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इतिहास के कई पहलू जुड़े हैं तमिलनाडु के अत्तूर किले से

अत्तूर फोर्ट तमिलनाडु के सेलम जिले में स्थित है। इस किले का निर्माण 17वीं शताब्दी के दौरान लक्ष्मण नायक द्वारा किया गया था। इस किले पर हैदर अली, टीपू सुल्तान और अंग्रेजों द्वारा कब्जा किया गया था ।

पर्यटन के मामले में दक्षिण भारत का तमिलनाडु काफी खास माना जाता है। राज्य भ्रमण के लिए यहां देश ही नहीं बल्कि विश्व भर से पर्यटकों को आगमन होता है। परिवार या दोस्तों के साथ एक शानदार अवकाश बिताने के लिए यह दक्षिण का यह स्थल एक आदर्श विकल्प है। तमिलनाडु न सिर्फ सांस्कृतिक बल्कि प्राकृतिक और ऐतिहासिक रूप से भी काफी समृद्ध है। यहां मौजूद हिल स्टेशन, जलप्रपात, घने जंगल, नदियां, समुद्री तट, मंदिर और किले महल इस राज्य को खास बनाने का काम करते हैं।

तमिलनाडु का अपना अलग अनोखा इतिहास है, अतीत पर प्रकाश डालें तो पता चलता है कि यहां दक्षिण के कई शक्तिशाली शासक राज कर चुके हैं। उनके समय बनाई गईं ऐतिहासिक सरंचनाओं को आज भी देखा जा सकता है। इस लेख में आज हम आपको राज्य के एक प्राचीन किले (अत्तूर फोर्ट) के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके विषय में अधिकांश पर्यटक अंजान हैं। जानिए यह किला आपको किस प्रकार आनंदित कर सकता है।

अत्तूर का किला

अत्तूर का किला

PC- Thamizhpparithi Maari

अत्तूर फोर्ट एक ऐतिहासिक किला है, जो राज्य के सेलम जिले में स्थित है। इस किले का निर्माण 17वीं शताब्दी के दौरान लक्ष्मण नायक (मदुरै नायक) द्वारा किया गया था। इतिहाल के विभिन्न कालखंडों में इस किले पर हैदर अली, टीपू सुल्तान और अंग्रेजों द्वारा कब्जा किया गया था । 1854 तक इस किले को अंग्रेजों ने एक छावनी बना कर रखा और जिसके बाद से अबतक यह किला खाली पड़ा है। वर्तमान में अत्तूर फोर्ट भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग के नियंत्रण में है। किले के कुछ भाग समय की मार तले ध्वस्त हो चुके हैं जबकि कई अहम हिस्सों को आज भी देखा जा सकता है। अत्तूर नगर वशिष्ठ नदी के दक्षिण किनारे पर स्थित है। मैसूर शासन के दौरान यह नगर अत्तूर अनंतगिरी के नाम से जाना जाता था, लेकिन 18वीं शताब्दी के अंत में यह सिर्फ अत्तूर कहा जाने लगा। मैसूर की तीसरी लड़ाई के बाद यह क्षेत्र मद्रास प्रेसीडेंसी के अंतर्गत आ गया था। काफी समय तक यह किला अंग्रेजों के अधीन रहा।

क्यों आएं अत्तूर फोर्ट ?

क्यों आएं अत्तूर फोर्ट ?

PC-Sophia Jayaraman

अत्तूर फोर्ट की सैर कई मायनों में आपकी यात्रा को खास बना सकती है। एक इतिहास प्रेमी के लिए यह किला किसी खजाने से कम नहीं। भारतीय अतीत के कई अहम पहलुओं का यहां आकर समझा जा सकता है। कला-वास्तुकला में दिलचस्पी रखने वाले भी इस किले का भ्रमण कर सकते हैं। कुछ नया जानने वाले ट्रैवलर के लिए भी यह स्थल काफी मायने रखता है। अपनी दक्षिण यात्रा को ज्ञानवर्धक बनाने के लिए आप यहां आ सकते हैं।

वास्तुकला

वास्तुकला

PC-Thamizhpparithi Maari

यह एक विशाल किला है, जो 62 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है। किले की दीवारें काफी मजबूत हैं, जानकारी के अनुसार दीवारे 30 फीट लंबी और 15 फीट चौड़ी हैं। सुरक्षा का ध्यान रखकर इन मजबूत दीवारों का निर्माण किया गया था। किले के निर्माण में पत्थरों का अधिक इस्तेमाल किया गया है। किले की पूर्व दिशा से एक नदी है, और बाकी दिशाएं खाई से घिरी हुई है। किले के अंदर मौजूद बड़े हॉल का इस्तेमाल दर्शन हॉल के रूप में किया जाता था। यहां एक पूल हाउस भी बना हुआ था जो शाही परिवार द्वारा इस्तेमाल किया जाता था।

आने का सही समय

आने का सही समय

PC-Thamizhpparithi Maari

चूंकि यह एक ऐतिहासिक स्थल है, इसलिए यहां पर्यटको का आगमन साल भर लगा रहता है, लेकिन अगर आप सुखद मौसम के अनुरूप भ्रमण का प्लान बनाना चाहते हैं, तो यहां अक्टूबर से लेकर अप्रैल के मध्य आ सकते हैं। इस दौरान यहां का मौसम काफी अनुकून बना रहता है।

कैसे करें प्रवेश

कैसे करें प्रवेश

PC- Sophia Jayaraman

अत्तूर फोर्ट आप परिवहन के तीनों साधनों की मदद से पहुंच सकते हैं, यहां निकटवर्ती हवाईअड्डा सेलम एयरपोर्ट है। रेल मार्ग के लिए आप अत्तूर रेलवे स्टेशन का सहारा ले सकते हैं। अगर आप चाहें तो यहां सड़क मार्गों से भी पहुंच सकते हैं, बेहतर सड़क मार्गों से अत्तूर किला राज्य के कई छोटे-बड़े शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

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