात्र झील मंदिर है जहां अनंत पद्मनाभ (भगवान विष्णु) साक्षात रूप से पधारे थे।

ये झील लगभग 302 वर्ग किमी के में फैली है जिसके लगभग चारों तरफ हरे भरे घने पेड़ भी हैं। इस झील के पास देखने योग्य एक गुफा स्थान है, स्थानीय किवदंतियों के अनुसार भगवान विष्णु ने यही गुफा मार्ग तिरुवनंतपुरम जाने के लिए चुना था।

पौराणिक किवदंतियां

पौराणिक किवदंतियां

PC- Vinayaraj

जानकारी के अनुसार कुछ किवदंतियां को छोड़कर इस मंदिर का अपना इतिहास अज्ञात है। फिर भी कई पौराणिक कथाओं के द्वारा इस मंदिर के विषय में काफी ज्यादा जानकारी प्राप्त की जा सकती है। माना जाता है कि इसी स्थान पर कभी दिवाकर मुनी विल्वामंगलम ( महान तुलु ब्राह्मण ऋषि ) ने भगवान विष्णु की कठोर तपस्या की थी। तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने एक बालक के रूप में दर्शन दिया। उस बालक के मुख से दिव्य रोशनी प्रकाशित हो रही थी।

जिस वक्त दिवाकर मुनी ने उस दिव्य बालक को देखा तो वे काफी व्याकुल हो गए। उन्होंने बालक से पुछा कि 'तुम कौन हो' ? बालक ने कहा मैं मेरा नहीं है न पिता न माता न ही कोई घर बार। विल्वामंगलम ऋषि को बालक की बात सुन काफी दया आई और उन्होंने उस बालक को यहीं रहने के लिए कहा। पर बालक ने एक शर्त रखी कि अगर ऋषि उसके साथ दुर्व्यवहार करेंगे वे ये स्थान छोड़ चला जाएगा।


दरअसल भगवान विष्णु ऋषि की परीक्षा लेना चाहते थे। उस बालक ने अपनी शरारतों से ऋषि को परेशान करना शुरू किया। एक दिन शरारतों से तंग आकर विल्वामंगलम ऋषि ने बालक को डांट लगा दी। बालक उसी क्षण अपनी शर्त अनुसार वह स्थान छोड़ चला गया। जाते-जाते बालक ने कहा कि अगर मुझे ढूंढने की इच्छा जगे तो आपको अनंथनकट (Ananthankat) आना होगा। कहते हैं ऋषि कहे स्थान पर बालक को ढूंढने गए जहां उन्हें साक्षात भगवान विष्णु के दर्शन हुए। वे समझ गए थे कि वो बालक और कोई नहीं बल्कि भगवान विष्णु थे।

शाकाहारी मगरमच्छ

शाकाहारी मगरमच्छ

Vinayaraj

माना जाता है कि इस मंदिर की रक्षा एक शाकाहारी मगरमच्छ करता है, जो बिलकुल भी मांस का सेवन नहीं करता बल्कि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए प्रसाद को ही ग्रहण करता है। अभी तक इस अद्भुत जीव ने किसी को भी नुकसान नहीं पहुंचाया है। भक्त इस झील में स्नान भी करते हैं जहां यह जीव रहता है। स्थानीय लोगों के अनुसार प्राचीन समय में यहां पहली बार यह मगरमच्छ देखा गया था। वैसे यह मगरमच्छ 'बाबिआ' के नाम से जाना जाता है।

बाबिआ यहां का स्थानीय रक्षक है और भगवान का संदेशवाहक भी माना जाता है। इस मगरमच्छ को चावल का बना विशेष भोजन परोसा जाता है। अगर आप इस मंदिर के दर्शन करने आएं तो इस अद्भुत जीव को अवश्य देखें।

औषधियों से बनी मूर्तियां

औषधियों से बनी मूर्तियां

PC- Vijayakumarblathur

यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है जो झील के मध्य स्थित है। मंदिर की संरचना काफी आकर्षक है। बाहरी संरचना से अधिक ध्यान यहां का गर्भगृह खींचता है। भगवान विष्णु की मूर्ति यहीं विराजमान हैं। कहते हैं यहां जितनी भी मूर्तियां मौजूद हैं वे किसी धातु या पत्थर से नहीं बनी हैं बल्कि इनका निर्माण 70 से ज्याद विशेष औषधियों के मिश्रण से हुआ है, जिन्हें 'कादु शर्करा योगं' कहा जाता है।

कहा जाता है कि बाद में 1972 में इन मूर्तियों को पंचधातुओं में बदल दिया गया था। जानकारी के अनुसार इन मूर्तियों को वापस 'कादु शर्करा योगं' में वापस बदलने का प्रयास किया जा रहा है। यहां भगवान विष्णु पंच फन फैलाए नागों के ऊपर विराजमान हैं।

कैसे करें प्रवेश

कैसे करें प्रवेश

PC- Soorajna

अनंतपुर मंदिर केरल के कासरगोड जिले में स्थित है जहां आप तीनों मार्गों से पहुंच सकते हैं। यहां का नजदीकी हवाईअड्डा कोच्चि है जो जिले से लगभग 200 किमी की दूर पर स्थित है। रेल मार्ग के लिए आप कासरगोड रेलवे स्टेशन का सहारा ले सकते हैं। कासरगोड के अलावा आप जिले के त्रिकिपुर, चेरुवथुर, नीलेश्वर, कान्हागढ़ कुम्बला, अपप्ला और मंजेश्वर आदि स्थानों से भी रेल सेवा ले सकते हैं। आप चाहें तो यहां सड़क मार्ग से भी आ सकते हैं। बेहतर सड़क मार्गों से कासरगोड राज्य के मुख्य शहरों से अच्छी तरह हुआ है।

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