बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (KIA) का संचालन करने वाली बेंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (BIAL) ने निजी एविएशन कंपनी सरला एविएशन के साथ हाथ मिलाया है। दोनों बेंगलुरु एयरपोर्ट के लिए एयर टैक्सी को शुरू करने की योजना बना रहे हैं। इस घोषणा के साथ ही बेंगलुरु दुनिया भर के उन चुनिंदा एयरपोर्ट्स की सूची में शामिल हो चुका है जहां एयरपोर्ट के लिए एयर टैक्सी की सेवाओं को शुरू करने की योजना है।
इस टैक्सी से टाइम कम लगेगा यह तो समझ में आता है, लेकिन किराया इतना कम होगा, यह सोचने वाली बात है। 1700 रुपए में इलेक्ट्रॉनिक सिटी से एयरपोर्ट उड़ कर जाना, यानी कि प्राइम सिडान टैक्सी के बराबर किराया! क्या यह वाकई में संभव है? आइये गहराई से समझते हैं।

बेंगलुरु के इलेक्ट्रॉनिक सिटी से इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बीच की दूरी लगभग 37.5 किमी है, जिसे किसी भी कैब (प्राइम SUV) से तय करने में करीब 152 मिनट का समय लगता है। लेकिन एयर टैक्सी से महज 19 मिनट का समय लगेगा। वहीं ओला (प्राइम SUV) कैब से इस दूरी को तय करने का किराया लगभग ₹2500 होता है जबकि प्राइम सिडान से 1700 रुपए। जबकि दावों के अनुसार सरला एयर टैक्सी से यह दूरी ₹1700 में तय की जा सकेगी।
ऐसा हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि यह दावा खुद सरला एविएशन की तरफ से किया गया है। अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सरला एविएशन ने इस दावे के साथ ही यह भी बताया कि भविष्य में वह दुनिया के 4 सबसे अधिक घनी आबादी वाले शहरों, मुंबई, बेंगलुरु, दिल्ली और पुणे में यातायात के अनुभवों को पूरी तरह से बदलने वाले हैं। उनका दावा है कि वह एरियल राइड को वर्तमान में ओला और उबर जैसे खर्च में ही आम लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बेंगलुरु में यह संभव है? क्या वास्तव में मात्र ₹1700 में बेंगलुरु में इलेक्ट्रॉनिक सिटी से इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक की दूरी को तय किया जा सकता है? चलिए पता लगाने की कोशिश करते हैं -
कहां-कहां हो सकता है खर्च?
बेंगलुरु में एयर टैक्सी को शुरू करने की घोषणा तो कर दी गयी है लेकिन हम सभी जानते हैं कि इसके लिए कई स्तरों पर अनुमति की जरूरत होगी।
1. एरियल वाहन - भारत में अभी तक कहीं भी एयर टैक्सी की शुरुआत नहीं हुई है। इसलिए एयर टैक्सी के लिए विशेष रूप से एरियल वाहनों का उत्पादन करना होगा। मीडिया रिपोर्ट्स में किये जाने वाले दावों को अगर सच मानें तो एयर टैक्सी में एक बार में कम से कम 7 यात्री सवार हो सकेंगे। ऐसे में इन वाहनों का आकार ड्रोन जैसा कोई छोटा-मोटा नहीं होगा।
इसलिए हम अंदाजा लगा सकते हैं 7 से 8 यात्रियों (पायलट समेत) के लिए किसी एरियल वाहन को बनाने में कितना खर्च आ सकता है और ऐसे एरियल वाहनों के निर्माण के लिए भी निश्चित रूप से विशेष अनुमति की जरूरत होने वाली है। वेबसाइट फ्लाइंग मशीन पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार एक एयर टैक्सी की कीमत 13 लाख डॉलर होगी यानी करीब 10 करोड़ रुपए। चलिए भारतीय कंपनी ने इसे कम खर्च पर बना भी लिया तो भी इसकी कीमत कम से कम 2 करोड़ रुपए तो होगी ही।
जरा सोचिए सिडान जिसकी कीमत 15 से 20 लाख रुपए तक होती है, उसका और एयर टैक्सी का किराया बराबर कैसे हो सकता है।
2. केवल ड्राइवर नहीं - आम तौर पर टैक्सी से होने वाली कमाई से ड्राइवर का घर चलता है और थोड़ा बहुत हिस्सा उबर, ओला, आदि ऐप को जाता है। इसके अलावा पेट्रोल-डीजल का खर्च होता है। अब अगर एयर टैक्सी की बात करें तो इसे चलाने के लिए केवल पायलट की जरूरत नहीं होगी, बल्कि एयर-सिग्नल कंट्रोल रूम से टैक्सी की दिशा पर नज़र रखने के लिए भी एक व्यक्ति की जरूरत होगी। इसके अलावा वेरीपोर्ट (जहां एयर टैक्सी लैंड करेगी) के कर्मी अलग। इन सबकी सैलरी निकालनी है तो क्या किराया 1700 रुपए में संभव हो पायेगा? सोचने वाली बात है।
3. रूट का निर्धारण - एयर टैक्सी को एयरपोर्ट तक के लिए चलाने की योजना है। ऐसे में रूट का निर्धारण करना बेहद जरूरी होगा। कहीं ऐसा न हो जाए कि एयर टैक्सी की वजह से विमान सेवाएं प्रभावित होने लगे या दुर्घटना की आशंका पैदा हो जाए। रूट के निर्धारण के साथ ही सबसे पहले यात्रियों को पिक-अप और ड्रॉप करने के लिए एयर टैक्सी के लैंड करने की जगह अथवा हेलीपैड बनानी होगी। जिसके लिए जरूरी हुआ तो स्थान भी खरीदना पड़ सकता है।

