हैलेबिडु को द्वारसमुद्र के नाम से भी जाना जाता है। कर्नाटक के हसन जिले में स्थित हैलेबिडु होयसला साम्राज्य की शानदार राजधानी हुआ करता था। हैलेबिडु का अर्थ है प्राचीन शहर एवं 14 वीं शताब्दी में मलिक काफुर की सेना द्वारा लूट जाने के बाद इस शहर को ये नाम दिया गया था। 12 से 13 ईस्वीं तक 150 सालों तक ये शहर शाही राजाओं की राजधानी रह चुका है।
इस जगह पर होयसला काल के कारीगरों, शिल्पकारों की निपुण स्थापत्यकला को देख सकते हैा। होयसलेश्वर मंदिर और केदारेश्वर मंदिर उस काल के सबसे उत्कृष्ट मंदिरों में शामिल हैं। इन दोनों मंदिरों के द्वारा सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक खुलते हैा। बैंगलोर से महज़ 5 घंटे की दूरी स्थित होने के कारण वीकेंड पर आप यहां घूमने आ सकते हैं।

बैंगलोर से हैलेबिडु रूट
रूट 1 : राजजीनगर - एनएच 75 - बी कट्टीहली में एसएच 71 ई - एसएच 21 - हैलेबिडु (209 किमी - 3 घंटे 45 मिनट)
रूट 2 : एनआईसीई बेंगलुरु - मैसूर एक्सप्रेसवे - एनएच 275 - सवानदुर्ग - मंचनबेले रोड - मगदी - कुनीगल रोड - एनएच 75 (224 किमी - 4 घंटे 15 मिनट)

नेलामंगला
बैंगलोर 26 किमी की दूरी पर स्थित नेलामंगला शहर बेहद खूबसूरत है। बिन्नामंगला को विश्व शांति आश्रम के नाम से भी जाना जाता है। ये काफी सुंदर पार्क है जिसके साथ पांछुरंगा और विश्वरूप विजय विटला की मूर्तियां हैं।
यहां के लक्ष्मी वेंकेटरमन स्वामी मंदिर की खास बात यह है कि इस मंदिर में देवी की पूजा गरुड़ के साथ पूजा होती है। इस मंदिर में स्तंभों के बीच तीन मूर्तियां स्थापित हैं जोकि चोला शैली में निर्मित हैं।

आदिचुंचानगरी पर्वत
नेलामंगला से 88 किमी दूर स्थित आदिचुंचानगरी कर्नाटक के वोक्कालिगा समुदाय का प्रमुख धार्मिक स्थल है। आदिचुंचानगरी मठ को महासमस्थना मठ के नाम से भी जाना जाता है। ये मठ चट्टानी पहाडी पर स्थित है।
इसके अलावा इस पहाड़ी पर कई मंदिर हैं जिनमें से कालभैरेश्वर मंदिर भी शामिल है। इस मंदिर को आदिचुंचानगरी मठ का क्षेत्र पलक कहा जाता है। इस मंदिर में भगवान गंगाधरेश्वर की पूजा होती है।
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श्रावणबेलगोला
आदिचुंचानगरी से 50 किमी दूर स्थित है श्रावणबेलगोला जोकि एक अन्य ऐतिहासिक शहर है। यहां पर दक्षिण भारत का प्रसिद्ध जैन मंदिर है एवं यहां पर बड़ी संख्या में दिगंबर मंदिर और संरचनाएं हैं।
श्रावणबेलगोला गोमतेश्वर की विशाल मूर्ति के लिए प्रसिद्ध है। ये भगवान बाहुबली की दुनिया में एक पत्थर से बनाई गई एकमात्र सबसे लंबी मूर्ति है।
ग्रेनाइट के एक पत्थर से बनी इस मूर्ति की लंबाई 58 फीट है और ये विंध्यागिरी पर्वत से 3,347 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इस मूर्ति के दर्शन करने के लिए 600 सीढियां चढ़नी पड़ती हैं।PC:G41rn8

