बैंगलोर में ट्रैफिक जाम की समस्याएं जगजाहिर हैं। कहा जाता है कि एक बार अगर कोई व्यक्ति बैंगलोर के ट्रैफिक जाम में फंस गया तो कम से कम 2-3 घंटे तो यूं ही उसके गुजर जाने वाले हैं। अक्सर बैंगलोर में ट्रैफिक जाम से जुड़ी कोई-न कोई फोटो या वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल होती रहती है जिसमें कभी कोई आईटी कर्मी ट्रैफिक जाम में फंसकर ही ऑफिस की ऑनलाइन मीटिंग में शामिल होता है तो कभी...
कोई गुजराती महिला ट्रैफिक जाम की बोरियत को दूर करने के लिए गरबा करने लगती हैं। लेकिन बैंगलोर की ट्रैफिक पुलिस ने इस जाम की समस्या से निपटने के लिए अब कमर कस ली है। मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार अब बैंगलोर ट्रैफिक पुलिस सभी प्रमुख जंक्शनों पर AI संचालित (AI Powered) ट्रैफिक सिग्नलों को पूरी तरह से लागू करने का फैसला लिया है।

बैंगलोर Adaptive Traffic Control System (BATCS) तकनीक के तहत यातायात को सुव्यवस्थित करने और ट्रैफिक सिग्नलों पर मैनुअल हस्तक्षेप को कम करने के लिए इसे डिजाइन किया गया है।
इस बाबत The Hindu की रिपोर्ट में बताया गया है कि इस साल मई के महीने से ही बैंगलोर ट्रैफिक पुलिस BATCS तकनीक को लागू कर रही है, जिसे रियल टाइम में ट्रैफिक की स्थिति के आधार पर सिग्नल को एडजस्ट करने के लिए ही खासतौर पर डिजाइन किया गया है। ट्रैफिक पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से पूरे शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने और ट्रैफिक सिग्नल को मैनेज करने के किसी एक व्यक्ति पर डाले जाने वाले बोझ से भी छुटकारा मिलेगा।
हाल ही में मीडिया से बात करते हुए बैंगलोर के पुलिस कमिश्नर बी. दयानंद ने कहा कि पिछले मई के महीने से ही BATCS परियोजना की शुरुआत कर दी गयी थी। वर्तमान के 136 चौराहों (Crossings) पर AI संचालित ट्रैफिक सिग्नल को अपग्रेड करने के साथ-साथ 29 नये सिग्नलों पर भी लगाए जाएंगे। इसके बाद पूरे शहर के कुल 165 ट्रैफिक सिग्नल AI द्वारा संचालित होंगे। उन्होंने बताया कि हमने 50 प्रतिशत काम पूरा कर भी लिया है और बाकी के 50 प्रतिशत काम अगले साल मार्च तक पूरे कर लिये जाएंगे।
क्या होगी BATCS सिस्टम की विशेषताएं?
मीडिया से बात करते हुए बैंगलोर के संयुक्त ट्रैफिक कमिश्नर एम.एन. अनुचेत ने कहा कि BATCS अपनी अनोखी AI-संचालित क्षमताओं के कारण काफी अलग है। यह सिस्टम ट्रैफिक जंक्शनों पर लगाए गये कैमरा सेंसर से मिली जानकारियों की मदद से ट्रैफिक के घनत्व का पता लगाता और उसके आधार पर सिग्नल टाइमिंग को एडजस्ट करता है। इससे ट्रैफिक के बहाव को लगातार बनाए रखना आसान होता है, जाम में फंसने जैसी समस्याएं कम होती हैं।

बताया जाता है कि BATCS का सबसे बड़ी खासियत है कि इसे केंद्रीय रूप से मॉनिटरिंग और सेंट्रल कमांड सेंटर की मदद से ट्रैफिक सिग्नलों को कंट्रोल किया जा सकता है। इससे ट्रैफिक जाम की समस्या दिखाई देने या किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने पर सिग्नल की टाइमिंग को एडजस्ट करने में ट्रैफिक पुलिस को आसानी होती है। प्रमुख ट्रैफिक कॉरिडोर के साथ मिलाकर 'ग्रीन वेव्स' (Green Waves) बनाएं जाते हैं, जिससे वाहनों को कई क्रॉसिंग बिना रुके पार करने की अनुमति मिल जाती है, जिससे निश्चित रूप से ईंधन की बचत भी होती है।
एम.एन. अनुचेत का कहना है कि AI तकनीक से लैस होने की वजह से यह सिग्नल आपातकालिन वाहनों की पहचान करने में भी सक्षम होता है। इसके साथ ही पैदल चलने वाले लोगों की सुविधाओं का ध्यान रखने में भी यह सिग्नल भविष्य में सक्षम होगा। अगर किसी जगह पर दुर्घटना घटती या ट्रैफिक से संबंधित कोई समस्या पैदा होती है तो BATCS योजनाओं का विश्लेषण कर अगले प्रमुख ट्रैफिक सिग्नलों को उसके आधार पर एडजस्ट करने में सक्षम होता है, ताकि ट्रैफिक के बहाव को सुनिश्चित किया जा सकें।
योजनाबद्ध तरीके से लगेंगी AI संचालित ट्रैफिक सिग्नल पद्धति
मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार जनवरी 2025 तक बैंगलोर ट्रैफिक पुलिस ने 165 ट्रैफिक जंक्शनों पर AI संचालित ट्रैफिक सिग्नल को लगा देने की योजना बनायी है। लेकिन यह AI संचालित ट्रैफिक सिग्नलों को लगाने का दूसरा चरण होगा।
तीसरे चरण में शहर भर के करीब 400 अन्य जंक्शनों पर भी इसे लगाने की योजना बनायी गयी है। ट्रैफिक पुलिस को उम्मीद है कि एक बार पूरी तरह से सिस्टम को लागू कर दिया जाता है तो ट्रैफिक जाम और एक जगह से दूसरी जगहों पर आने-जाने में लगने वाले समय में काफी कमी लायी जा सकेगी। इसके साथ ही यह सड़क सुरक्षा को बढ़ाने में भी कारगर साबित होगा।
बैंगलोर से जुड़े आंकड़ों पर एक नजर -
आबादी - 1 करोड़ 40 लाख
रोड नेटवर्क - 14,000 किमी
रजिस्टर्ड वाहनों की संख्या - 1 करोड़ 20 लाख
चौराहा - 40,000 से ज्यादा
ट्रैफिक सिग्नल - 400 से ज्यादा



Click it and Unblock the Notifications














