दुनिया भर में भगवान गणेश को समर्पित कई मंदिर हैं, जिनके साथ कई चौंकाने वाली कहानियां भी जुड़ी हुई है। उत्तराखंड में बिना सिर वाले भगवान गणेश की पूजा होती है तो मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर में भगवान गणेश की मूर्ति जिनका सूंड दाहिनी ओर (हर मूर्ति में बांयी ओर मुड़ा होता है) मुड़ा हुआ है।

ऐसा ही एक अनोखा मंदिर कर्नाटक की राजधानी बैंगलोर में स्थित है जहां भगवान गणेश का श्रृंगार फुलों या गहनों से नहीं बल्कि मक्खन से किया जाता है। इस मंदिर का इतिहास अंग्रेजों से मोर्चा लेने वाले टीपू सुल्तान से भी जुड़ा हुआ है।
कहां मौजूद है यह प्राचीन मंदिर
भगवान गणेश का यह मंदिर जिसे 'डोडा गणपति मंदिर' के नाम से भी जाना जाता है, बैंगलोर के बसावनगुड़ी में स्थित है। कन्नड़ में डोडा का अर्थ बड़ा होता है, यानी डोडा गणपति का अर्थ हुआ बड़े गणपति का मंदिर। अपने नाम के अनुसार इस मंदिर में भगवान गणेश की एक विशालाकार मूर्ति स्थापित है, जो लगभग 18 फीट ऊंची और 16 फीट चौड़ी है।

काले रंग के केवल एक ही ग्रेनाइट पत्थर पर उकेर कर भगवान गणेश की इस विशाल प्रतिमा को तैयार किया गया है। यह मंदिर बैंगलोर के नंदी मंदिर के ठीक पीछे स्थित है, जिसके बारे में दावा किया जाता है कि यहां विश्व में सबसे बड़ा नंदी की मूर्ति स्थापित है। दावा तो यह भी किया जाता है कि डोडा गणपति मंदिर में भगवान गणेश की मूर्ति स्वयंभू है, यानी वह खुद से उत्पन्न हुई है।
वास्तुकला का है बेहतरीन उदाहरण
बताया जाता है कि डोडा गणपति के मंदिर का निर्माण गौड़ शासकों ने लगभग 1537 के आसपास करवाया था। मंदिर में प्राचीन दक्षिण भारतीय वास्तुकला देखने लायक है। इस मंदिर के गर्भगृह में भगवान गणेश की काले रंग की विशालकाय प्रतिमा स्थापित है, जिसकी पूजा करने के लिए दूर-दूर से लोग यहां पहुंचते हैं। हालांकि कुछ इतिहासकारों का मानना है कि डोडा गणपति का मंदिर काफी ज्यादा पुराना नहीं है। बल्कि यह मंदिर अंग्रेजों के भारत आने के बाद बनाया गया था। मंदिर के निर्माण से लेकर मूर्ति की उत्पन्न होने तक को लेकर भले ही लोगों के भिन्न-भिन्न मत हो, लेकिन इस मंदिर के प्रति लोगों की आस्था में कोई कमी नहीं है।
डोडा गणपति की खासियतें
हर मंदिर की कुछ ना कुछ खासियतें होती हैं, जो उसे दूसरे मंदिरों से अलग बनाती है। उसी प्रकार आस्था के प्रमुख केंद्र डोडा गणपति मंदिर के साथ 2 ऐसी बातें जुड़ी हुई हैं, जो इस मंदिर को लाखों की भीड़ में भी अलग खड़ा करती है।

भगवान गणेश का विचित्र श्रृंगार
डोडा गणपति मंदिर में भगवान गणेश का बड़ा ही विचित्र श्रृंगार किया जाता है। किसी भी आम मंदिर में फुलों या गहनों से अलग डोडा गणपति मंदिर में भगवान गणेश का श्रृंगार 100 किलो मक्खन से किया जाता है। इस सजावट को 'बेन्ने अलंकार' कहा जाता है। पूरी मूर्ति पर 100 किलो मक्खन का लेप लगा दिया जाता है। खास बात है कि गर्भगृह के बेहद गर्म होने के बावजूद भगवान गणेश की मूर्ति पर लगाया गया मक्खन कभी नहीं पिघलता है।

कभी-कभी मक्खन में किशमिश और बादाम मिलाकर भी उसका लेप भगवान गणेश की मूर्ति पर लगाया जाता है। नियमित अंतराल पर भगवान की मूर्ति पर लगाये गये मक्खन को भक्तों के बीच प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। इसके अलावा बाजार में मिलने वाले लगभग हर प्रकार की सब्जियों से भी डोडा गणपति को सजाया जाता है।
टीपू सुल्तान से जुड़े हैं मंदिर के तार
इतिहासकारों का मानना है कि इस मंदिर के तार टीपू सुल्तान से जुड़े हुए हैं। कहा जाता है कि टीपू सुल्तान के सेनापति ने इस मंदिर में बैठकर ही अंग्रेजों के खिलाफ अपनी रणनीति बनायी थी और उनपर हमला किया था।
इस मंदिर में भक्त डोडा गणपति के दर्शन प्रतिदिन सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक कर सकते हैं। इसके बाद शाम को 5.30 बजे मंदिर फिर से खुलता है और रात को 9 बजे बंद होता है।



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