चन्नारायनपटना
श्रावणबेलगोला से 12 किमी दूर है चन्नारायपटना जहां कई खूबसूरत मंदिर स्थापित हैं। यहां पर स्थित लक्ष्मी नरसिम्हा मंदिर और सदाशिव मंदिर पर्यटकों के बीच सबसे ज्यादा प्रसिद्ध हैं।
होयसला काल के दौरान ग्यारहवीं शताब्दी में इन मंदिरों को बनवाया गया था। इन मंदिरों में होयसला साम्राज्य की स्थापत्यकला को देख सकते हैं।
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हसन
होयसला राजवंश का राज हसन में हुआ करता था। इस जगह को देची हस्सानांबा पर ये नाम दिया गया है। वह इस शहर की संरक्षक देवी हैं। इस शहर में बेलूर, हालेबिदु, श्रावणबेलगोला जैसे कई पुरातात्विक स्थल हैं।
हसन शहर पर लंबे समय तक होयसला साम्राज्य का शासन रहा है। होयसला काल में इसके कई राजाओं ने दक्षिण भारत के कई हिस्सों पर राज किया है। इस जगह का नाम यहां पर पूजनीय हासनंबा देवी के नाम पर पड़ा है। हासनंबा मंदिर को बारहवी शताब्दी में बनवाया गया था। यह मंदिर प्रमुख धार्मिक स्थल है।
हैलेबिडु के अन्य मंदिरों के बारे में पढ़ेंPC:Kishore328

होयसलेश्वर मंदिर
भगवान शिव को समर्पित विशाल मंदिरों में से एक है हालेबिदु को हायेसलेश्वर मंदिर जोकि काफी खूबसूरत है और इसका नाम यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है। इसका निर्माण राजा विष्णुवद्धर्न होयसलेश्वर के काल में बनवाया गया था। कहा जाता है कि इस शहर का नाम उन्हीं के नाम पर रखा गया था।
ये मंदिर साबुन बनाने वाले पत्थर से बना है एवं इसमें होयसलेश्वर और शंथलेश्वर की दो मूर्तियां स्थापित हैं जोकि राजा विष्णुवर्द्धना और रानी शांतला देवी की हैं।PC:Ashwin Kumar

केदारेश्वर मंदिर
हायेसलेयश्वर मंदिर से कुछ किलोमीटर दूर स्थित है भगवान शिव का अन्य शानदार मंदिर केदारेश्वर। इस मंदिर में तीन मूर्ति स्थापित हैं जिनमें से केंद्र में स्थित मूर्ति मुख्य है।
इस मंदिर को होयसला राजा वीर बल्लाल 2 और रानी केतलादेवी द्वारा बनवाया गया था। अब यह मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में है।PC:Dineshkannambadi

बसदी पर्वत
होयसलेश्वर मंदिर और केदारेश्वर मंदिर के बीच स्थित है बसदी पर्वत। यहां पर कई जैन मंदिर स्थापित हैं जिनमें से तीन जैन मंदिर आदिनाथ स्वामी मंदिर, पार्श्वनाथ स्वामी मंदिर और शांतिनाथ स्वामी मंदिर प्रमुख हैा। इस क्षेत्र में और भी मठ स्थापित हैं।
काले पत्थर से बनी पार्श्वनाथ स्वामी की मूर्ति 14 फीट ऊंची है। भगवान के सिर पर सात मुख वाला सर्प उनकी रक्षा कर रहा है।
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वीर नारायण मंदिर
होयसला साम्राज्य की कला का एक और उत्कृष्ट नमूना है वीर नारायण मंदिर जोकि हालेबिदु से 11 किमी दूर बेलावादी में स्थित है। किवदंती है कि पांडव पुत्रों में से एक भीम ने ग्रामीणों की रक्षा के लिए यहां पर राक्षस बकासुर का वध किया था।
भगवान विष्णु को समर्पित इस मंदिर को होयसलस राजा वीर बल्लाल 2 द्वारा बनवाया गया था।

बेलूर
हैलेबिडु से 22 किमी दूर है बेलूर एवं यहां पर स्थित चेन्नाकेसावा मंदिर बेजोड़ स्थापत्य कला का नमूना है। पूर्व में बेलूर होयसला साम्राज्य की राजधानी था। बेलूर चेन्नाकेयावा मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। इस मंदिर में आप होयसला काल के कारीगरों की कला को देख सकते हैं। इसे होयसला राजा विष्णुवर्द्धना द्वारा याग्चि नदी के तट पर बनवाया गया था।
मंदिर का प्रांगण, संरचनाएं, स्तंभ और मूर्तियां उस काल के कलाकारों की निपुणता को दर्शाते हैं। मंदिर की दीवारों पर होयसला कलाकारों की नक्काशी को देख सकते हैं।PC:Dineshkannambadi



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