हाल ही में मुंबई में घाटकोपर इलाके के ऊपर से उड़ते विमान से टकराकर 30 से ज्यादा फ्लेमिंगो पक्षियों की मौत की खबर खूब चर्चाओं में छाया हुआ है। अक्सर विमान से पक्षियों के टकराने की वजह से हादसा होते-होते बच जाना, विमान का क्षतिग्रस्त हो जाना अथवा पक्षियों की मौत की खबरें सामने आती रहती हैं। देश के लगभग सभी एयरपोर्ट ही विमान और परिसर से पक्षियों को दूर रखने का प्रयास भी करते हैं।
बैंगलोर एयरपोर्ट पर पिछले कुछ समय में ऐसे किसी भी हादसे की खबर नहीं मिली है। इस बारे में डेक्कन हेराल्ड की एक रिपोर्ट में बैंगलोर एयरपोर्ट के अधिकारियों ने उस तकनीकों के बारे में स्पष्ट किया, जिसकी मदद से वे पक्षियों को विमान और एयरपोर्ट परिसर से दूर रखने में कामयाब होते हैं।

बैंगलोर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (BIAL) के पास एक समर्पित विभाग है, जो पक्षियों की वजह से उत्पन्न किसी भी खतरनाक परिस्थिति से निपटने में सक्षम है। BIAL के अधिकारियों ने पक्षियों के धक्के से संबंधित घटनाओं को रोकने के लिए अपनाए जाने वाले प्रोटोकॉल के बारे में बताया।
बैंगलोर का केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास कई प्रजाति के पक्षियों का बसेरा है, जो इलाके में घूमकर अपने लिए भोजन की तलाश करते रहते हैं। इस बारे में BIAL के एक अधिकारी ने बताया कि एयरपोर्ट के आसपास पक्षियों का दिखाई देना बहुत ही आम घटना है।
एयरपोर्ट के आसपास जिन प्रजातियों के पक्षी सर्वाधिक नजर आते हैं, उनमें काली पतंगें, ब्राह्मणी पतंगें, जलकाग, डार्टर, सारस, काले कंधों वाली पतंगें, कबूतर, लैपविंग, कॉमन कूट, बगुला, तालाब के बगुले, छोटे हरे मधुमक्खी खाने वाले पक्षी, भारतीय रॉबिन और भारतीय रोलर आदि शामिल हैं। हालांकि सीजन में अंतर के साथ ही पक्षियों की प्रजाति में भी अंतर आता रहता है।

बैंगलोर एयरपोर्ट का बर्ड एयर स्ट्राइक एंड हजार्ड मैनेजमेंट विभाग के कर्मचारी विमान से पक्षियों के टकराने जैसी घटनाओं का मुकाबला करने में सक्षम होते हैं।
पर पक्षियों की वजह से उत्पन्न खतरनाक घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गये हैं?
बैंगलोर एयरपोर्ट के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इंटरनेशनल सीविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन और DGCA के दिशानिर्देशों के आधार पर वन्यजीव खतरा प्रबंधन प्लान को लागू किया गया है। एयरपोर्ट के विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्राप्त कर्मचारियों की नियुक्ति की गयी है जो वास्तविक समय में पक्षियों और वन्यजीवों की गतिविधियों पर अपनी नजरें बनाएं रखें और जरूरत होने पर उन्हें डराकर भगाते भी रहे।
इसके अतिरिक्त, कई अन्य उपाय यह सुनिश्चित करते हैं कि क्षेत्र वन्यजीवों और पक्षियों के लिए गैर-अनुकूल बना रहे, जिनमें पक्षियों को मानवीय तकनीक से डराना, संकट संकेत देना आदि शामिल हैं। इसी का नतीजा है कि बैंगलोर एयरपोर्ट पर विमान से पक्षियों के टकराने की कोई गंभीर घटना नहीं घटी है।
BIAL के अधिकारी का कहना है कि एयरपोर्ट के महत्वपूर्ण क्षेत्रों और आसपास के इलाकों में दूरबीन से स्कैन करके पक्षियों की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। अगर पक्षियों की उपस्थिति की जानकारी मिलती है तो उन्हें डराने वाले संकेत तुरंत भेज दिये जाते हैं। पक्षियों को डराने के लिए शोर पैदा करना आदि उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है।

दूसरे एयरपोर्ट्स से कहां अलग है बैंगलोर एयरपोर्ट?
डेक्कन हेराल्ड की मीडिया रिपोर्ट में एक पायलट ने दावा किया कि एयरपोर्ट परिसर से पक्षियों को दूर रखने में सबसे अधिक मददगार साफ-सफाई साबित होते हैं। उक्त पायलट का कहना है कि पक्षियों को एयरपोर्ट परिसर से दूर रखने के लिए अक्सर तेज आवाज वाले पटाखे और बिजूका आदि का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन सफाई नहीं होने की वजह से कई बार वे फिर से रन-वे पर वापस लौट आती हैं।
बैंगलोर एयरपोर्ट पर साफ-सफाई का ज्यादा ध्यान रखा जाता है। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट परिसर में किसी भी तरह के झाड़-झंखार उगने नहीं देना चाहिए। अगर किसी कोने में थोड़ा सा भी झाड़ उग जाता है तो वह भी पक्षियों व जानवरों को आकर्षित कर सकता है। घास आदि को निर्धारित लंबाई का ही रखना चाहिए, ताकि पक्षियों को वहां ज्यादा कुछ न मिले और पक्षियों आदि पर नजरें बनाकर रखने में सुविधा हो।



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