कितनी देर पर मिलेगी एयर टैक्सी?
किसी भी सामान्य दिनों में बेंगलुरु की सड़कों पर कम से कम 10 हजार गाड़ियां, कैब, ऑटो आदि तो होते ही हैं। अब इतनी ही संख्या में एयर-टैक्सी तो चलायी नहीं जा सकती है। यानी कि कैब के मुकाबले एयर टैक्सी के कुल सीटों की संख्या में कमी होगी। बात अगर एयर टैक्सी की करें तो ज्यादा से ज्यादा 20 अथवा 25 वर्टिकल वाहनों का संचालन ही एक बार में किया जा सकेगा, क्योंकि एयर टैक्सी का रूट निर्धारित होगा और सुरक्षात्मक कारणों से इन एरियल टैक्सियों की भीड़ भी नहीं लगायी जा सकेगी।
ऐसे में किराया यदि कम होता है, तो एयरपोर्ट जाने अथवा एयरपोर्ट से अपने गंतव्य तक जाने के लिए एयर टैक्सी की मांग भी काफी ज्यादा होगी। ऐसी स्थिति में एयर टैक्सी की उपलब्धता पर सवाल जरूर उठेंगे। क्या मांग के अनुसार एयर टैक्सी उपलब्ध होंगे? या सामान्य कैब की तरह ही घंटों कोशिशों के बाद एक एयर टैक्सी बुक हो सकेगी?
कहीं कोई Hidden चार्ज तो नहीं?
हमने अक्सर सामानों की कीमतों के पास छोटे-छोटे अक्षरों में लिखा देखा है 'Terms and conditions apply'। क्या बेंगलुरु में इलेक्ट्रॉनिक सिटी से एयरपोर्ट के बीच एयर टैक्सी का किराया मात्र ₹1700 रखने के पीछे ऐसी कोई वजह तो नहीं है, जो हमें अभी दिखाई नहीं दे रही! महंगे वर्टिकल वाहनों का उत्पादन/खरीद का खर्च, रख-रखाव के लिए नियुक्त होने वाले कर्मियों का वेतन, पूरी एयर टैक्सी सर्विस का सेट-अप तैयार करने का खर्च, पायलट का वेतन, लैंडिंग के लिए एयर स्टेशन बनाने का खर्च और रूट आदि के लिए सर्वर से लेकर रडार आदि तक का सेटअप तैयार करने में जो खर्च आएगा, क्या उसके बाद पूरा किराया मात्र ₹1700 रखा जा सकता है?
या कहीं यह सिर्फ बेस फेयर (Base Fare) है, इसके साथ Hidden चार्जेस जैसे स्टेशन का खर्च, वाहन का अलग से खर्च और GST व विभिन्न तरह के Tax जोड़कर असली किराया ₹3000-₹4000 तक पहुंचने की संभावना है! अगर ऐसा होता है तो हम दावे के साथ कह सकते हैं कि एयर टैक्सी आम लोगों की पहुंच से हमेशा बाहर ही रहने वाली होगी। यह समाज के ऊंचे तबके के लोगों के जरूर मददगार साबित होगी लेकिन आम लोगों तक अपनी पहुंच बनाना सरला एविएशन के लिए एक सपना बनकर ही रह जाएगा।
आपको क्या लगता है, क्या मात्र ₹1700 किराए पर (जैसा सरला एविएशन के आधिकारिक वेबसाइट पर दावा किया गया है) बेंगलुरु में एयर टैक्सी को चलाना संभव होगा या यह सिर्फ शुरुआती कीमत हैं?



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