सर्दियों के शुरुआत के समय जहां अधिकतर शहरों की हवा में केक और बेकरी की खुशबू तैरने लगती है लेकिन बैंगलोर किसी भी दूसरे शहर से काफी अलग होता है। सर्दियों के शुरुआत में बैंगलोर में केक या बेकरी नहीं बल्कि भूनी हुई मूंगफली के सुगंध से भर जाता है। यहीं वह समय होता है जब बैंगलोर का प्रसिद्ध मूंगफली मेला यानी कदलेकई पैरिश (Kadalekai Parishe) मनाया जाता है।

यह त्योहार किसानों, कर्नाटक के स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को फसल, कन्नड़ संस्कृति और एक साथ मिलकर खुशियां मनाने की भावना से जोड़ता है। यह त्योहार बैंगलोर का एक स्थानीय उत्सव है।
कदलेकई पैरिश का ऐतिहासिक महत्व
कदलेकई पैरिश या Peanut Festival का इतिहास सदियों पुराना है। इसे हर साल कार्तिक माह के आखिरी सोमवार को आयोजित किया जाता है। यह उत्सव बसवनगुड़ी में डोड्डा गणेश मंदिर और नंदी मंदिर के पास आयोजित होता है।

इस मेले का आयोजन सिर्फ व्यापारिक लक्ष्य से ही नहीं बल्कि मेला परिसर एक सांस्कृतिक मिलन स्थल बन जाता है जहां किसान इस साल उगे फसल के लिए भगवान को धन्यवाद और अगले साल के लिए आर्शीवाद मांगते हैं। मेले मे आने वाले लोग यहां लगने वाले मूंगफली के असंख्य स्टलों पर विभिन्न स्वादों वाली मूंगफलियों का स्वाद चखने के उमड़ते हैं।
कब होगा आयोजित
इस साल कदलेकई पैरिश 9 दिसंबर से 11 दिसंबर तक आयोजित होने वाला है। इसमें से मुख्य कार्यक्रम 11 दिसंबर को आयोजित होगा।
मूंगफली के मेले में और भी काफी कुछ

कदलेकई पैरिश का मुख्य आकर्षण निःसंदेह मूंगफली ही होता है, जहां कच्ची से लेकर भूनी और मसालेदार से लेकर विभिन्न प्रकार से पकायी हुई मूंगफलियों के व्यंजनों की बिक्री होती है। Foodie हो या जिज्ञासु सभी इन व्यंजनों को चखने और इस मेले की भीनी-भीनी खुशबू में खो जाने के लिए यहां पहुंचते हैं। एक भारतीय मेला जिसमें खाने-पीने के लज़ीज व्यंजन, फेरीवलों की आवाजों, लोक संगीत से लेकर लोगों की चहल-पहल तक, हर तरह का रंग देखने को मिलता है। मेले में काफी संख्या में लोग मिट्टी से बनी चीजें, हैंडलूम वस्त्र आदि खरीदने के लिए आते हैं।

कदलेकई पैरिश या Peanut Festival सिर्फ एक त्योहार नहीं है बल्कि यह खुद को मिट्टी से जोड़े रखने का जश्न है जो आधुनिक शहर बैंगलोर के केंद्र में फल-फुल रहा है। स्वादिष्ट और कुछ अनोखे व्यंजनों का स्वाद चखना, सांस्कृतिक उत्सवों में भाग लेना या फिर एक सर्द शाम में लोगों की भीड़ में खुद गुम कर देना, हर एक के लिए इस मेले में काफी कुछ है। हर साल सैंकड़ों किलो मूंगफली लेकर किसान कदलेकई पैरिश में पहुंचते हैं और उम्मीद लगाते हैं कि उनका सारा सामान बड़े ही आराम से बिक जाएगा।
अगर आप भी बैंगलोर या फिर आसपास के किसी जगह रहते हैं तो इस साल जा रहे हैं न कदलेकई पैरिश।



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